हरदोई

माधौगंज- सत्य मार्ग मनोबल को ऊंचा उठाने में सक्षम- आचार्य संतोष भाई

माधौगंज/हरदोई13अक्टूबर।बाबा मनसा नाथ फूलमती माता मंदिर परिसर में परम श्रद्धेय आचार्य संतोष भाई जी ने तीसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा वर्णन किया। श्री भाई जी ने  कहा कि  मनुष्यों की वृत्तियां भगवान की ओर होना चाहिए। धार्मिक काम करने से व्यक्ति का स्वभाव मृदुल हो जाता है। सत्य के मार्ग पर चलने में कठिनाई जरूर आती है लेकिन व्यक्ति का मनोबल ऊंचा हो जाता है। देवता ही नहीं, अपितु असुर भी भगवान को प्रिय होते हैं वृत्रासुर की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि असुर वही है जिसकी इंद्रियां अधोगामी हैं अपने हाथों से सेवा का काम करें। आंखों से प्रभु का दर्शन करें और कानों से भगवान का भजन कीर्तन एवं सत्संग का श्रवण करें ।मनुष्य वही है जो सब के काम आए। महात्मा दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान समाज की सेवा के लिए कर दिया। वृत्रासुर का अंत समय जब आया तो उसे इंद्र के वज्र में ब्रह्म का दर्शन हो गया और वृत्रासुर ने इंद्र से यही प्रार्थना की कि अगले जन्म में वह भगवान के भक्त बने। भगवान असुर एवं देवताओं पर समान रूप से कृपा करते हैं असुरों को संघार कर के उनका उद्धार करते हैं एवं भक्तों के ऊपर अपना कृपा रूपी हाथ रख कर उनका भी उद्धार करते हैं। आचार्य जी ने बताया कि भगवान का भजन करने से पापी से पापी व्यक्ति का उद्धार हो गया। भक्त प्रहलाद का जन्म भी असुर हिरण्यकश्यप के परिवार में हुआ किंतु भगवान की भक्ति में लगा हुआ बालक प्रहलाद केवल परमात्मा का चिंतन करता था हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से व्यथित होकर भगवान ने भक्त प्रह्लाद को दर्शन दिए। पिता हिरण्य कश्यप उसे भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकते हैं। उसकी भक्ति के मार्ग में कई तरह की बाधाएं डालते हैं, जबकि सत्य जान चुका प्रह्लाद अपने मार्ग पर यथावत चलता रहता है। किसी भी बाधा से विचलित न होने वाले प्रह्लाद अपने ही पिता की हिंसा के विरुद्ध एक क्रांति का बिगुल बजा देता है।गजेन्द्र मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए  महाराज जी ने कहा कि गजेन्द्र की कथा कोई हांथी की कथा नहीं है । यह हर मानव जीवन की कथा है। हांथी एक सरोवर में स्नान करता है। उसमें रहने वाला काल रूपी ग्राह उसके पैरों को पकड़ लेता है । हाथी अपनी तरफ खींचता है और ग्राह अपनी तरफ हांथी अपने परिवार के पत्नी, बच्चों को सहायता के लिये पुकारता है लेकिन कोई मदद नहीं करता।इसी तरह मनुष्य संसार रूपी सरोवर में स्नान करता रहता है । एक दिन काल पैरों को पकड़ता है।कोई परिवार नहीं बचा पाता । तभी ईश्वर की याद आती है । संसार में चाहे जितने आश्रय हो किंतु परमात्मा ही मनुष्य का सच्चा आश्रय है परमात्मा की शरण में रहने वाले मनुष्य निर्भय होते हैं।कार्यक्रम संचालक अमित गुप्ता सभासद ने बताया कि कल 14 अक्टूबर भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। सभासद ने भक्तो से कृष्ण जन्म के उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की।आज की कथा में मुख्य रूप से राजेश शर्मा नवल महेश्वरी,अमित गुप्ता,पिंटू गुप्ता, मयंक गुप्ता राम शंकर गुप्ता विजय वर्माघनश्याम शर्मा हीरा लाल गुप्ता रामौतार गुप्ता आनंद गुप्ता अश्विनी गुप्ता एवम बहुत से भक्त उपस्थित रहे।
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