करोड़ों खर्च के बाद सरकार फेल – नक्सली नेता विजय आर्य ,सात साल बाद जेल से आजाद

>> विजय आर्य पर विभिन्न राज्यों में दर्ज था 14 एफआईआर , 30 लाख रूपये था इनाम घोषित
>> शोषितों का आवाज है हम ,पुलिस क्या कहती हैं ,इससे हमें कोई लेना-देना नहीं – विजय आर्य

रवीश कुमार मणि

पटना ( अ सं ) । सन् 2011 की बात हैं ,एसटीएफ बिहार ने नक्सली संगठन ,माओवादी के चार नेताओं को कटिहार से गिरफ्तार किया था। तत्कालीन आईजी के एस द्विवेदी ने बयान दिया था ,यह बड़ी कामयाबी है, माओवादी का थिंक टैंक समाप्त हो गया । इसमें बिहार के विजय आर्य भी शामिल थे। करोड़ों रूपये ,सरकार का खर्च होने के बाद भी नक्सली नेता विजय आर्य पर लगे अपराध को पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर सकी ।सात वर्षों के लम्बी जेल यात्रा के बाद विजय आर्य बीते गुरुवार को आजाद हो गये । विजय आर्या ने कहां हैं की पुलिस क्या कहती हैं ,इससे हम इतेफाक नहीं रखते ,शोषितों के लिए हम आवाज उठाते रहे है और आज भी उनके पक्षधर रहेंगे ।
पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार गया जिले के कोच थाना अंतर्गत करमा गांव निवासी विजय आर्या, नक्सली संगठन माओवादी का सेंट्रल कमिटी का मेंबर रहें हैं और कद्दावर नेता के रूप में पहचान रहें हैं ।जानने वाले बताते है की कॉलेज लाइफ से ही विजय आर्या, वामपंथी विचारधारा के व्यक्ति रहें हैं और शासन -व्यवस्था के दमन के खिलाफ बोलते रहें हैं । माओवादी के शीर्ष नेता रहते हुये भी विजय आर्या, कभी खून -खराबे पर विश्वास नहीं रखते थे। जनता की ताकत और एकता की संघर्ष को विजय आर्या बड़ा हथियार मानते थे। साधारण कद-काठी एवं मधुर भाषी ,विजय आर्या शुरू से ही सामंती विचारधारा के विरोध आंदोलनरत रहें हैं । विजय आर्या का बुद्धिजीवी समाज में भी बड़ा पैठ रहा हैं । आंध्रप्रदेश ,बिहार और उड़िसा में लगातार सात साल के लम्बे अंतराल तक जेल में रहने के दौरान विजय आर्या ने भारतीय अर्थ -व्यवस्था में गिरावट और समाजिक समरसता के पतन पर कई लेख ,लिख सवाल खड़ा किये हैं ।

वर्ष 2011 में एसटीएफ ने कटिहार से किया था गिरफ्तार

कटिहार के कुर्सेला क्षेत्र में नक्सली संगठन माओवादी के शीर्ष नेताओं का बैठक होने की सूचना पर एसटीएफ ने छापेमारी किया । इस दौरान एक नौजवान एवं तीन वृद्ध को निहत्था गिरफ्तार किया गया । इसमें आंध्रप्रदेश का वाराणसी उर्फ सुब्रमण्यम उर्फ श्रीकांत, पश्चिम बंगाल के पूर्णेन्दू शेखर मुखर्जी ,बिहार के विजय आर्य एवं मुंगेर का अभिमन्यु उर्फ उमेश यादव शामिल थे। गिरफ्तारी के तुरंत बाद चारों को हेलिकॉप्टर से पटना लाया गया । तत्कालीन डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुये बताया की गिरफ्तार किये गये उमेश यादव को छोड़कर तीनों नक्सली संगठन ,माओवादी के सेंट्रल कमिटी के मेंबर हैं । यह थिंक टैंक की गिरफ्तारी ,बिहार पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी हैं । इस गिरफ्तारी के बाद माओवादी संगठन का एक प्रकार से कमर टूट गयी हैं । गिरफ्तार नक्सली नेताओं पर बिहार ,झारखंड ,उड़िसा, आंध्रप्रदेश ,छत्तीसगढ़ ,पश्चिम बंगाल ,पंजाब में नक्सली गतिविधियों का प्राथमिकी दर्ज हैं । इन गिरफ्तार नेताओं को भागलपुर सेंट्रल जेल के तृतीय खंड में हाई सिक्योरिटी में रखा गया था। कोर्ट पेशी के लिए गिरफ्तार नक्सलियों को जब भागलपुर सेंट्रल जेल से कटिहार कोर्ट लाया जाता था तो सुरक्षा के नाम पर सैकड़ों गाड़ियां की भारी-भरकम व्यवस्था होती थीं । आम -जनों के लिए सड़क बंद कर दिया जाता था। विजय आर्य बिहार के भागलपुर, गया ,सासाराम, आंध्रप्रदेश ,एवं उड़िसा के जेल में रहें हैं ।

