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भागवत ने गोली का जवाब गोली से देने की कही बात, ताकि कोई लड़ाई की न करे हिम्मत

नई दिल्ली। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विजयदशमी कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा कर स्वयंसेवकों के पथ संचलन की सलामी भी ली। उन्होंने पाकिस्तान पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि पड़ोस में सरकार बदली है लेकिन नीयत नहीं बदली। अपने इस भाषण के दौरान भागवत ने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में स्वावलंबी होना पड़ेगा। वहीं उन्होंने ये भी कहा, “हम किसी से शत्रुता नहीं रखते लेकिन गोली का जवाब गोली से दे सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि “हम इतने बलवान बनेंगे कि कोई लड़ाई करने की हिम्मत ना करे। सेना को और मजबूत बनाना होगा।” संघ प्रमुख ने भारत के विश्व गुरु बनने की बात पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने सुरक्षा के क्षेत्र में स्वावलंबी होने की जरूरत पर ज़ोर देते हुए अपील की कि लोग फौजियों के परिवार की चिंता करें। वहीं, भागवत ने कहा कि अनुसूचित जातियों के लिए योजनाएं तो बनती हैं लेकिन समय से लागू नहीं हो पातीं। उन्होंने सब लोगों से संविधान और कानून का पालन करने की भी अपील की।

भागवत ने कहा कि “यह वर्ष श्रीगुरुनानक देवजी के प्रकाश का 550वां साल है। उन्होंने अपने जीवन की ज्योति जलाकर समाज को अध्यात्म के युगानुकूल आचरण से आत्मोद्धार का नया मार्ग दिखाया, समाज को एकात्मता और नवचैतन्य का संजीवन दिया। उसी परम्परा ने हमको 10 गुरुओं की सुन्दर और तेजस्वी मालिका दी।” भागवत ने कहा, “महात्मा गांधी जी के जन्म का 150वां साल है। उन्होंने इस देश के स्वतंत्रता आन्दोलन को सत्य और अहिंसा पर आधारित राजनीतिक अधिष्ठान पर खड़ा किया। ऐसे सभी प्रयासों के कारण देश की सामान्य जनता स्वराज्य के लिए घर के बाहर आकर, मुखर होकर अंग्रेजी दमन चक्र के आगे नैतिक बल लेकर खड़ी हो गई।”

उन्होंने कहा, “दृढ़ता से वन प्रदेशों में या अन्य सुदूर क्षेत्रों में दबाये गये हिंसात्मक गतिविधियों के कर्ता-धर्ता और पृष्ठपोषण करने वाले अब शहरी माओवाद (Urban Naxalism) के पुरोधा बनकर राष्ट्रविरोधी आन्दोलनों में पहली पंक्ति में दिखाई देते हैं।” उन्होंने कहा कि समाज में सारी कमियों को दूर कर उसके शिकार हुए समाज के अपने बंधुओं को स्नेह और सम्मान से गले लगाकर समाज में सद्भावपूर्ण और आत्मीय व्यवहार का प्रचलन बढ़ाना पड़ेगा।

आरएसएस के इस कार्यक्रम में कैलाश सत्यार्थी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, “पिछले 20 सालों में ही दुनिया में बाल माजदूरों की संख्या 26 करोड़ से घटकर 15 करोड़ हो गयी है। लेकीन मुझे अफसोस है की आज भी भारत में हमारा बेटीयों को जानवरों से भी कम कीमत पर खरीदा बेचा जाता है।” उन्होंने कहा, “हमारे महान देश में हर घंटे चुराये जाने वाले 8 बच्चे, यौन शोषण पीड़ित 4 बच्चे और बलात्कार के शिकार 2 बच्चे भारत माता के नहीं तो किसके है?” सत्यार्थी ने कहा कि ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के धड़ल्ले से चलते धंधे पर कानूनी पाबंदी लगे। उन्होंने कहा कि वो इसका प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पिचले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कई सरकारों से मिलकर एक आंतराष्ट्रीय संधी की तैयारी भी शुरू की है।

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