एड्स मामले में भारत तीसरे पायदान पर- एसीकॉन का आज से राष्ट्रीय अधिवेशन

मुंबई- एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एसीकॉन) का 11 वां राष्ट्रीय अधिवेशन शुक्रवार यानी 2 नवंबर से बेंगलुरु में शुरू होने जा रहा है। यह संगठन 18 साल से एचआईवी संबंधित चिकित्सकों का राष्ट्रीय संगठन है, जो देश में एचआईवी चिकित्सकीय प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित रहा है।

एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के 11वें राष्ट्रीय अधिवेशन (11वां एसीकॉन) के भारत सरकार का राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र का एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (UNAIDS); मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया, दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी शोध के लिए प्रतिष्ठित “काप्रिसा”, पीपल्स हेल्थ आर्गेनाइजेशन, आशा फाउंडेशन, आदि शैक्षिक साझेदार हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी के अध्यक्षीय समिति के सदस्य डॉ ईश्वर गिलाडा के मुताबिक एचआईवी पीड़ित लोगों के आंकड़ों पर गौर करें तो दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया के बाद, विश्व स्तर पर भारत तीसरे नंबर पर है। भारत ने 193 देशों के साथ वर्ष 2030 तक एड्स समाप्त और वर्ष 2020 तक 90-90-90 लक्ष्य पूरा करने का वादा किया है। अनेक चुनौतियों में भारत ने एड्स नियंत्रण की दिशा में सराहनीय प्रगति की है। परंतु निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अभी भी महत्वपूर्ण कार्य शेष है।

डॉ ईश्वर गिलाडा ने चेताया कि अभी तक की अपूर्ण सफलता से हमारे व्यापक एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में ढील नहीं आनी चाहिए। अन्यथा जो प्रगति हुई है वह पलट सकती है। भारत में एड्स नियंत्रण एक नाज़ुक मोड़ पर है। वर्ष 2010-2017 के मध्य नए एचआईवी संक्रमण में 27 फीसदी की गिरावट आई है। बावजूद इसके एक साल में 87,580 नए एचआईवी संक्रमण अत्यंत चिंताजनक हैं। हमें एचआईवी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भहुत कुछ करने की जरूरत है। भारत सरकार को 90-90-90 के लक्ष्य पूरे करने हैं। इसके लिए 26 महीने शेष रह गए हैं। हमारी प्रगति इन लक्ष्यों की ओर असंतोषजनक है।

डॉ गिलाडा ने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार, 21.4 लाख अनुमानित एचआईवी पॉजिटिव लोगों में से 77% को अपने एचआईवी संक्रमण की जानकारी है, और इनमें से 56% को 11.81 लाख को एंटीरेट्रोवायरल दवा प्राप्त हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की”टेस्ट एंड ट्रीट” मार्गदर्शिका के बावजूद, अभी तक 23% एचआईवी से संक्रमित लोगों तक जांच नहीं पहुंची है, 44% को एंटीरेट्रोवायरल दवा नहीं मिली है। यदि 90-90-90 लक्ष्यों को 2020 तक पूरा करना है तो यह ज़रूरी है कि सभी शोध-प्रमाणित व्यापक एड्स नियंत्रण कार्यक्रम पूरी कार्यसाधकता के साथ सक्रीय रहें और कोई ढील न आए।

राष्ट्रीय अधिवेशन के सह-अध्यक्ष डॉ जीडी रविन्द्रन ने बताया कि कर्नाटक में 2.47 लाख एचआईवी से संक्रमित लोग हैं, जिनमें से 1.23 लाख महिलाएं हैं। इनमें से 1.55 लाख (62.8%) को एंटीरेट्रोवायरल दवा मिल रही है. 2010-2017 के दौरान कर्नाटक में एड्स-मृत्यु दर में 68% और नए एचआईवी संक्रमण दर में 46% गिरावट आई है। वर्ष 2017 में 5008 नए एचआईवी संक्रमित लोग चिन्हित हुए जो चिंताजनक है।

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