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इस मुसलमान से मिलने के बाद आपको समझ आयेगा…हिन्द का अर्थ

आज़ादी के 70 साल बाद भी देश आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा है। धर्म के नाम पर आज भी देश गुलाम ही है। धर्म के नाम पर दंगे आज भी चरम पर हैं। धर्म, जाति, रंग-भेद के नाम पर लगातार लड़ाई जारी है।

ये कहानी है लखनऊ के एक ऐसे बुजुर्ग की, जो धर्म से तो मुस्लिम है, लेकिन उसने अपना जीवन मन्दिर को समर्पित कर दिया है। मन्दिर की रखवाली भी करता है।

जिस शख्स की हम कहानी बता रहे हैं, वो धर्म से तो हिन्दू नहीं हैं। लेकिन उन्होंने अपना घर मन्दिर बनाने के लिए दे दिया। उसके बाद से ही वे मंदिर के रखरखाव में लग गए हैं।

आज जहाँ धर्म के नाम पर इतनी लड़ाइयाँ और दंगे हो रहे हैं, वहां ये शख्स मिसाल बनकर सामने आया है। इससे साफ़ है कि उम्मीद अब भी बाकी है।

ऐसे शख्स को देखकर लगता तो है कि इस अँधेरे की सुबह जरूर होगी। आज 15 अगस्त के मौके पर हम इस दंगों की आज़ादी की मांग करते हैं।

ऐसे शख्स भी हैं, जो धर्म और जाति के बंधन से ऊपर सोचते हैं। मिलिए नूरुल हसन से, जो सादगी के बाद भी स्पेशल जिन्दगी जी रहा है। ये शख्स हमें असली भारतीय होने की सीख दे रहा है। इस फिल्म का टाइटल है ‘द हिन्द’।

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