घुटने के जोड़ों पर चोट  लगे  तो तुरन्त किसी विशेषज्ञ  ले सलाह  –  डाॅ0 सिद्धार्थ  

लखनऊ !  किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रिह्मेटोलाॅजी विभाग एवं सोसाइटी फाॅर आॅस्टियो आर्थराइटिस रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में नेशनल आॅस्टियोआर्थराइटिस डे पर वाॅकाथाॅन का आयोजन किया गया। आॅस्टियोआर्थराइटिस के नाम से आयोजित किए गए इस वाॅकाथाॅन का मुख्य उद्देश्य आॅस्टियोआर्थराइटिस के प्रति लोगों के जागरूक करना था।
हाथों में  बैनर-पोस्टर लिए वाॅकाथाॅन में शामिल सैकड़ों  डाक्टरों लिया हिस्सा 
अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर से शुरू हुई यह वाॅकेथाॅन बड़ी पैथोलाॅजी से होती हुई कलाम सेंटर में जाकर सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर केजीएमयू के  कुलपतिप्रोफेसर एमएलबी भटट् ने नियमित व्यायाम, रोजाना टहलने एवं धूप का प्रतिदिन सेवन ही इस बीमारी का एकमात्र इलाज बताया और कहा कि अपनी दिन चर्या से मात्र कुछ समय निकाल कर किस प्रकार से स्वस्थ्य जीवन का लाभ लिया जा सकता है ।
केजीएमयू के  कुलपति प्रो एमएलबी भटट् के नेतृत्व मे आयोजित इस वाॅकाथाॅन में छात्र-छात्राओं समेत कई विभागों के प्राचार्य, डाॅक्टरों, कर्म चारियों व आमजन ने बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया। इस दौरान  हाथों में  बैनर-पोस्टर लिए वाॅकाथाॅन में शामिल सैकड़ों  डाक्टरों, छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों व आमजन ने आॅस्टियोआर्थराइटिस के प्रति लोगों को बचाव व स्वस्थ्य जीवन जीने का संदेश दिया।  
आॅस्टियोआर्थराइटिस  मरीजों में गैर आॅस्टियोआर्थराइटिस वाले लोगों की तुलना मे मृत्यु  दर 1.7 गुना अधिक  
 
 रिह्मेटोलाॅजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ सिद्धार्थ दास ने बताया कि आॅस्टियोआर्थराइटिस घुटनों में होने वाले एक आम गठिया की तरह ही है, लेकिन इस के कारण डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। इसमें  आॅस्टियोआर्थराइटिस वाले मरीजों में गैर आॅस्टियोआर्थराइटिस वाले लोगों की तुलना मे मृत्यु  दर 1.7 गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस बीमारी का कोई इलाजन हीं है सिर्फ व्यायाम एवं संयमित दिन चर्या ही इससे बचाव का एकमात्र उपाय है। डाॅ सिद्धार्थ दास ने बताया कि आॅस्टियोआर्थराइटिस, डायबिटीज और हृदय से संबंधित बीमारियां आमतौर पर साथ-साथ होती हैं।इसके साथ ही  इस बीमारी की शंका होने पर इस का प्रारंभिक निदान और प्रबंधन  अच्छी तरह से किया जाना चाहिए । डायबिटीज और हृदय से संबंधित बीमारियों के बचाव के लिए चलना-फिरना अथवा जाॅगिंग करना लाभदायक होता है परन्तु आॅस्टियोआर्थराइटिस के मरीज यह चीज आसानी से नहीं कर पाते हैं, जिस वजह से डायबिटीज और हृदय से संबंधित बीमारियां और बढ़ जाती हैं।
डाॅ0 सिद्धार्थ दास ने इन तीनों बीमारियों के गठ जोड़ को खतरनाक बताते हुए आॅस्टियोआर्थराइटिस  से बचाव एवं इस के रोकथाम के कारगर  उपाय बताते हुए कहा  कि इस बीमारी से बचने के लिए वजन को न बढने दें। इसके लिए पैदल चलने सब से बेहतर उपाय है, इससे  वजन और अन्य बीमारियां कंट्रोल में रहेंगी।इसके साथ ही बहुत अधिक समय के लिए उकड़ू न बैठे।  उन्होंने  बताया कि आमतौर पर भारतीय महिलाएं उकड़ू  बैठ कर ही घरेलू कार्य करती हैं, जैसे घर में पोछा लगाते समय या फिर खाना बनाते समय, ऐसा न करने से इस बीमारी में आराम मिलता है।
घुटने के जोड़ों पर चोट  लगे  तो तुरन्त किसी विशेषज्ञ  ले सलाह  !   डाॅ0 सिद्धार्थ 
 
डाॅ0 सिद्धार्थ दास ने बताया कि घुटने या जोड़ों पर चोट लगने से भी आॅस्टियोआर्थराइटिस होने का खतरा बना रहता है इस लिए कोशिश करनी चाहिए कि घुटने या जोड़ों पर चोट न लगे और अगर लग भी जाए तो तुरन्त किसी विशेषज्ञ से उसका इलाज करवाए ।  केजीएमयू के गठिया रोग विभाग में इस रोग से पूरी तरह से तो निजात संभव नहीं है, क्योंकि फिल हाल यह लाइलाज  बीमारी है लेकिन डायबिटीज व हृदय से संबंधित बीमारियों की तरह इस बीमारी में भी दवाई से आराम मिल जाता है।
जानिए क्या होेता है  आॅस्टियोआर्थराइटिसः
ऑस्टियोअर्थराइटिस अर्थराइटिस का ही एक प्रकार है, जिसमें हड्डियों पर मौजूद टिशूज में लचीला पन कम हो जाता है। इस रोग में हड्डियों के जोड़ों के कार्टिलेज घिस जाते हैं और उनमें चिकनाहट कम होने लगती है। आमतौर पर यह बीमारी अधेड़ावस्था यानी 40 से 50 या इससे अधिक उम्र वाले लोगों में इसके होने की आशंका ज्यादा होती हैं। लेकिन शहरी जीवन में यह बीमारी युवाओं में भी दिखायी दे रही है। जोड़ों में दर्द होना,जोड़ों में तिरछापन,चाल में खराबी,यानी चलने.फिरने की क्षमता का कम होना जैसे लक्षण इस बीमारी में दिखाई देते हैं ।
इन लोगो ने लिया हिस्सा 
वाॅकाथाॅन में मुख्य रूप से सोसाइटी फाॅर आॅस्टियोआर्थराइटिस रिसर्च की सचिव डाॅ पूजा धाओं, मुख्य चिकित्साअधिकारी डाॅ एसएन  शंखवार, अधिष्ठाता चिकित्सा संकाय डाॅ विनीता दास, आईएमए की डाॅ रूख्साना, समाजवादी पार्टी की नेत्री व लखनऊ की पूर्व महापौर प्रत्याशी डाॅ मधु गुप्ता, वरिष्ठ नागरिक चन्द्रकिशोर रस्तोगी समेत सैकड़ों डाक्टरों, छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों  व आमजन ने भाग  लिया।
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