नक्सल लिंक मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार तक पांचों आरोपियों की बढ़ाई नजरबंदी…

नई दिल्ली। शहरी नक्सल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को नजरबंदी को सोमवार तक बढ़ा दिया है। अब इस मामले में सोमवार को सुनवाई होगी। बता दें कि इनकी गिरफ्तारी के खिलाफ इतिहास कार रोमिला थापर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

शहरी नक्सल केस में पांच लोगों को नजरबंद किया गया है जिसमें हैदराबाद से वरवरा राव, दिल्ली से गौतम नवलखा, फरीदाबाद से सुधा भारद्वाज, मुंबई से वरनन गोंजाल्विस और ठाणे से अरुण फरेरा को गिरफ्तार किया गया था।

28 अगस्त को इनकी गिरफ्तारी हुई और फिलहाल ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपने-अपने घरों में नजरबंद हैं। सुप्रीम कोर्ट में नजरबंदी को लेकर अब सोमवार को सुनवाई होगी कि इनकी नजरबंदी खत्म कर गिरफ्तार कर लिया जाए या फिर इन्हें छोड़ दिया जाए। कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा है कि इन्होंने देश के खिलाफ साजिश रची जिसके पक्के सबूत मिले हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अपने हलफनामे में लिखा है।

गिरफ्तार ‘शहरी नक्सली’ प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी के सदस्य हैं। ये ‘शहरी नक्सली’ बैन संगठन के लिए कैडर भर्ती करने से लेकर पैसे का इंतजाम करते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हलफनामे में ये भी कहा है कि अगर इन्हें गिरफ्तारी से हटाकर नजरबंद कर रखा गया तो हो सकता है ये अहम सबूत मिटा दें, लेकिन गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया है कि तथाकथित सभी शहरी नक्सली मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। इस पर हलफनामें में कहा गया है कि गिरफ्तार वरनन गोंजाल्विस नागपुर कोर्ट से दोषी हैं। इधर फैसला आने से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर शहरी नक्सलियों पर कांग्रेस के समर्थन को लेकर सवाल उठाए हैं।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने माओवादी विचारकों की गिरफ्तारी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि असहमति का होना किसी भी लोकतंत्र के लिए सेफ्टी वॉल्व है अगर असहमति की अनुमति नहीं होगी तो प्रेशर कूकर की तरह फट भी सकता है।

भीमा कोरेगांव हिंसा में संभाजी भिड़े का भी नाम आया था, लेकिन आरोप है कि इनके खिलाफ सरकार कुछ नहीं कर रही है और जो सोशल एक्टिविस्ट हैं उनको नक्सली कनेक्शन के नाम पर गिरफ्तार करवा रही है।

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