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साइबर अटैक का बढ़ता खतरा

साइबर अटैक का बढ़ता खतरा

 

दुनिया की सबसे ताकतवर समझी जाने वाली अमेरिकी सरकार की कई एजेंसियां बीते साल के आखिरी महीने में साइबर अटैक का शिकार हुईं। ये हमला अमेरिका पर अब तक का सबसे बड़ा साइबर अटैक बताया जा रहा है। फायर आई नाम की एक साइबर-सिक्योरिटी फर्म ने अमेरिकी सरकार की एजेंसियों की हैङ्क्षकग का पता लगाया था। फायर आई का कहना है कि करीब 18,000 संगठनों के नेटवर्क में मैलीशियस कोड है लेकिन सिर्फ 50 में ही जानकारी लीक हुई है। तेजी से विकसित होते हमारे राष्ट्र पर भी साइबर अटैक के हमलों की आंशका बढ़ गई है। बीते साल 12 अक्तूबर को देश की आॢथक राजधानी मुंबई के एक हिस्से की बिजली किसी मानवीय गलती से गुल नहीं हुई थी, बल्कि साइबर सिस्टम के जरिए बिजली उत्पादन और प्रसारण के ग्रिड को एकदम $फेल करने की साजिश थी।
अमरीकी रपट में भी यही आशंका जताई गई है कि वह साजिशाना हरकत चीनी हैकर्स ने की थी। बेशक रपट का आधार ठोस साक्ष्यों पर नहीं है, लेकिन ऐसे आकलन और आशंकाओं के साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए जाते। बल्कि भारत का पॉवर ग्रिड $फेल करने के खतरे मंडरा रहे हैं, ऐसा साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है। केंद्रीय ऊ$र्जा मंत्री आर.के.भसह चीनी हैकर्स के साइबर अतिक्रमण और हमले को, अधिकृत तौर पर, स्वीकार करें अथवा न करें, लेकिन अमरीकी संस्था की रपट को हम यूं ही नकार नहीं सकते। अमरीका हमारा रणनीतिक साझेदार है और उसने अपनी भूमिका निभाते हुए हमें आगाह किया है। चीन के सरकारी या सरकार-समॢथत हैकर्स हम पर साइबर हमले करते आए हैं, साजिशें रचते रहे हैं। यानी व्यवस्था को ठप कर देने की खतरे हम पर मंडरा रहे हैं।
भारत के अलावा अमरीका, जापान, ब्रिटेन, ऑस्टे्रलिया और स्पेन सरीखे देशों को भी चीनी हैकर्स निशाना बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। हमारे देश में प्रधानमंत्री दफ्तर, गृह और विदेश मंत्रालयों की वेबसाइट्स को निशाना बनाया जा चुका है। डीआरडीओ, पॉवर ग्रिड, एनआईसी और सर्बर पर हमले किए जा चुके हैं। ओएनजीसी, रेलवे निगम, सरकारी बैंकों, सरकारी डाटा सेंटर और निजी कंपनियों को भी निशाना बनाया जा चुका है। उसके बावजूद हमारे पास न तो साइबर कानून की ठोस व्यवस्था है और न ही कारगर, आक्रामक रणनीति है। साइबर का महत्त्वपूर्ण ढांचा सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के पास है। मामला सिर्फ  मुंबई की बत्ती गुल होने का नहीं है। रक्षा, चिकित्सा, ऊ$र्जा, परिवहन, अनुसंधान, बैंङ्क्षकग, दूरसंचार, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के साथ कई अन्य क्षेत्र ऐसे हैं जिन पर साइबर हमलों की काली छाया मंडरा रही है। 12 जुलाई, 2012 को हैकरों ने नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के मुख्य ईमेल सर्वर में सेंध लगाई थी। जांच से पता चला कि लगभग 12,000 ईमेल खाते हैक हुए हैं। जिसमें विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस समेत लगभग कई उच्च स्तर के अधिकारी व महत्वपूर्ण व्यक्ति शामिल थे। हैकरों का सारा ध्यान सीक्रेट्स पर था। उन्होंने टुकडियों की तैनाती के स्थानों और आइटीबीपी (कमांडरों) और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच संवाद जैसी गुप्त सूचनाएं चुराईं गई थी।
कोरोना वायरस महामारी की वजह से फार्मा कंपनियों का बिजनेस बढ़ा है। दुनिया कोरोना वैक्सीन के लिए फार्मा कंपनियों पर ही निर्भर है। इस समय सरकारें भी इन कंपनियों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। पिछले दिनों ही साइबर हमलों के साये सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटैक सरीखी कंपनियों पर मंडराने की सूचनाएं साझा की गई हैं। ये दोनों कंपनियां ही कोरोना टीके का उत्पादन कर रही हैं। साफ है कि चीन भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान को ठप करना चाहता है। इन कंपनियों के आईटी