बारिश के बाद कपास पर सफेद मक्खी के प्रकोप की आशंका कम : विशेषज्ञ

नई दिल्ली। बीते कुछ दिनों से पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर भारत में हुई बारिश से कपास की फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप की आशंका कम हो गई है। इस सप्ताह पूरे उत्तर भारत में अच्छी बारिश हुई है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मौसम अगर इसी तरह अनुकूल रहा तो इस साल कपास की अच्छी पैदावार हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञ और हरियाणा सरकार के कृषि अधिकारी राम प्रताप सिहाग ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बारिश होने से कपास पर सफेद मक्खी का खतरा कम हो गया है क्योंकि बारिश में पत्ते धुल जाते हैं, जिससे कीट के हमले की आशंका कम हो जाती है।

उन्होंने कहा, “हालांकि कपास में सफेद मक्खी के हमले की जो रिपोर्ट आई थी उससे चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि वह इकॉनोमिक थै्रसहोल्ड लेवल से नीचे है।“

इकॉनोमिक थ्रैसहोल्ड लेवल किसी कीट के हमले की तीव्रता या घनत्व का स्तर होता है, जिसके बाद रोकथाम के उपाय किए जाते हैं। सफेद मक्खी के मामले में कपास के पत्ते पर कीट की संख्या से यह स्तर तय होता है।

सुबह के समय अगर पत्ते पर 10 सफेद मक्खी पायी जाती हैं तो इस स्तर को ईटीएल कहा जाता है, जो रोकथाम के उपाय करने का संकेत देता है।

सिहाग के अनुसार उत्तर भारत में जहां कहीं से सफेद मक्खी के हमले की रिपोर्ट आई है, वहां यह स्तर महज पांच से छह था। मतलब घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

कृषि विशेषज्ञ ने हालांकि किसानों को नीम के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी है। सिहाग ने कहा कि नीम स्प्रे कपास की फसल पर फायदेमंद होगा क्योंकि इससे कीट की वृद्धि पर नियंत्रण होता है।

उन्होंने कहा कि इस समय पेस्टिसाइड का छिड़काव नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि पेस्टिसाइड के छिड़काव से ये कीट अपने ऊपर खतरा भांप कर अपनी लाइफ साइकल बढ़ा देते हैं, जो आगे फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

मतलब मक्खी के प्रजनन की दर बढ़ जाने से उसका प्रकोप तेज हो जाता है। जिसके बाद उसपर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। हालांकि कीट का प्रकोप बढ़ जाने पर फसल को बचाने के लिए पेस्टिसाइड के छिड़काव के अलावा कोई और विकल्प भी नहीं बचता है।

कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि बहरहाल उत्तर भारत में फसल अच्छी स्थिति में है और सितंबर में पिकिंग शुरू हो सकती है। सितंबर के अंत में या अक्टूबर के आरंभ में बाजार में अगैती फसल आने लगेगी।

पंजाब में फसल का रकबा कम लेकिन हरियाणा में पिछले साल के मुकाबले बढ़ा हुआ है और राजस्थान में फसल का रकबा तकरीबन एक लाख हेक्टेयर बढ़ गया है। पंजाब में इस बीते 2.8 लाख हेक्टेयर में इस साल कपास की फसल है जबकि हरियाणा में रकबा 6.65 लाख हेक्टेयर है। वहीं राजस्थान में कपास का रकबा इस साल 4.96 लाख हेक्टेयर है।

पिछले सप्ताह तक देश में कपास का रकबा 109.79 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया जोकि पिछले सीजन के मुकाबले करीब चार फीसदी कम है। पिछले साल महाराष्ट्र और तेलंगाना में कपास की फसल को पिंक बॉलवर्म के प्रकोप से काफी क्षति हुई थी।

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