आजीवन सजा काट रहें 34 कैदियों को मुक्त करेंगी सरकार

>> राज्य दंडादेश परिहार पर्षद के बैठक में 14 वर्ष वास्तविक कैद और परिहार सहित 20 वर्ष कैद अनिवार्य
>> 13 कैदियों को पटना हाईकोर्ट ने मुक्त करने का दिया था आदेश
>> अन्य किसी वाद में आजीवन कारावास के बंदी संसीमित रहेंगे तो नहीं होगी रहाई-आईजी

रवीश कुमार मणि

पटना  ( अ सं ) । सूबे के जेलों में आजीवन सजा काट रहें कैदियों के लिए खुशखबरी हैं । बिहार सरकार ने विभिन्न जेलों में बंद 34 कैदियों को मुक्त करने का निर्णय ,राज्य दंडादेश परिहार पर्षद के हुये बैठक में निर्णय लिया हैं । विधि विभाग के सचिव अखिलेश कुमार जैन के दस्तखत से आदेश बीते 10 सितंबर को जारी कर दिया हैं । कारा एवं सुधार सेवाएं के आईजी मिथलेश मिश्रा के अनुसार जो कैदी दूसरे वाद में संसीमित रहेंगे ,उन्हें मुक्त नहीं किया जाएगा ।सभी काराधीक्षक को सही से जांच कर कैदियों को मुक्त करने का निर्देश दिया गया हैं ।
आजीवन सजा काट रहें कैदियों को पूर्व में राज्य दंडादेश परिहार पर्षद (बोर्ड ) के बैठक के बाद प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस ,गणतंत्र दिवस ,गांधी जयंती के अवसर पर मुक्त किया जाता था। इसमें यह नियम होता था की वास्तविक सजा 14 वर्ष एवं परिहार लाभ मिलाकर 20 वर्ष होना चाहिए । राज्य सरकार कैदियों को वार्षिक छुट्टियों का लाभ प्रावधान के अनुसार देती हैं । कुछ वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन सजा प्राप्त कैदियों को मुक्त करने पर रोक लगा दिया था। बाद में समाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में ही चुनौती दिया था। जिसपर पांच सदस्यीय न्याय पीठ ने पूर्व के आदेश को खारिज करते हुये (बलात्कार ,आतंकी हमले ,संगीन अपराध को छोड़कर ) मुक्त करने का निर्णय पारित किया था और राज्य सरकार के दंडादेश परिहार पर्षद को अधिकृत किया था, जिसमें पूर्व की शर्ते हर हाल में लागू करने को कहां हैं ।
बीते 1 अगस्त को राज्य दंडादेश परिहार पर्षद की बैठक हुई थीं । इसमें 34 आजीवन ,सजा काट रहें कैदियों को मुक्त करने का निर्णय लिया गया और विधि विभाग को सूची सौंप दिया गया । विधि विभाग के सचिव अखिलेश कुमार जैन ने बीते 10 सितंबर 2018 को सूबे में बंद 34 कैदियों को मुक्त करने का आदेश दिया हैं । कारा एवं सुधार सेवाएं के आईजी मिथलेश मिश्रा के अनुसार वैसे ही कैदियों को मुक्त किया जाएगा जिनका वास्तविक सजा 14 और परिहार लाभ जोड़कर 20 वर्ष होता हैं । वही उन कैदियों पर विचार नहीं किया जाएगा जो दूसरे मामले में संसीमित हैं । संबंधित काराधीक्षक को निर्देश दिया गया हैं की सारी शर्तें पुरा करने के बाद ही कैदियों को मुक्त करेंगे ।
मुक्त होने वाले कैदियों में असगर अली खान, दिनेश कुमार महतो ,परहंस सिंह ,साधु सिंह ,रामसगुन महतो ,आनंद कुमार स्वर्णकार, दुधेश शर्मा उर्फ दुधेश सिंह ,राज किशोर बिंद, बलिराम बिंद, जनारिदन महतो ,मो असलम, मो हसरत, सुधीर ,रंधीर कुमार ,सतीश कुमार ,परमेश्वर सिंह ,सुखो राय, संजीव कुमार उर्फ गोगा, मो मोईद्दीन, हीरा सिंह ,जगदीश चमार, राजकुमार उर्फ बहारन, रमेश सिंह ,झून्नू पासवान ,सतीश झा, इंद्रजीत सिंह ,गुंजेश्वर यादव ,मो दुलारे उर्फ दुलार, श्वनाथ राय, रामचरण सिंह ,रविन्द्र राम, हीरालाल दास शामिल हैं ।

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