सिस्टम में सेंध लगाकर टीकों का फॉर्मूला चुराने के मंसूबे भी होंगे! यकीनन यह बिल्कुल भी आसान नहीं है। हालांकि भारत सरकार ने इन दोनों कंपनियों पर साइबर हमले की संभावनाओं को खारिज किया है। आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि बाबा रामदेव की ‘पतंजलि योगपीठÓ और दिल्ली का ‘एम्सÓ अस्पताल भी निशाने पर बताए जा रहे हैं। कल्पना कीजिए अगर साइबर हमला करना या आईटी सिस्टम में अतिक्रमण कर गड़बड़ी पैदा करना, किसी भी स्तर पर, संभव होता है, तो महामारी के खिलाफ  हमारी लड़ाई अधबीच में ही लटक सकती है। क्विक हील टेक्नोलॉजीस का एंटरप्राइज सिक्योरिटी सॉल्यूशन ब्रांड सिकराइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में भारत में हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में टार्गेटेड रैनसमवेयर अटैक बढ़ जाएंगे। सिकराइट की ‘थ्रेट प्रेडिक्शन 2021Ó रिपोर्ट का कहना है कि कुछ रैनसमवेयर ग्रुप्स मरीजों की निजी और संवेदनशील जानकारी पर निशाना साध सकते हैं।
देश की आॢथक राजधानी मुंबई में अचानक बत्ती गुल हो जाने से एक चीत्कार के साथ रेलगाड़ी रुक गई होगी, आॢथक बाजार में अंधेरा छा जाने से गतिविधियां एकदम रुक गई होंगी और अस्पतालों में हाथ-पांव मार कर जेनरेटर की व्यवस्था करनी पड़ी होगी! साफ  है कि बिजली के ढांचे को, साइबर तौर पर तोडऩे-काटने से, कितना बड़ा और गंभीर आॢथक नुकसान हो सकता है! ग्लोबल साइबर इकनॉमी पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट साइबरसिक्योरिटी वेंचर्स ने अनुमान लगाया है कि 2021 तक साइबरक्राइम से दुनिया में सालाना 6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान होगा। 2015 में ये लागत 3 ट्रिलियन डॉलर थी। कंपनी का कहना है कि ग्लोबल साइबरक्राइम से नुकसान अगले पांच सालों तक सालाना 15 फीसदी से बढ़ जाएगा। 2025 तक ये 10.5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच सकता है। साइबरसिक्योरिटी फर्म केस्पर्सकी के मुताबिक, भारत की डिजिटल इकनॉमी बढऩे के साथ ही 2021 में साइबर फ्रॉड के मामले भी बढ़ सकते हैं। भारत में 70 फीसदी एटीएम आउटडेटेड साफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं।
सिाइबर सिक्योरिटी के जानकार मानते हैं कि भारत पर होने वाले अधिकंाश साइबर अटैक चीन स्थित ग्रुप्स की ओर से होते हैं.। चीन बड़ी संख्या में हैकर्स की टीम रखता है। अन्य देशों में भी दूसरे देशों की जानकारी रखने के लिए हैकर्स को रखा जाता है। चूंकि इस समय भारत और चीन के बीच तनाव चल रहा है और इसके चलते चीन के हैकर्स बार-बार भारतीय वेबसाइट पर सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। चीन एलएसी पर तो भारत के सैनिकों को पराजित नहीं कर सका, लेकिन अब इस नई मोर्चेबंदी पर साजिशें रच रहा है। साइबर हमलों की संभावनाओं के मद्देनजर भारतीय सेनाओं में भी मंथन जारी रहा है और शीघ्र ही साइबर कमान की स्थापना का ऐलान किया जाएगा, यह रक्षा विशेषज्ञों का कहना है।
अहम सवाल यह भी है कि क्या भारत अपने अहम बुनियादी ढांचे, जैसे परिवहन और संचार नेटवर्क, तेल रिफाइनरियों और परमाणु ऊ$र्जा संयंत्रों पर साइबर अटैक्स को रोक सकता है? क्या सरकार इस खतरे को गंभीरता से देख भी रही है? बहरहाल साइबर खतरों के मद्देनजर हमारी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खासकर अस्पतालों और टीका कंपनियों में कई परतों की साइबर सुरक्षा निश्चित की गई है, जिन्हें भेदना असंभव-सा है। सरकार के स्तर पर क्या किया जा रहा है और कैसी रणनीति बनाई जा रही है, फिलहाल कुछ भी सामने नहीं है। अलबत्ता ‘सतर्कताÓ की बात कही जा रही है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को ही नहीं, बल्कि इंटरनेट का उपयोग कर रहे हर यूजर को जागरूक हो जाना चाहिए। चूंकि भारत के अलावा अन्य देश भी आईटी के संसाधन लगातार बढ़ा रहे हैं। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी पर सभी को ज्यादा ध्यान देना होगा।

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