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अच्छा रिजल्ट लाने के लिए शिक्षकों ने किया ये काम

अच्छा रिजल्ट लाने के लिए शिक्षकों ने किया ये काम

प्रयागराज। कोरोना के चलते महीनों स्कूल बंद रहने के कारण अधिकतर स्कूलों में आंतरिक मूल्यांकन नहीं हो सका। इसके बावजूद शिक्षकों ने 30 नंबर के प्रोजेक्ट व सृजनात्मक कार्य में अधिकतर बच्चों को 25 से अधिक अंक दिए हैं। बोर्ड ने पिछले स्कूलों को हाईस्कूल आंतरिक मूल्यांकन के नंबर वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा था। इस समय अपलोड करने का काम चल रहा है।

जानकारों की मानें तो अधिकांश स्कूलों ने 30 में से 25 से अधिक अंक दिए हैं। स्कूल वालों ने ऐसा इसलिए किया है ताकि कोरोना काल में पढ़ाई बाधित होने के कारण यदि लिखित परीक्षा में कम नंबर मिलें तो आंतरिक मूल्यांकन के अंक से रिजल्ट सुधर जाए। बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2011-12 में कक्षा 9 व 10 के सभी विषयों में प्रायोगिक (प्रोजेक्ट व सृजनात्मक कार्य) और आंतरिक मूल्यांकन पद्धति लागू की थी। इसके तहत 10वीं के सभी विषयों में 70 अंकों की लिखित परीक्षा और शेष 30 अंक प्रायोगिक एवं आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित किए गए। भाषा विषयों हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि में 30 अंक का आंतरिक मूल्यांकन तीन मासिक परीक्षाओं के जरिए किया जाता है। यह परीक्षाएं हर दो महीने पर कराई जाती है।  इसमें छात्रों का आंतरिक मूल्यांकन उनकी लेखन शैली, वाचन शैली और व्याकरण शैली के आधार पर अनसीन पैसेज, वाद-विवाद प्रतियोगिता, पत्र लेखन, निबंध लेखन और कहानी लेखन के जरिए करते हैं। अन्य विषयों जैसे गणित व गृह विज्ञान में 15 अंक प्रयोगात्मक और 15 अंक प्रोजेक्ट कार्य के मिलते है।

स्वास्तिक बोस (प्रधानाचार्य एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज) ने कहा, बोर्ड ने हाईस्कूल में 30 अंकों की आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था छात्रों के समग्र विकास के लिए लागू की थी। इस बार कोरोना के कारण थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन अक्तूबर में बड़े बच्चों के लिए स्कूल खुलने पर हमने आंतरिक मूल्यांकन करवाया है।

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