Saturday, November 27, 2021 at 4:56 AM

तेग बहादुर के बलिदान दिवस पर नगर व उतरौला के गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रम का आयोजन

बलरामपुर । भजन-कीर्तन के साथ गुरुग्रंथ साहिब में संकलित उनके 115 भजनों का पाठ भी किया गया। निजी स्कूलों में भी शहीदी दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। नगर के वात्सल्य पब्लिक स्कूल के छात्र एवं छात्राओं ने गुरुद्वारा का भ्रमण कर मत्था टेका। गुरुद्वारा प्रबंध समिति के सदस्य सरदार गजराज सिंह शेरा ने बच्चों को बताया कि गुरु तेग बहादुर ने किस तरह धर्म की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र प्रेम के लिए किया।

विद्यालय समन्वयक सत्यम शुक्ल ने गजराज सिंह शेरा को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। प्रधानाचार्य डा. आशुतोष शुक्ला ने गुरु के महत्व एवं गुरु तेग बहादुर के बलिदान पर प्रकाश डाला। विद्यालय समन्वयक दिव्या गिरि, आकांक्षा चौहान मौजूद रहीं। पायनियर पब्लिक स्कूल एंड कालेज में गुरू तेग बहादुर शहीदी दिवस मनाया गया। प्रबंध निदेशक डा. एमपी तिवारी नें गुरू तेग बहादुर सिंह के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित किया। कला प्रतियोगिता में प्राइमरी ग्रुप के शंशाक सिंह व सीनियर ग्रुप में रूद्राक्ष शुक्ल प्रथम रहे। भाषण प्रतियोगिता में प्राइमरी ग्रुप की गौरी शुक्ला व सीनियर ग्रुप में आयुषी श्रीवास्तव ने बाजी मारी। निबंध प्रतियोगिता में सीनियर ग्रुप की मंदिरा शुक्ला अव्वल रहीं। विद्यालय के सह निदेशक आकाश तिवारी व कोषाध्यक्ष मीता तिवारी मौजूद रहीं। उधर उतरौला स्थित गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम में सेवादार बलवान सिंह ने कहाकि आज के ही दिन 1675 ईसवी में इस्लाम धर्म स्वीकार न करने के कारण दिल्ली में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर उनका सिर कटवा दिया गया था। गुरु जी के एक भाई मतिदास को आरे से चिरवा दिया गया था। दूसरे भाई दयाल दास को खौलते पानी में उबलवाया गया। तीसरे भाई सतिदास को कपास में लपेट कर जिदा जलवा दिया गया, लेकिन गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया। धर्मांतरण का विरोध करने के चलते ही उन्हें हिद की चादर यानी भारत की ढाल की उपाधि मिली थी