माता-पिता अकेले एक-दूसरे की पूर्ति नहीं कर सकते : मद्रास हाईकोर्ट

नई दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट ने बच्‍चों के सिंगल पैरेंटिंग को खतरनाक कहा है। एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये बातें कही। कोर्ट ने कहा, ‘सिंगल पैरेंटिंग बढ़ते चलन से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे को माता-पिता दोनों की बराबर जरूरत पड़ती है। माता-पिता अकेले एक-दूसरे की पूर्ति नहीं कर सकते।’

मद्रास हाईकोर्ट के जस्‍ट‍िस एन. क‍रिुबकरन ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। बाल उत्पीड़न पर नियंत्रण के लिए कोर्ट की तरफ से दिए गए निर्देश को पूरा नहीं कर पाने के कारण केंद्र‍ीय महिला व बाल विकास मंत्रालय के सचिव के खिलाफ ये याचिका दायर हुई थी। हाईकोर्ट ने कहा, ‘माता-पिता में से किसी एक के प्‍यार की कमी से बच्‍चे के व्‍यवहार में बदलाव आ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे बच्‍चा समाज के खिलाफ भी जा सकता है।’

जस्‍ट‍िस एन. क‍रिुबकरन ने कहा, ‘परिवार की अवधारणा संयुक्त से एकल होते हुए अब सिंगल पैरेंटिंग पर सिमट गई है। सिंगल पैरेंटिंग से हम बच्चों को कैसा माहौल दे रहे हैं? समाज में जो कुछ हो रहा है, ऐसी स्थिति में क्या उससे सिंगल पैरेंटिंग वाले बच्चे पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा?’ कोर्ट ने यह भी महसूस किया कि अब केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय को दो हिस्सों में बांट देना चाहिए।

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