खेती - बारी

अधिक उपज देने वाली 86032 किस्म, गन्ने की खेती किस माह में क्या करें

गन्ना लगाने की पारंपरिक विधि में रोपाई हेतु 2-3 आंख वाले टुकडों का उपयोग किया जाता है। एस.एस.आई. विधि में स्वस्थ गन्ने से सावधानी पूर्वक एक-एक कलिकाएं निकालकर पौधशाला (कोको पिथ से भरी ट्रे) में लगाया जाता है । मुख्य खेत में 25-35 दिन की पौध रोपी जाती है । पौधशाला में एक माह में पौधों की वृद्धि बहुत अच्छी हो जाती है। पारंपरिक विधि में एक एकड़ से 44000 गन्न प्राप्त करने हेतु दो कतारों के मध्य 45 से 75 सेमी.(1.5-2.5 फीट) की दूरी रखी जाती है और प्रति एकड़ तीन आंख वाले 16000 टुकड़े (48000 आंखे) सीधे खेत में रोप दी जाती है । परन्तु अंत में सिर्फ 25000 पिराई योग्य गन्ना ही प्राप्त हो पाता है । जबकि एस.एस.आई. विधि में अधिक फासलें (कतारों के मध्य 5 फीट और पौधों के मध्य 2 फीट) में रोपाई करने से कंसे अधिक बनते हंै जिससे 45000 से 55000 पिराई योग्य गन्ना प्राप्त हो सकता है । इस प्रकार से कतारों व पौधों के मध्य चौड़ा फासला रखने से न केवल कम बीज ( तीन आंख वाले 16000 टुकड़ों की अपेक्षा एक आंख वाले 5000 टुकड़े) लगता है बल्कि इससे प्रत्येक पौधे को हवा व प्रकाश सुगमता से उपलब्ध होता रहता है जिससे उनका समुचित विकास होता है । एस.एस.आई. विधि में जल प्रबंध पर विशेष ध्यान दिया जाता है । खेत में पर्याप्त नमीं बनाये रखना लाभकारी पाया गया है । बाढ विधि से सिंचाई करने से पानी कि अधिक मात्रा तो लगती ही है, पौधों की बढ़वार पर भी बिपरीत प्रभाव पड़ता है । पौधशाला में पौध तैयार करना, कूड़ या एकान्तर कूड़ विधि या टपक विधि से आवश्यकतानुसार सिंचाई करने से 40 प्रतिशत तक जल की वचत संभावित है । दीर्धकाल तक अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता है । इसके लिए जैविक खाद व जैव उर्वरकों का प्रयोग किया जाना आवश्यक है । समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन करना अधिक लाभकारी पाया गया है । एस.एस.आई. विधि में गन्नेे की दो कतारों के बीच गेंहू, चना, आलू, राजमा, बरवटी, तरबूज, बैगन आदि फसलों की अन्र्तवर्ती खेती को प्रोत्साहित किया जाता है । इससे भूमि, जल आदि संसाधनों का कुशल उपयोग होने के साथ-साथ खरपतवार भी नियंत्रित रहते है और किसानों को अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त हो जाती है ।
जनवरी

पाले से बचाव हेतु खड़ी फसल में आवश्यकतानुसार अंगद डीजल पंप से सिंचाई करें।
शरदकालीन गन्ने के साथ ली गई विभिन्न अन्त:फसलों जैसे-सरसों, तोरिया, मसूर, आलू, धनिया, लहसुन, मैथी, गेंदा प्याज तथा गेहूं आदि आवश्यकतानुसार निराई, गुड़ाई, कीट प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
बसंतकालीन बुवाई की तैयारी शुरू कर दें इस हेतु मृदा परीक्षण कराकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
बसंतकालीन बुवाई हेतु कुल क्षेत्रफल का 1/3 भाग शीघ्र पकने वाली प्रजातियों के अंतर्गत रखे साथ ही बुवाई हेतु स्वस्थ बीजों का चयन कर उसका विशेष प्रबंध करें।
गन्ने से खाली हुए खेत की तैयारी कर पशुओं के लिए चारे की फसल एवं सब्जियों की खेती करें।
अगेती पौधे की फसल की कटाई तापमान यदि काफी कम हो तो न करें इससे पेड़ी गन्ने में फुटाव उत्तम नहीं होगा।

