लखनऊ

हर्बल उत्पाद के विकास में गुणवत्ता को दिया आश्वासन

लखनऊ ! भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सी.एस.आई.आर.-आई.आई.टी.आर.) दक्षिण एशिया की एक प्रमुख विषविज्ञान प्रयोगशाला, में शुक्रवार,को उद्घाटन किया गया । 1965 में स्थापित, यह प्रमुख विषविज्ञान प्रयोगशाला हर साल की तरह इस समारोहों के एक भाग के रूप में यह सम्मेलन आयोजित करती है। इस वर्ष वार्षिक दिवस समारोह,गुरूवार को आयोजित किया गया। आयुष उत्पादों की सुरक्षा: डायग्नोस्टिक्स एवं बायोमेडिकल :डिवाइसेस खाद्य एवं उपभोक्ता सुरक्षा

हर्बल उत्पाद के विकास में गुणवत्ता

सम्मेलन का पहले दिन आयुर्वेदिक दवाओं की सुरक्षा का मूल्यांकन करने और डायग्नोस्टिक्स एवं बायोमेडिकल डिवाइसेस, हर्बल उत्पाद विकास में गुणवत्ता आश्वासन केलिए मॉडल सिस्टम के व्याख्यान पर केंद्रित रहा। आयुष उत्पादों की सुरक्षा के लिए सीएसआईआर – आईआईटीआर द्वारा की गई पहल की गयी । इसके बाद रुमैटिक हृदय रोग (हार्ट डीजीज) केलिए उन्नत नैदानिक उपकरणों एवं अन्य क्षेत्रों के सुरक्षा मूल्यांकन केलिए प्रीक्लिनिकल इमेजिंग तकनीकों पर विचार-विमर्श किया गया।

पहले दिन में, सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए डॉ. अनिल के. त्रिपाठी, निदेशक, सीएसआईआर – केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान ने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय केलिए यह आवश्यक है कि परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों की पुरानी कार्य प्रणाली को वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्रदान करें । जबकि आयुष प्रणाली ने औषधियों के वांछित परिणाम प्राप्त किए हैं, विज्ञान के वैश्विक मानक में बढ़ोतरी से सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर व्यापक साक्ष्य मांगे जाते हैं। प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक, सी.एस.आई.आर.- भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सी.एस.आई.आर.-आई.आई.टी.आर.), ने बताया कि मानव उपयोग केलिए सुरक्षित उपकरणों तथा उत्पादों को सुनिश्चित करने में विषविज्ञान एवं सुरक्षा परीक्षण की प्रासंगिकता को दोहराया। जिसमें डॉ. पूनम कक्कड़, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर – भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं अनुसंधान अध्यक्ष, आयोजन समिति, आईटीसी-2018 ने सभी का स्वागत किया।

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