आरा में सज़ता है भूतो का मेला, लाखों लोग इसे अंधविश्वास नहीं बल्कि मानते हैं श्रर्द्धा

बिहार और मेलों का रिश्‍ता काफी पुराना हैं। यहां पर छोटे से लेकर बड़े तीज त्‍योहारों पर मेले का आयोजन होना सामान्‍य बात है। लोग यहां मेलों में काफी मस्‍ती करते हैं लेकिन क्‍या कभी आपने भूतों का मेला सुना है? शायद नहीं लेकिन यह सच है। भोजपुर जिले से महज़ 20 किलोमीटर दूर सिन्हा के समीप इटहना गांव में जहां अमा‍वस्या के दिन लगता है भूतों का मेला ।

शायद आप भी यह पढ़कर थोड़ी देर के लिए शॉक्‍ड हो रहे होंगे, लेकिन यह पूरी तरह से सच है। बिहार में कई जगहों पर लगता है भूतों का मेला लगता है। भोजपुर जिले से महज़ 20 किलोमीटर से दूर इटहना गांव में हर अमा‍वस्या को भूतों का मेला लगता है। अमा‍वस्या पर लगने वाले इस मेले में जिले के कई जगहों से लोग आते हैं। मेले में हजारों की संख्‍या में भीड़ होती है। जिन लोगों में भूत प्रेत की छाया है वे लोग यहां पर शामिल होते ही चिल्‍लाने लगते हैं। लोग काफी तेजी से झूमते और हाथ पैर पकड़ते हैं। कहा जाता है कि यहां पर इस मेले का मकसद लोगों को भूत प्रेत की छाया से मुक्ति दिलाने का है। पीड़ित लोगों को यहां पर परिक्रमा कराई जाती है।

यह मेला हर अमा‍वस्या को लगता है। वहीं इस भूतों के मेले को लेकर इटहना इलाके के कुछ लोगों का कहना है कि यहां पर इटहना बाबा की शक्ति है। वहीं कुछ लोग इसे महज अंधविश्‍वास करार देते हैं। मान्‍यता ये है कि यहीं पर इटहना के बाबा ने समाधि ली थी जिससे उनकी शक्‍ति से लोगों को भूत, प्रेत, डायन, चुड़ैल और ज़िन्न वाली परेशानियों से मुक्‍त किया जाता है।अंखिया दे द, नजरिया दे द, पावरवा दे द हो बाबा जी आहो, आहो: आरा शहर से बीस किलोमीटर कि दूरी पर स्थित इटहना ब्रह्म बाबा स्थान दिन के दस बजे थे। कई महिलाएं ब्रह्म बाबा स्थान पर बैठ जोर-जोर से सिर हिला रही थी। महिला के चारों तरफ घेर कर कुछ लोग बैठे हुए थे। पूछने पर पता चला कि जो महिला सिर हिला रही है, वह प्रेत बाधा से पीड़ित है। तभी वह महिला जयकारा लगाना शुरू कर देती है। आसपास बैठे लोगों में से एक व्यक्ति पूछता है के हऊ  सिर हिलाने वाली महिला भी कुछ बताती है। इसके बाद सवाल पर सवाल दागे जाते हैं तथा उसका जवाब पीड़ित महिला देती है।यह सिलसिला काफी देर तक चलता है। एक नहीं, बल्कि दर्जनों प्रेत बाधा से पीड़ित महिलाएं ऐसा ही कर रही थी लोगों के अनुसार कुछ प्रेत आत्माओं को यहीं पर बैठा भी दिया जाता है  । सच्चाई कुछ भी हो पर जिले के विभिन्न जगहों से आये लोगो के आस्था को देखकर ऐसा लगता है कि कुछ तो है |

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