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ईओयू की जांच रिपोर्ट दरकिनार कर कोर्ट ने लिया संज्ञान ,अभयानंद जीते ,आनंद की हुई हार !

रवीश कुमार मणि

पटना ( अ सं ) । बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद से जुड़े एक मामले में आर्थिक अपराध इकाई को मुंह की खाने पर गयी हैं । कोर्ट ने ईओयू के जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर एफआईआर में लगे आरोप को सही मानते हुये सभी धाराओं में संज्ञान लिया हैं और आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाने का आदेश दिया हैं । इधर ईओयू के जांच रिपोर्ट को लेकर सोमवार को सुपर 30 के आनंद कुमार ,वरीय पुलिस अधिकारियों से मिलकर दोषी पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर लिखित आवेदन दिया हैं । मालूम हो की इस मामले में गिरफ्तार किया गया आदित्य सिंह के स्वीकृति बयान और साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने जीतेन्द्र सिंह के खिलाफ वारंट निर्गत किया था।इसके बाद पुलिस ने जीतेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। प्रथम दृष्टा में कोर्ट ने पूर्व डीजीपी अभयानंद से जिडे मामले को सही पाया हैं ।इस तरह ईओयू का जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गया हैं । इधर पूर्व डीजीपी अभयानंद और सुपर 30 के संचालक आनंद कुमार के बीच नाक की लड़ाई में बिहार पुलिस की छवि ही धूमिल होने के कगार पर आ गयी हैं ।
फेसबुक पर विवादित पोस्ट कर अभयानंद के चरित्र का हनन किया गया था। इसको लेकर कोतवाली थाने में सुजीत कुमार नामक व्यक्ति ने कांड संख्या 83 /18 ,धारा -419 ,420 ,467,468,471 ,120 (बी) 66 (बी) (सी) (डी) आईटी एक्ट के तहत दर्ज कराया था।पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद आदित्य सिंह को गिरफ्तार किया ।फिर इसके स्वीकृति बयान और साक्ष्य पर जीतेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया गया । ठोस सबूत को मानते हुये शुरूआती दौर में सीजेएम ने दोनों का नियमित जमानत खारिज कर दिया ।जीतेन्द्र सिंह के गिरफ्तारी को लेकर कोतवाली थाने में सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने हंगामा कर मामला को खुद हाई लाइट कर दिया और एक पक्ष बनकर सामने आ गये ।पुलिस मुख्यालय के आदेश पर मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई को जांच सौंपा गया । ईओयू के पुलिस अधीक्षक ने जांच में पूर्व डीजीपी अभयानंद से जुड़े एफआईआर को फर्जी करार कर दिया । एफआईआरकर्ता सुजीत कुमार ने पुलिस कार्रवाई की गलत मंशा को लेकर पूर्व में कोर्ट में विरोध -पत्र दाखिल कर रखा था। सीजेएम ने विरोध -पत्र पर सुनवाई करते हुये एफआईआर में लगे आरोप और सभी धाराओं को सही मानते हुये संज्ञान ले लिया । यहीं नहीं सीजेएम कोर्ट ने ट्रायल चलाने का आदेश देते हुये दूसरे कोर्ट में केस को ट्रांसफर कर दिया हैं । इस तरह प्रथमदृष्टा में पूर्व डीजीपी अभयानंद को जीत हुई हैं और सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार को मुंह की खानी पड़ गया हैं ।हालाँकि दोनों लोग सीधे तौर पर अपने को इस मामले से अलग बताते हैं ।

पूर्व डीजीपी अभयानंद से जुड़े विषय पर बन रहा था डाक्यूमेंट्री फिल्म

सुजीत कुमार नामक व्यक्ति पूर्व डीजीपी अभयानंद के जीवन पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म बना रहें थे। इसी में किसी ने फेक फेसबुक अकाउंट के जरिए एक पेपर का कटिंग फेसबुक पर पोस्ट किया । जो अभयानंद से जुड़ा था। जिससे अभयानंद का चरित्र हनन हुआ एवं साइबर एक्ट का उल्लंघन था। इसको लेकर सुजीत कुमार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली थाने में कांड संख्या 83 /18 दर्ज कराया था।

जक्कनपुर से आरोपी आदित्य सिंह हुआ गिरफ्तार

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुटी तो उक्त फेक फेसबुक पर एक मोटरसाइकिल मिला ।जिसके नंबर के आधार पर पुलिस जांच आगे बढ़ी । पुलिस ने जक्कनपुर में छापेमारी करते हुये आदित्य सिंह नामक युवक को गिरफ्तार किया । गिरफ्तार आदित्य सिंह नशे में धुत था। पुलिस ने उक्त मोबाइल बरामद किया ,जांच और पूछताछ शुरू किया तो गिरफ्तार आदित्य सिंह ने जीतेन्द्र नामक व्यक्ति का नाम लिया । वहीं मोबाइल के जांच में आदित्य सिंह और जीतेन्द्र का ऑटो भवाइस रिकॉर्डिंग और एसएमएस ने सबकुछ स्पष्ट कर दिया की इस मामले में आदित्य और जीतेन्द्र दोनों शामिल हैं । पुलिस ने आदित्य के मोबाइल पर एक पिस्टल का तस्वीर देखा ।सख्ती से पूछताछ हुआ तो पिस्टल के बारे में बताया ,आदित्य सिंह के निशानदेही पर पुलिस ने छापेमारी करते हुये उक्त पिस्टल बरामद कर लिया ।कोतवाली थानाध्यक्ष के बयान पर जक्कनपुर थाने में आदित्य सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया ।

जीतेन्द्र को कोतवाली पुलिस ने किया गिरफ्तार ,फिर सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने किया हंगामा

आदित्य सिंह के बरामद मोबाइल में जीतेन्द्र और आदित्य के बीच बातचीत का वाइस रिकॉर्डिंग और एसएमएस का ठोस साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने बैंककर्मी जीतेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया । जीतेन्द्र के गिरफ्तारी की सूचना मिलते हीं सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार कोतवाली थाना पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया ।आनंद कुमार का कहना था की पुलिस झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार किया हैं ।जबकि पुलिस ने जीतेन्द्र के रिकॉर्डिंग कॉल और एसएमएस पर मांगे नंबर ,ठोस सबूत था। तभी तो कोर्ट ने शुरूआती दौर में दोनों आरोपियों का नियमित जमानत खारिज किया था।

आर्थिक अपराध इकाई को मिली जांच का जिम्मा

कोतवाली थाने में सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार के हंगामे के बाद कई मामले ऐसे उजागर हुये की सुपर 30 और आनंद कुमार का कार्यशैली कठघरे में खड़ा हो गया । देश-दुनिया में छवि खराब हुआ ।सुपर 30 और आनंद कुमार के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका तक दाखिल हो चुका हैं । सरकार ने उक्त मामले की जांच कर कार्रवाई की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध इकाई को सौंप दिया । आर्थिक अपराध इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक जी एस गैंगवार के आदेश पर ईओयू के पुलिस अधीक्षक ने मामले का जांच किया और एफआईआर को फर्जी करार कर दिया हैं ।इस आधार पर दोनों आरोपियों को कोर्ट ने नियमित जमानत दे दिया हैं ।

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