आध्यात्मिक प्रवचन एवं संत सम्मेलन का शुभारंभ

आध्यात्मिक प्रवचन एवं संत सम्मेलन का शुभारंभ

मल्लावां हरदोई।आध्यात्मिक प्रवचन एवं संत सम्मेलन का शुभारंभ देव आवाहन एवं पूजन अर्चन के साथ किया गया। जिसमे कई संत एवं विद्वानों ने अपनी वाणी से ज्ञान गंगा बहाते हुए श्रोताओं को भाव विभोर किया।शांति सत्संग मंच श्यामपुर के 46 वें वर्ष के आध्यात्मिक सत्संग एवं संत सम्मेलन का शुभारंभ मंच के संरक्षक सुरेश चंद गुप्ता द्वारा विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन व देव आवाहन के साथ आचार्य पंडित अशोक शास्त्री ने कराया। प्रवचन का शुभारंभ करते हुए श्री शास्त्री ने कहा कि ‘बड़े भाग मानुष तन पावा सुर दुर्लभ सद ग्रंथन गावा, मनुष्य तन बड़े ही भाग्य से मिला है इसके लिए देवी देवता तक लालायित रहते हैं क्योंकि मानव योनि में आने के बाद मनुष्य हर प्रकार से भक्ति करते हुए मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। चित्रकूट धाम से पधारे श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी राम स्वरूपाचार्य जी महाराज ने भक्ति और ज्ञान की चर्चा करते हुए बताया कि वेद शास्त्र एवं सत्संग के माध्यम से ज्ञान को अर्जित कर भक्ति रस में सराबोर होते हुए श्रेष्ठ कर्म कर मनुष्य इस भवसागर को बड़ी ही सहजता से पार कर सकता है। उन्होंने बताया कि ग्रंथों से ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद अभिमान बिल्कुल नहीं करना चाहिए बल्कि उस ज्ञान को देश व समाज के हित में लगाना चाहिए तभी मानव जीवन सार्थक हो सकेगा।मध्य प्रदेश दमोह से पधारे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी आत्मानंद सरस्वती जी महाराज ने कार्यक्रम के आयोजक गुप्ता परिवार की सराहना करते हुए कहा कि सद्ज्ञान का प्रचार प्रसार करते हुए संतों की वाणी के माध्यम से लोगों को श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना सबसे पुनीत कार्य है। इसी प्रकार समाज के समर्थ लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों एवं आयोजनों के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए। ताकि ज्ञान का आलोक जन-जन तक फैल सके। साध्वी शिरोमणि जी मानस मणि ने भी अपने प्रवचन में लोगों को श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की बात कही।

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