हम हैं हिंदुस्तां की बेटियां” नारों से गुंजायमान हुआ हरदोई का जीआईसी मैदान

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,” का ऐतिहासिक संदेश देने पहुंची 11000 स्कूली बेटियां

यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम के सम्मुख दिखाई बेटियों की महत्ता

जिलाधिकारी पुलकित खरे का बेटियों के प्रति हरदोई में ऐतिहासिक कारनामा

हरदोई।11अक्टूबर।अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शहर के जीआईसी मैदान पर 11000 स्कूली बेटियों के महासंगम ने बता दिया कि “हम हैं हिंदुस्तान की बेटियां” जिसने रानी लक्ष्मी बाई बनकर दुश्मनों के छक्के भी छुड़ाए हैं और और विविध आयामों में सेवा करके देश का नाम भी ऊंचा किया है। यदि हमें झुठलाओगे,अपना अस्तित्व मिटाओगे।अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शहर के जीआईसी मैदान पर करीब 11000 स्कूली छात्राएं जिनमें कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं समेत अन्य विद्यालयों की छात्राएं “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” की मुहिम को धार देने के लिए और यूरेशिया वर्ल्ड टीम गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए सुबह से ही इकट्ठा हो गई। चिलचिलाती धूप में 3 घंटे से बैठी छात्राओं ने उफ तक नहीं किया। विभिन्न प्रकार के स्लोगनो से अपनी उपस्थिति को दर्ज कराती  हुई ,जिसने भी यह नजारा देखा और इस महासंगम का गवाह बना ,वह दांतो तले अंगुलिया ही दबाकर रह गया।विभिन्न प्रकार के स्लोगन, शपथ ,एक दूसरे की पीठ थपथपाना, मानव श्रृंखला बनाकर संदेश देना, कि हम सब विकास की धुरी के पहिए हैं बिना इसके विकास का पहिया नहीं चल सकता है। जिलाधिकारी पुलकित खरे और यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड टीम के अधिकारी डॉ जगदीश पिल्लई इस नजारे को देख कर सराहा। हरदोई के लोगों को आशा है कि बेटियों की इस ताकत और संदेश को वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम जरूर आकलन कर हरदोई की बेटियों को विश्व पटल के मानचित्र पर जरूर ले जाएगी।*जब सेलिब्रिटी बने डीएम पुलकित खरे*”बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के अभियान में जो कि 11000 छात्रों के विभिन्न एक्टिविटी के प्रदर्शन को देखने के बाद यूरेशिया वर्ल्ड कप टीम के अधिकारी डॉ जगदीश पिल्लई और जनप्रिय जिलाधिकारी  पुलकित खरे जब छात्रों की पंक्तियों के बीच में पहुंचे तो छात्राएं अपने को नहीं रोक सकी और स्लोगनो पर हस्ताक्षर कराने के लिए उमड़ पड़ी। जिलाधिकारी ने भी उनकी मुराद को पूरा किया। यही नहीं ,मंच से उतरते हुए गाड़ी पर जाते समय स्कूली छात्रों ने अपने जनपद जिला अधिकारी को घेर लिया। एक सेलिब्रिटी की तरह जिलाधिकारी नजर आए। वहीं अतिरिक्त मजिस्ट्रेट एकता सिंह को देखकर सहसा छात्राओं ने कहा “मैं भी बड़ी होकर आईएएस बनूंगी”।*जब छात्रा ने डीएम से पूछा !मुझे ही क्यों शपथ, लड़कों से क्यों नहीं ?छात्रा द्वारा जिलाधिकारी से पूछे गए सवाल *आखिर लड़कियों को ही यह शपथ क्यों दिलाई जाती है लड़कों को भी दिलाई जानी चाहिए* जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बहुत ही माकूल जवाब दिया कि यह शपथ  आपको दिलानी है।आप अपने भाई को रक्षा बंधन में यह शपथ दिला सकती हैं कि भैया !जैसे मैं आपकी बहन हूं वैसे ही अन्य बहनों की रक्षा करना, बेटियां आगे चलकर परिवार चलाने वाली और भी समझा सकती हैं जो अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने नहीं भेजते हैं यह बेटियां ही समझा सकती हैं कि पढ़ाई कितनी जरूरी है इसलिए समाज में परिवर्तन की पहली कड़ी बेटी के हाथ में  है पढ़ी लिखी या अनपढ़ मां जिस तरीके के संस्कार अपनी बेटियों में पन पायेगी बेटी उसी तरह एक परिष्कृत समाज के निर्माण में महिती की भूमिका निभाएंगी।
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