फरवरी
पौधे गन्ने की कटाई जमीन से सटाकर करें जिससे फुटाव अच्छा होगा।
यथा संभव पोगले न छोड़ें इससे पेड़ी प्रबंध में कठिनाई होगी साथ ही उत्पादन अपेछित नहीं होगा।
शरदकालीन गन्नेे में सिंचाई एवं निराई, गुड़ाई तथा खरपतवार का नियंत्रण करें।
गन्ना बीज जिन खेतों में रोकना हो उसमें सिंचाई आदि का विशेष ध्यान रखें, बुवाई पूर्व बीज नर्सरी में यूरिया के प्रयोग से फुटाव अच्छा होता है।
पेड़ी गन्ने की देखभाल करें, खाली जगह पर गैप फिलिंग करें तथा सिंचाई व गुड़ाई के बाद एन.पी. के आदि उर्वरकों का प्रयोग करें।
कुल रकबे के अनुसार प्रजातीय संतुलन को ध्यान में रखकर बुवाई करें।
गन्ना बीज उपचार हेतु पारा युक्त रसायन एग्लाल 3 (560 ग्राम) एरितान 6 (280 ग्राम) या एम. ई.एम.सी. 6 (280 ग्राम) या बाविस्टीन 110 ग्राम को घोलकर टुकड़ों को उपचारित करें।
बुवाई के समय दीमक व अंकुर बेधक के नियंत्रण हेतु फोरेट-10 जी. 25 किग्रा. या सेविडाल 4:4 जी 25 किग्रा. या किलोरोपरिफोस-20 ई.सी. 5 ली./है. की दर से प्रयोग करें।
गन्ने की बुवाई के समय सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक सल्फेट सुपर सुगर कैन स्पेशल आदि 25 किग्रा./है. की दर से) का भी प्रयोग करें।

मार्च
अच्छी उपज के लिए उत्तम प्रजातियों एवं बुवाई की नई तकनीकों यथा ट्रेंच पद्धति का प्रयोग करें।
सफेद गिडार के नियंत्रण हेतु बुवाई के समय बबरिया वेसियाना एवं मेटारैजियम 5 किलो./है. की दर से 60:40 के अनुपात में प्रयोग करें।
आय को बढ़ाने तथा संसाधनों के समुचित प्रयोग हेतु गन्ने के साथ साथ उड़द, मूंग, फ्रास बीन, मक्का आदि फसलें लें।
सह फसल में उर्वरकों की अतिरिक्त मात्रा का प्रयोग करें।
शरदकालीन गन्ने में यदि फरवरी माह में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग न की हो तो मार्च में अंगद डीजल पंप से सिंचाई के पश्चात 132 किग्रा. यूरिया है की दर से टॉप ड्रेसिंग करें।
गन्ने की कटाई उपरांत खेत में अंगद एमबी हल से मेंड़ जोतने के बाद ठूठों की छटाई पंक्तियों के दोनों तरफ अंगद रोटावेटर से गुड़ाई एवं रिक्त स्थानों में पूर्व अंकुरित पौधों से भराई करें।
ऐसीटोंबेकटर एवं पीएसबी 5 किग्रा./है,की दर से प्रथम सिंचाई के उपरांत पौधों के कूंड बनाकर डालना चाहिए या बुवाई के समय प्रयोग करें।
कंडुआ रोग दिखाई देने पर पौधों को नष्ट कर दें।
चोटी बेधक के अंड समूह को एकत्रित कर नष्ट कर दें।
बसंतकालीन गन्ने में खरपतवार नियंत्रण हेतु 2 किग्रा. ऐतरा जीन सक्रिय तत्व पानी में घोल बनाकर बुवाई के तुरंत बाद अंगद डीजल स्प्रेयर से छिड़काव करें।