करोड़ों खर्च ,लेकिन एक में भी सजा नहीं

माओवादी के शीर्ष नेता रहें ,सेंट्रल कमिटी मेंबर विजय आर्य के ऊपर, बिहार के कटिहार, गया, सासाराम, पंजाब ,आंध्रप्रदेश ,उड़िसा में कुल 14 मामले दर्ज थे। सरकार के नजर में विजय आर्य ,इतने बड़े नक्सली नेता थे की उन्हें पेशी में जाने के लिए हेलिकॉप्टर तक की व्यवस्था की गयी थी। कटिहार से गिरफ्तार के बाद हेलिकॉप्टर से पटना लाया गया और भागलपुर जेल शिफ्ट किया गया । आंध्रप्रदेश पेशी में जाने के लिए भागलपुर से पटना हेलिकॉप्टर एवं पटना से फ्लाइट द्वारा कोलकाता और फिर कोलकाता से आंध्रप्रदेश और फिर हेलिकॉप्टर । वही बिहार में जब ,विजय आर्य की कोर्ट में पेशी होती थी तो हाई सिक्योरिटी -व्यवस्था के नाम पर छोटे -बड़े सैकड़ों वाहन । कोर्ट को पेशी के दिन छावनी मे तब्दील कर दिया जाता था।
कई राज्यों की सरकार ने नक्सली माओवादी नेता विजय आर्य की सुरक्षा -व्यवस्था में करोड़ों रूपये खर्च कर दिया लेकिन एक भी मामले में सबूत कोर्ट में पेश नहीं कर सकी और विजय आर्य सात साल जेल में रहने के बाद आजाद हो गये ।

पटना और कोलकाता में ग्रीनहंट के खिलाफ दिया था नारा

पुलिस अभिरक्षा में माओवादी नेता विजय आर्य सहित दो और सेंट्रल कमिटी मेंबर को आंध्रप्रदेश कोर्ट पेशी के लिए बीते वर्ष 2012 में ले जाया जा रहा था। तीनों के हाथ में हथकड़ी लगीं थीं । हथकड़ी लगाने का विजय आर्य ने विरोध किया था और मानवाधिकार का हनन बताया था। इस दौरान पुलिस टीम से बकझक हो गयी । विजय आर्य ने पटना एयरपोर्ट पर सरकार द्वारा चलाए जा रहें ग्रीनहंट के कार्रवाई को विरोध करते हुये नारा लगाया था। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का हक बताया था। इसी तरह तीनों नक्सली नेता विजय आर्य ,सुब्रमण्यम एवं पुर्णेन्दु शेखर ने कोलकाता एयरपोर्ट पर भी सरकार के दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ नारा लगाया था।

शोषण के खिलाफ एवं गरीबों के पक्ष में रहेंगे खड़ा -विजय आर्य

आर्य संस्कृति को मानने वाले विजय आर्य ने सासाराम जेल से छूटने के बाद बीते गुरुवार को अपने गांव करमा पहुंचे । शुक्रवार को उनसे मिलने हजारों की संख्या में लोग उनके घर पहुंचे । इसी में से एक बुजुर्ग ने कहां की माओवादी क्या होता हैं । हमारे नेता पूर्व में भी विजय आर्य थे और आज भी हैं । इन्होंने ही हमें सामंतियों के जुल्मों से मुक्ति दिलाया हैं ।हम सभी इनके साथ खड़े रहेंगे । विजय आर्य ने कहां हैं की पुलिस हमें नक्सली कहता है या समझती है, इससे हमें कोई लेना देना नहीं । सात वर्षों तक जेल में रहा लेकिन पुलिस के पास कोई सबूत नहीं हैं । विजय आर्य (स्वयं ) शोषण के खिलाफ आवाज उठाता रहा हैं और आगे भी समय आया तो उठाएंगे। गरीब भाई हमारे ताकत रहें है, इनके पक्ष में सदा खड़ा रहेंगे ।राजनीति में फिलहाल किसी तरह का रूचि लेने से इंकार किया हैं ।

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