भूखे की भूख मिटाने से पहले उसका धर्म नहीं पूछता इस्लाम : मासूम

माह-ए-मोहर्रम में मजलिस, मातम व जुलूसों का सिलसिला जारी


जौनपुर। कर्बला में अपने 72 साथियों के साथ शहादत देने वाले हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाये जाने वाले माहे मोहर्रम की दो तारीख को नगर में कई स्थानों पर मजलिस मातम व जुलूस निकालकर लोगों ने नजराने अकीदत पेश किया। नगर के बलुआघाट स्थित इमामबाड़ा मीर सै. अली मरहूम मं मजलिसों का सिलसिला जारी रहा वहीं पहले गुरुवार को शाह का पंजा हाइडिल स्थित इमामबाड़ा में ही सुबह से ही अजादारों का आने का सिलसिला शुरु हुआ जो देर शाम तक चलता रहा। यहां लोगों ने खिचड़ी व जर्दा बनाकर नज्र की और इमाम की बारगाह में नौहा व मातम किया। इस मौके पर अजादारी काउन्सिल के अध्यक्ष तहसीम शाहिद, सरपरस्त इब्ने हसन शहजादे, पूर्व सभासद शाहिद मेंहदी, मिर्जा मोहम्मद बाकर, अल्ताफ व मेंहदी रजा एडवोकेट मौजूद रहे।
इसी क्रम में करंजाखुर्द करंजाकलां ब्लाक में दूसरी मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। मरहूम दरोगा जी के घर के इमामबारगाह में मजलिस हुई। नजफ साहब ने अपने हमनवां के साथ सोजख्वानी पेश की और मजलिस को जाकिरे अहलेबैत सैय्यद मोहम्मद मासूम ने खेताब किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन अ0स0 की शहादत इंसानियत का पैगाम देती है। इस्लाम में किसी भूखे की भूख मिटाने से पहले उसका धर्म को नहीं पूछा जाता। इस्लाम में किसी पर जुल्म करने वाला मुसलमान नहीं हो सकता। इस मोहर्रम के महीने में आज से 1379 साल पहले पैगम्बर हजरत मोहम्मद स0व0 के नवासे को भूखा, प्यासा, बेदर्दी के साथ कर्बला में शहीद कर दिया गया जिसकी याद में हर साल मोहर्रम के महीने में सारी दुनिया के मुसलमान शोक मनाते है और इमाम हुसैन अ0स0 को याद करके आसूं बहाते है। बाद मजलिस शबीहे ताबूत, अलम व जुलजनाह का जुलूस निकाला गया। करंजाखुर्द गांव की अंजुमन शमशीरे हैदरी, अजाए हुसैन कदीम, अजाए हुसैन बबरखां दक्खिनपट्टी ने नौहा मातम करते हुए जुलूस को गांव के ही सदर इमामबाड़ा से होते हुए पूरे गांव में गश्त किया। जुलूस के हमराह फैसल हसन तबरेज, अजादार हुसैन, हसनैन कमर दीपू, रिजवान हैदर राजा, शाहिद मेंहदी, सुल्तान हैदर, असलम जैदी, इमरान जैदी, शिराज जैदी, मो. अली एडवोकेट, वसी हसन, शानू, फैजान, गांधी, शजर मौजूद रहे। जुलूस के आखिर में आजम जैदी ने जुलूस में आये हुए मोमनीन को तबर्रुक देते हुए नम आँखों से विदा किया।
इसी क्रम में पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम की पहली तारीख को बुधवार की देर रात अंगारों पर मातम मुफ्ती मोहल्ले में किया गया। इससे पूर्व मजलिस बरमकान मरहूम नवाब हसन खां पर हुई जिसमें सोजखानी व सलाम शबाब हैदर व उनके हमनवां ने पढ़ा। वहदत जौनपुरी और हैदर अली जौन ने मरसिया पेश किया। मजलिस को डॉ. सै. कमर अब्बास ने खेताब किया। जिसके बाद शबीहे अलम, जुलजनाह, झूला-ए-अली असगर बरामद हुई। उसके हमराह अंजुमनें जुल्फेकारिया मस्जिद तला नौहा-मातम करती हुई इमामबाड़ा शेख अब्दुल मजीद में पहुंची जहां पर सै. जैद सईद ने जाकरी कर कर्बला के शहीदों को याद किया। उसके बाद जुलूस में शामिल मातमी लोग या हुसैन-या हुसैन कहते हुए दहकते हुए अंगारों पर से गुजरे। इस जुलूस का समापन इमामबाड़ा सै. मेंहदी हसन में जाकर हुआ। संचालन हैदर अली जौन किया। जुलूस के संस्थापक शमीम हैदर बेलाल, व्यवस्थापक नादिर अली, परवेज हसन खान, अहमद हसन चंदन, मोहम्मद अकरम जैकी आदि रहे।

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