अप्रैल
गन्ने के अच्छे फुटाव के लिए अंगद रोटावेटर से गुड़ाई कर कूंड बनाकर यूरिया खाद की दूसरी मात्रा का प्रयोग करें।
शरदकालीन गन्ने के साथ अन्त:फसल की कटाई यदि हो गई हो तो सिंचाई करें एवं उर्वरक की शेष मात्रा कूंड बनाकर डाल दें।
यदि गेहूं के बाद गन्नेे की बुवाई कर रहें हैं तो लाइन से लाइन की दूरी घटाकर 65 सेमी. कर लें तथा बीज की मात्रा भी बढ़ाकर प्रयोग करें जिससे खेत में पौधों की संख्या उचित मात्रा में रहे।
इसी माह में पायरीला का प्रकोप हो सकता है यदि मित्र कीट (अंड परजीवी ) इपीरिकीनिया मिलेनोल्युका यदि खेत में है तो कीटनाशी का प्रयोग न करें बल्कि अंगद वाटर पंप से सिंचाई कर हलकी यूरिया का प्रयोग करें।

मई

सूखे से बचाने हेतु आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें।
इस माह में अगेती चोटी बेधक के नियंत्रण हेतु सिंचाई करते रहें साथ ही सेवीडॉल 4:4 जी फोरेट-10 जी फरतेरा या कार्ताफ 25 किग्रा.है, या क्लोरोप्यरीफोस 20 ईसी 1 लीटर 700 लीटर पानी में घोल बनाकर अंगद स्प्रेयर तब छिड़काव करें जब अंडे एवं पतंगे दिखाई पड़े।
अगेती चोटी बेधक हेतु ट्रेकोकार्ड 4/है, की दर से प्रयोग करें.
फसल की अच्छी बढ़वार, कीट नियंत्रण एवं पोषक तत्वों की कमी हेतु यूरिया मैक्रोन्यूट्रीएंट का 2 घोल एवं कीटनाशक रसायन जैसे एन्डोसल्फान मेटासिड या क्लोरोप्यरीफोस 20 ईसी का 1 घोल का अंगद स्प्रेयर से छिड़काव करें।
यदि बसंतकालीन बुवाई के समय खरपतवार नियंत्रण हेतु ऐतराजीन का प्रयोग किया है तो इस माह 2-4 डी. 1 किग्रा. सक्रिय तत्व छिड़काव करें।

जून
उर्वरक की शेष मात्रा इस माह अवश्य पूर्ण कर ले.
गुड़ाई पूर्ण करने के पश्चात मिट्ïटी चढ़ाई का कार्य अंगद रिजर से अवश्य करें।
खरपतवार नियंत्रण हेतु निराई करें। यदि देर से अर्थात अप्रैल में बुबाई के समय नत्रजन का उपयोग किया है तो इस माह मे खरपतवार नियंत्रण हेतु 2, 4 डी. 1 किग्रा. सक्रिय तत्व 500-600 ली. पानी में घोल बना कर अंगद स्प्रेयर से छिड़काव करें।

