लखनऊ

शिवसेना की राम मंदिर आंदोलन में कोई भूमिका नहीं : उप मुख्यमंत्री

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मामले में उ.प्र. के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मोर्य का कहना है कि श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का भारतीय जनता पार्टी खुला समर्थन करती है। यह आन्दोलन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया है। बड़ी संख्या में मुस्लिम भी श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण चाहता है मस्जिद का नहीं। परंतु तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल और कुछ मुस्लिम नेता इस मामले में बाधा डाल रहे हैं। केशव ने जहां विपक्ष के तारीख न बताने के सवाल पर कहा है कि तारीख बताने का काम न भाजपा का है और ना सरकार का। वहीं केशव ने कहा है कि राम मंदिर आंदोलन में शिवसेना की कोई भूमिका नहीं है।
पेश है आईपीएन से फोन पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मोर्य से हुई विशेष बातचीत के अंश –

सवाल- राम मंदिर को लेकर ऐसा लग रहा है कि शिवसेना राम मंदिर के मुद्दे को कैप्चर करना चाहती है ?

जवाब- जहां तक मंदिर निर्माण के मुद्दे पर संघर्ष की बात है, विश्व हिंदू परिषद और श्री राम जन्मभूमि न्यास साधु संतों के मार्गदर्शन में करता रहा है। शिवसेना की पूर्व के आंदोलन में भी कोई भूमिका नहीं थी। हां बालासाहेब ठाकरे जी का समर्थन विश्व हिंदू परिषद को अवश्य मिलता रहा है। श्री राम जन्मभूमि में लगे हुए ताले को खोलने से लेकर के श्री राम शिला पूजन, श्री राम चरण पादुका पूजन, कारसेवक सहित अनगिनत आंदोलन हुए जिसमें एक राम भक्त होने के नाते विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री के रूप में मुझे भी शामिल रहने का मौका मिला था। इसलिए देश का राम भक्त जानता है कि पूर्व में और वर्तमान में आंदोलन किसने किया और कौन कर सकता है।

सवाल- 2019 लोकसभा के लिए बीजेपी राम मंदिर का मुद्दा बनाएगी ?

जवाब- केशव ने कहा कि राम भक्तों की भावना यही है कि जल्द से जल्द सर्वोच्च न्यायालय मामले की सुनवाई करें। भारतीय जनता पार्टी के लिए श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है। यह हमारी और हमारी पार्टी के लिए आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हुआ मामला है। चुनाव में इस मुद्दे पर लाभ प्राप्त करने का विषय नहीं है।

सवाल- 25 साल से अधिक समय का बीत गया लेकिन रामलला आज भी टाट में है और भाजपा के कई नेता ठाट में है? आखिर रामलला के अच्छे दिन कब आएंगे?

जवाब- रामलला का टाट के अंदर होना राम भक्तों को बहुत कचोटता है। इसके कारण राम भक्त आक्रोशित भी है, परंतु अभी मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। तत्कालिक रूप से समझौते का भी पक्षकारों के बीच में कोई रास्ता मेरी जानकारी में नहीं है। जब तक दो विकल्प सर्वोच्च न्यायालय और समझौते का बना हुआ है। तब तक संसद में कानून के माध्यम से मंदिर निर्माण के लिए आगे बढ़ना कि नहीं बढ़ना, इस पर राष्ट्रीय नेतृत्व और कानून के विशेषज्ञ अपने स्तर से विचार विमर्श कर रहे हैं।

सवाल- 25 नवंबर को लेकर अभी से दहशत का माहौल हो गया है? मिर्जापुर जैसे जनपद में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है?

जवाब- 25 नवंबर को अयोध्या में राम भक्तों की धर्म सभा को लेकर किसी को डरने और भयभीत होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन अयोध्या में जुटने वाले राम भक्तों को लेकर मुस्तैद है। सरकार की ओर से जो भी कदम उठाने हैं उठाए जा चुके हैं। सरकार की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंधक किए गए हैं।

सवाल- विपक्ष आरोप लगा रहा है कि आप तारीख बताने में असमर्थ हैं और इससे यह साफ झलकता है कि भाजपा केवल चुनाव के दौरान ही राम मंदिर का मुद्दा गरमाती है?

जवाब- श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर सपा, बसपा, कांग्रेस को राम भक्तों से कोई हमदर्दी नहीं है। भाजपा मंदिर निर्माण को लेकर प्रतिबद्ध है। यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि श्री राम लला की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के अतिरिक्त अब वहां बाबर के नाम पर मस्जिद स्मारक और मकबरा नहीं बनना है। अगर कोई इस गलतफहमी में है कि श्री राम लला को जन्मभूमि से हटा सकता है तो यह असंभव है। जब तक मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है तब तक भाजपा अथवा मंदिर निर्माण से जुड़े संगठन तारीख बताने का काम नहीं कर सकते हैं। फिर तारीख बताने का काम न भाजपा का है ना सरकार का। यह काम विश्व हिंदू परिषद और श्री राम जन्मभूमि न्यास तथा पूज्य साधु संतों और राम भक्तों का है। भारतीय जनता पार्टी इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन देती रहेगी।

loading...
Loading...

Related Articles