माधौगंज-दुख में जो प्रभु की कृपा की अनुभूति करता है वही प्रभु का सच्चा भक्त है-आचार्य सन्तोष

 माधौगंज।हरदोई।12अक्टूबर।फूलमती मंदिर में हो रही श्रीमदभागवत कथा में आचार्य श्री संतोष भाईजी ने कथा सुनाते हुए कहा कि भक्ति करने वाले भक्त भगवान की भक्ति के रंग में रंग जाते हैं, मान अपमान सुख दुःख से दूर अपने प्रभु का स्मरण और गुणगान ही उनके जीवन का एक मात्र उद्देश्य रह जाता है।कस्बे के मन्शानाथ फूलमती मन्दिर में आचार्य सन्तोष भाई जी ने कथा सुनाते हुए कहा कि शुकदेव भगवान जैसे सद्गुरु की प्राप्ति हो जाए तो मनुष्य मृत्यु के भी भय से मुक्त हो जाता है।राजा परीक्षित ने संत के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया तो उन्हें भी इस कर्म का फल भुगतना पडा।किंतु साधू का श्राप भी ईश्वर की भक्ति का साधन बन गया सुख एवं दुख तो संसार में रहने वाले लोगों को आते रहते हैं परंतु दुख में भी जो प्रभु की कृपा को अनुभूति करता है वही प्रभु का सच्चा भक्त है।कुंती महरानी ने भगवान श्रीकृष्ण को दुख में स्मरण किया और भगवान की प्राप्ति की ।दुख भगवद प्राप्ति का एक साधन है, दुख में जीव पाप कम करता है।भक्ति का फल  केवल ईश्वर का दर्शन है भक्ति का प्रभाव ऐसा है कि भगवान स्वयं भक्त के लिए दौडे चले आते हैं , विदुर जी ने ऐसी भक्ति की कि द्वारकाधीश भगवान उनके घर पर आए।सुलभा महरानी ने प्रभु को केले के छिलके खिलाए और भगवान की कृपा प्राप्त की भगवान ने विदुर जी का जीवन कृतार्थ कर दिया मन का नियत्रंण सयंम से होता है कपिल भगवान का आख्यान सुनाते हुए आचार्य श्री संतोष भाईजी ने बताया मन चंचल है उसका नियंत्रण अभ्यास एवं वैराग्य से संभव है । स्त्रियों का आभूषण उनकी लज्जा है । स्त्रियो का धर्म पहले अपने परिवार के लिए है।पति के चरणों की सेवा करते करते सती अनुसुइया ने गंगा माँ को अपने घर प्रगट करा दिया।स्त्रियों को अपने पति की बात माननी चाहिए।अपने पति भगवान शिव की बात न मान कर सती को पश्चाताप की अग्नि में जलना पडा गृहस्थ आश्रम में पति पत्नी परस्पर एक दूसरे पर भरोसा करके परिवार को सुख प्रदान कर सकते हैं भक्ति करने की कोई आयु नहीं होती किसी भी उम्र में मनुष्य भगवान की प्राप्ति कर सकता है बालक ध्रुव ने 5 वर्ष की अवस्था में भगवान की प्राप्ति कर ली और उनकी कृपा से राज्य भोग सुख भी प्राप्त किया और अंत में भगवान के धाम को गए मनुष्य जीवन ही ऐसा जीवन है जहां स्वभाव का परिवर्तन संभव है पशु योनि में स्वभाव का परिवर्तन संभव नहीं है राजा भरत ने अंत समय में  हिरण  का चिंतन किया। कथा में मुख्य रूप से रामौतार गुप्ता गिरवर,हीरालाल,सँतराम गुप्ता, अपूर्व महेश्वरी  राम नहोरे  दीपक त्रिवेदी राधेश्याम गुप्ता अमित गुप्ता,आनंद गुप्ता विनय गुप्ता,नवल महेश्वरी,शिवम गुप्ता सत्येंद्र गुप्ता,हिमांशु गुप्ता आदि बहुत से भक्त उपस्थित रहे।
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