जुलाई
गन्ने के जिन खेतों का ब्यात पूरा हो चूका है उनमें अंगद रिजर से मिट्ïटी चढ़ा दे।
चोटी बेधक का मादा तिल्ली जुलाई माह में पत्तियों की निचली सतह पर समूह में अण्डे देती है, अण्डे वाली पत्तियों को नष्ट कर दे तथा कार्बोफुरान 3 जी. 25 किग्रा./ है. की दर से अवश्य प्रयोग करें।
गुरदासपुर बेधक के नियंत्रण हेतु सूखे अगोले को काटकर जमीन मे दबा दें तथा क्लोरोपाएरिफास 20 ई. सी./ली. प्रति है की दर से छिड़काव करें।
जल निकास का उचित प्रबंधन करें।
पर्षा के दिनों में पर्याप्त वर्षा न होने पर 8-10 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करते रहें।
सूखे से बचने, जल के समुचित उपयोग एवं बिजली की कमी से निपटने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रयोग करें।
सफेद गिडार के नियंत्रण हेतु लाइट ट्रैप या पौधों पर कीटनाशी छिड़काव कर नियंत्रण करें।
शरद कालीन गन्ने को गिरने से बचाने के लिए बंधाई अवश्य करें।

अगस्त
गुरदासपुर बेधक एवं सफेद मक्खी का प्रभावी नियंत्रण हेतु जल निकास की व्यवस्था करें तथा मनोक्रोतोफास 36 ई.सी. या क्लिरोपरिफास 20 ई.सी.1-1.5 ली. प्रति है. की दर से छिड़काव करें।
गन्ने की दूसरी बंधाई अवश्य करें।
अगस्त माह मे गन्ने पर चढऩे वाले खरपतवार यथा आइपोमिया प्रजाति (बेल) की बढ़वार होती है, जिसे खेत से उखाड़कर फेक दे. अथवा मेट सल्फुरान मिथाइल (एम.एस.एम.) 4 ग्राम/है. की दर से 500-600 ली. पानी मे घोल बना कर जब इसमें छोटे पौधे खेत मे दिखाई पड़े प्रयोग करना चहिये।

सितम्बर
गन्ने की तृतीय एवं बंधाई का कार्य पूर्ण कर लें।
शरद कालीन बुवाई हेतु खेत की तैयारी शुरू कर दें।
पायरीला का प्रकोप अधिक होने पर क्लोरोपय्रीफास 20 ई.सी./ली. या मोनोकोटोफास 36 ई.सी. 10-15 ली./है. की दर से प्रयोग करें।

अक्टूबर
शरद कालीन बुवाई प्रारंभ कर दे, वैज्ञानिक बुवाई विधि या ट्रेंच विधि का प्रयोग करें।
यथा संभव गन्ने की लाइनें पूरब-पश्चिम की ओर होनी चाहिए।
लाइन से लाइन की दूरी 90 सेमी. रखें।
गन्ना बीज को पारायुक्त रसायन से अवश्य उपचारित करें।
आय बढ़ाने हेतु शरद कालीन बुवाई में सहफसली पद्घति को अवश्य अपनाये।

नवम्बर
फसल की अच्छी बढ़वार के लिए 12-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
अच्छी पेड़ी लेने के लिए गन्ने की कटाई सतह से करें ताकि फुटाव अच्छा हो।
मील को गन्ना निर्धारित कलेंडर अनुसार पर्ची प्राप्त होने पर कटाई कर आपूर्ति करें।
अगेती प्रजाती का पेड़ी गन्ना चीनी मील को साफ-सुथरी स्थिति में आपूर्ती करें।
गन्ना संबंधी किसी भी कठिनाई पर सम्बंधित समिति, चीनी मील एवं जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।
समिति कर्ज की कटौती पूर्ण करने हेतु कर्जे की पर्ची प्राप्त कर गन्ने की आपूर्ती प्राथमिकता पर करें।
कर्जे की कटोती से सम्बन्ध में सम्बंधित समिति से संपर्क करें।

दिसम्बर
अंत में फसल में निराई-गुड़ाई करें।
आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहे।
पेड़ी फसल काटने के बाद यदि गेहूं की बुवाई करना चाहते हैं तो गेहूं की पछेती किस्मों का चुनाव करें।
खेतो में जीवांश खाद्य गोबर, कम्पोस्ट, मैली को डालकर फैला कर अंगद कल्टीवेटर से जुताई कर दे।
पाले से फसल को बचाने के लिए सिंचाई करें।

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