समाज कल्याण विभाग से गायब हो गयी सामूहिक विवाह की सूची

बिना ई-टेंडरिंग के ही घालमेल कर खरीद दिया सामानः सूत्र

मुजफ्फरनगर। समाज कल्याण विभाग हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है। यह विभाग घोटालों को लेकर सुर्खियों में रहा है। वर्तमान में यह विभाग जनपद के बड़े पद पर बैठे एक अधिकारी की शह पर किये गये समाज कल्याण अधिकारी के द्वारा किये गये कारनामे के कारण सुर्खियों में है। समाज कल्याण अधिकारी की कार्यप्रणाली विभाग में एक बड़े घोटाले की ओर संकेत कर रही है।

समाज कल्याण अधिकारी ने हाल ही में संपन्न कराये गये सामुहिक विवाह के जोड़ों के नामों की सूची ही गायब कर दी। मांगने पर उनका जवाब होता है कि आरटीआई से ले लो। इसके साथ ही सामान की खरीद में भी मानकों का प्रयोग नहीं किया गया है। समाज कल्याण विभाग को अगर घोटाला विभाग कहा जाए, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। समाज कल्याण विभाग वर्तमान में सामुहिक विवाह समारोह को लेकर सुर्खियों में है। समाज कल्याण विभाग ने रातोंरात संपन्न कराये गये सामुहिक विवाह के 1151 जोड़ों के नामों की सूची गायब कर दी गयी। मांगने पर समाज कल्याण अधिकारी भरतलाल गौड़ का कहना है कि आरटीआई से ले लो। यहां सूची नहीं है। इसके साथ ही विभाग कर्मचारियों का कहना था कि सूची ब्लॉक में होगी, हमारे यहां पर नहीं।

यह जवाब हैरतअंगेज ही कहा जाएगा कि भला मुख्यालय पर बिना संपूर्ण सूची के किस प्रकार से सामान खरीदा गया और किस प्रकार से विवाह संपन्न कराए गए। हर कर्मचारी व अधिकारी का सूची को लेकर अलग-अलग उत्तर व तर्क है। विभागीय सूत्रों का कहना था कि विवाह समारोह व विवाहित जोड़ों के सामानों पर घालमेल किया गया है। यह घालमेल जिला समाज कल्याण अधिकारी भरतलाल गौड ने जनपद के एक बड़े अधिकारी की शह पर किया है। सभी सामान बिना ई-टेंडरिंग के ही अपने निजी व्यक्तियों से खरीदवा दिया गया। जो कि निम्न क्वालिटी का बताया गया है। बिना ई-टेंडरिंग के सामान खरीदा जाना घोटाले की ओर संकेत करता है। हो सकता है कि कुछ के नाम केवल सूची में ही हो। जिला समाज कल्याण अधिकारी पर दस लाख मांगने का भी आरोप लगा था, जो सचिव के सामने भी आया था, जिस पर उन्होंने डीएम से उसे निलंबित करने की बात कही थी, लेकिन डीएम के द्वारा उसे अनसुना कर दिया गया।

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