Wednesday, December 8, 2021 at 4:10 PM

नगर पालिका का रिश्वत लेने का एक और मामला आया सामने

प्रदीप सक्सेना
पीलीभीत तरूणमित्र। वैसे तो नगर पालिका हर समय ही विवादों में घिरी रहती है लेकिन एक मामला तो लगातार रिश्वत लेने का सामने आया है। जिसमें नगर पालिका का कर्मचारी शंकर राही खुलेआम पीडित से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रिश्वत मांग रहा है। पीडित ने बात करने पर बताया कि कर्मचारी शंकर राही ने कहा कि अगर रिश्वत नही दोगो तो और लोगों की तरह ही सालों भटकते रहोगो लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र नही बनवा सकोगो। इसीलिए पीडित ने मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दो सौ रूप्ये रिश्वत के लिए दिऐ तब जाकर प्रमाण पत्र बनवानों को नगरपालिका कर्मचारी तैयार हुआ है। सोशल मीडिया पर रिश्वत का बीडियो वायरल होने के बाद भी कर्मचारी को किसी प्रकार का भय नही है क्यों कि उसका मानना है कि ऐसे तो वीडियो वायरल होती ही रहती है। इस बारे में कई अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी जिम्मेदार अधिकारी से बात नही हो सकी है।ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें कि एक व्यक्ति के पिता के गायब होने पर उसने कोतवाली पीलीभीत में गुमशुदगी भी दर्ज करा दी और अभी तक न तो उसके शव का ही पता चला और न ही उसके शव का पोस्टमार्टम हुआ और न ही अंतिम संस्कार इसके बाद भी नगर पालिका द्धारा उनके पिता का मृत्य प्रमाण पत्र बनवा दिया गया जो कि उनके संज्ञान में नही था जब उनके संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होने अधिकारियों से बात भी की लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी बात का संतोष जनक उत्तर नही दे सका मामले के मुमाबिक नगर के मोहल्ला बागगुलशेर खां निवासी भगवत सरन की पत्नी पंकज गंगबार ने थाना कोतवाली और एसपी को दी तहरीर मंे बताया कि उसके ससुर 8 नबम्बर 2003 को यह कहकर की वह हरिद्धार जा रहे है। गये थे वही से वह गायब हो गये जिसकी एफआईआर थाना कोतवाली पीलीभीत में उनकी सास के द्धारा दर्ज कराई गई जिनका आज तक कोई भी पता नही चला। पंकज गंगबार के पति का 2006 में एक्सीडेंट हो जाने के कारण वह चलने फिरने में असमर्थ हो जाने के कारण बिस्तर पर ही पडे है और अब तो दो साल से उनको लकवा हो जाने के कारण पूरी तरह से बदहवाल स्थिति में पहंुच गये है। बात करने पर पत्रकारों को पंकज गंगबार ने बताया कि उनके पति के बीमार होने के बाद उनके घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नही है जिसकों लेकर उन्होने बताया कि उनके पति तीन भाई है और उनके ससुर कुंवरसेन गंगवार ने 2003 में अपने मकान की बसीहत तीनों भाइयों के नाम की थी जिसमें उन्होने अपने मकान के तीन हिस्से कर दिये थे और जीते जी उनका और उनके बाद वह मकान तीनांे भाइयों में बंटना था लेकिन उनके खो जाने के बाद उनको ढूढने का भरपूर प्रयास किया गया लेकिन वह कही नही मिले लेकिन जब वह अपने मकान की मरम्मत कराने के लिए मकान को तुडवा रही थी तभी अचानक से एक व्यक्ति पन्द्रह बीस लोगों को लेकर आ गया और सीढी से चढकर पंकज गंगबार और उनकी बहू से अभद्रता करने लगा जिसका विरोध किया तो वह आग बबूला होकर गालियां देते हुए मकान को तोडने फोडने लगा और कहने लगा कि उनके एक देवर का हिस्सा तो उसने खरीद रखा है। और उसने उनके ससुर का मृत्यु प्रमाण प्रमाण पत्र भी दिखाया जो कि नगर पालिका द्धारा जून 2004 का बना हुआ था। जिसको पूछा गया तो दबंग ने वह प्रमाण पत्र उसके द्धारा बना हुआ बताया। जब पंकज गंगबार ने पूछा कि उनका दाह संस्कार तो हुआ नही और न ही उनकी मृत्यु की कोई सूचना ही मिली तो उनका मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हो गया तो दबंग अपनी दबंगई दिखाते हुए महिलाआंे से उलझ गया और इसी हुडदंग में पंकज गंगबार की बहू की सोने की चेन भी खींच ली गई। जिस पर जानकारी देते हुए पंकज गंगबार ने बताया कि जिस हिस्से को दबंग खरीदा हुया बता रहा है उस हिस्से पर काबिज उनका देवर उमेश गंगबार एक शराबी किस्म का व्यक्ति था जिसको एक दबंग ने सौ पचास रूपये शराब पीने के लिए देकर और शराब के नशे मे ही अपने नाम बसीहत करा ली उसके बाद उसने वह हिस्सा किसी दूसरे दबंग को बेच दिया। पूरे मामले की जानकारी जब थाना पुलिस को दी तो पुलिस फौरन ही मौके पर पहंुची और पुलिस को देखकर दबंग अपने साथियों के साथ मौके से फरार हो गया लेकिन पुलिस ने दबंग और उसके कुछ साथियों को पकड लिया। पंकज गंगबार ने बताया कि जब वह तहरीर लेकर थाना कोतवाली पहंुची तो थाना पुलिस ने आरोपी दबंगों को छोड दिया था। उसके बाद एसपी को भी प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है। प्रार्थिनी पंकज गंगबार ने बताया कि उनके पति भगवत सरन पूरी तरह से अपाहिज और बिस्तर पर है उनका बेटा बाहर रहता है। वह और उनकी बहू ही घर पर रहती है। अब उनकी जान माल का खतरा बना हुआ है। जिसको लेकर पुलिस प्रशासन अभी तक अंजान बना हुआ है कभी भी कोई बडी दुर्घटना हो सकती है। दबंग से अपनी जान माल की सुरक्षा के लिए उन्होने मुख्यमंत्री की शरण में जाने का मन बनाया है। मामला नगरपालिका के मृत्यु प्रमाण पत्र बनने से शुरू हुआ क्यों कि अगर नगर पालिका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नही करता तो शायद यह मामला इतना तूल नही पकडता लेकिन नगर पालिका के कर्मचारी थोडी सी रिश्वत की खातिर कोई भी गलत काम करने से नही डरते।