Main

Today's Paper

Today's Paper

अर्हकारी सेवा अध्यादेश-2020 लागू, जानें कर्मचारियों को क्या होगा फायदा

अर्हकारी सेवा अध्यादेश-2020 लागू, जानें कर्मचारियों को क्या होगा फायदा

लखनऊ :राज्य कर्मचारियों के पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा को परिभाषित करने वाला “उत्तर प्रदेश पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा एवं विधिमान्यकरण अध्यादेश-2020” को सोमवार को प्रभावी कर दिया गया। इस अध्यादेश के उपबंध एक अप्रैल 1961 से प्रभावी किए गए हैं। अध्यादेश के मुताबिक नियमित किए जाने की तिथि से ही कर्मचारी के पेंशन सेवा की गणना की जाएगी। अपर मुख्य सचिव वित्त एस. राधा चौहान ने अध्यादेश लागू किए जाने से संबंधित शासनादेश मंगलवार को जारी किया। शासनादेश सभी विभागाध्यक्षों को संबोधित है। शासनादेश में लिखा है कि विभिन्न कारणों से पिछले वर्षों में तदर्थ, कार्य प्रभारित एवं सीजनल आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है। ऐसे कार्मिकों को राज्य सरकार द्वारा विधिवत विनियमित कर दिए जाने की तिथि से उनकी नियमित सेवा प्रारंभ होती है। इस प्रकार अर्हकारी सेवा का आगणन विनियमितिकरण की तिथि से करते हुए सेवानिवृत्ति लाभ अनुमन्य किए जाते हैं।

कुछ समय से ऐसे कर्मचारियों द्वारा इस आशय के वाद दाखिल किए जा रहे हैं कि विनियिमितिकरण के पूर्व की उनकी तदर्थ, कार्य प्रभारित, सीजनल सेवाओं को जोड़ते हुए सेवानिवृत्ति के लाभ अनुमन्य किए जाएं। ऐसे सभी प्रकार के वादों में राज्य सरकार की तरफ से दाखिल किए जाने वाले प्रति शपथपत्रों में इस अध्यादेश की व्यवस्था न्यायालयों में स्पष्ट रूप से रखा जाए। विभागाध्यक्षों से कहा गया है कि इस प्रकार के सभी मामलों में उत्तर प्रदेश पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा एवं विधिमान्यकरण अध्यादेश-2020 को राज्य सरकार की तरफ से प्रतिवाद करने का प्रमुख आधार बनाया जाए।

जिन वादों में प्रति शपथपत्र बिना अध्यादेश के उल्लेख के दाखिल किए जा चुके हैं उनमें पूरक प्रति शपथपत्र दाखिल किया जाए। जिन वादों में राज्य सरकार के नियमों के प्रतिकूल आदेश न्यायालयों ने पारित किए हैं, उन वादों में पुनर्विचार याचिका, विशेष अपील, विशेष अनुज्ञा याचना, क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल किया जाए।

 

Share this story