कारोबार

सेंसेक्स में 1.34 फीसदी, निफ्टी में 1.46 फीसदी की गिरावट

मुंबई। गुजरे हफ्ते घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट का दौर रहा और चार कारोबारी सत्रों में से तीन में गिरावट दर्ज की गई। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 476.14 अंकों या 1.34 फीसदी की गिरावट के साथ 34,981.02 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 155.45 अंकों या 1.46 फीसदी की गिरावट के साथ 10,526.75 पर बंद हुआ। साप्ताहिक आधार पर, बीएसई का मिडकैप सूचकांक 117.47 अंकों या 0.78 फीसदी की गिरावट के साथ 14,880.34 पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक 135.05 अंकों या 0.93 फीसदी की गिरावट के साथ 14,350.83 पर बंद हुआ।

सोमवार को शेयर बाजारों की सकारात्मक शुरुआत हुई और सेंसेक्स 317.72 अंकों या 0.90 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 35,774.88 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 81.20 अंकों या 0.76 फीसदी की तेजी के साथ 10,763.40 पर बंद हुआ।

मंगलवार को बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स 300.37 अंकों या 0.84 फीसदी की गिरावट के साथ 35,474.51 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 107.20 अंकों या 1.00 फीसदी की गिरावट के साथ 10,656.20 पर बंद हुआ।

बुधवार को सेंसेक्स में 274.71 अंकों या 0.77 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 35,199.80 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 56.15 अंकों या 0.53 फीसदी की गिरावट के साथ 10,600.05 पर बंद हुआ।

गुरुवार को लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 218.78 अंकों या 0.62 फीसदी की गिरावट के साथ 34,981.02 पर बंद हुआ। निफ्टी 73.30 अंकों या 0.69 फीसदी की गिरावट के साथ 10,526.75 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को शेयर बाजार गुरुनानक जयंती के अवसर पर बंद रहे।

बीते सप्ताह सेंसेक्स के तेजी वाले शेयरों में – यस बैंक (2.22 फीसदी) और मारुति सुजुकी (1.06 फीसदी) प्रमुख रहे।

सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे – रिलायंस इंडस्ट्रीज (2.19 फीसदी), एचडीएफसी (0.69 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (4.21 फीसदी) और इंफोसिस (4.61 फीसदी)।

आर्थिक मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की केंद्रीय समिति ने सोमवार (19 नवंबर) को ’बासेल रेगुलेटरी कैपिटल फ्रेमवर्क’ पर चर्चा के लिए बैठक की और इस संबंध में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया, जो ’इकॉनमिक कैपिटल फ्रेमवर्क’ (ईसीएफ) को लेकर आरबीआई को सुझाव देगी।

वैश्विक मोर्चे पर, जापान का व्यापार संतुलन अक्टूबर में 449 अरब येन (3.95 अरब डॉलर) के घाटे में रहा, जिसका प्रमुख कारण अमेरिका द्वारा अपने बाजार के लिए संरक्षणवादी कदम उठाना है।

अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों में, अमेरिकी विनिर्मित टिकाऊ उपभोक्ता सामानों के उत्पादन में अक्टूबर में 4.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 15 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है।

वहीं, अमेरिका के औद्योगिक उत्पादन में अक्टूबर में 0.1 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।

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