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106 दिन में 26 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह सम्पन्न होना कीर्तिमान – श्री नाईक

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने राजभवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में विभिन्न वर्षों में आयोजित किये गये दीक्षांत समारोह की स्थिति तथा इनके सम्पादन की कुल अवधि के बारे में बताते हुये कहा कि शैक्षिक सत्र 2014-15 में 22 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों को 158 दिवस में सम्पन्न किये गये थे, वहीं शैक्षिक सत्र 2015-16 में 246, सत्र 2016-17 में 226 तथा सत्र 2017-18 में 253 दिनों तथा शैक्षिक सत्र 2018-19 में 26 विश्वविद्यालयों केे दीक्षांत समारोहों को 106 दिन में पूर्ण किया गया जो अपने आप में अब तक का एक कीर्तिमान है।
श्री नाईक ने कहा कि पूर्व में विश्वविद्यालयों में समय से दीक्षांत समारोह के आयोजन नहीं हो रहे थे। लखनऊ विश्वविद्यालय वर्ष 1921 में स्थापित हुआ था अर्थात स्थापना के 97 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं जबकि इस शैक्षिक सत्र 2018-19 में विश्वविद्यालय का 61वां दीक्षांत आयोजित किया गया है। इसी प्रकार कुछ अन्य विश्वविद्यालयों की स्थिति भी है। (1) महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी की स्थापना 1921 में हुई अर्थात स्थापना के 97 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं जबकि इस शैक्षिक वर्ष 2018-19 में विश्वविद्यालय का 40वां दीक्षांत समारोह, (2) डाॅ0 भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की स्थापना 1927 में हुई अर्थात स्थापना के 91 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं जबकि इस शैक्षिक वर्ष 2018-19 में विश्वविद्यालय का 84वां दीक्षांत समारोह, (3) चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की स्थापना 1965 में हुई अर्थात स्थापना के 53 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं जबकि इस शैक्षिक वर्ष 2018-19 में विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह, (4) छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की स्थापना 1966 में हुई अर्थात स्थापना के 52 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं जबकि इस शैक्षिक वर्ष 2018-19 में विश्वविद्यालय का 33वां दीक्षांत समारोह, (5) महात्मा ज्योतिबाफुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली की स्थापना 1975 में हुई अर्थात स्थापना के 43 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं जबकि इस शैक्षिक वर्ष 2018-19 में विश्वविद्यालय का 16वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह समय से सम्पन्न हुये है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान शैक्षिक सत्र 2018-19 के दौरान 24 अगस्त, 2018 से प्रारम्भ कर 08 दिसम्बर, 2018 के मध्य कुल 26 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह को 106 दिन में सम्पन्न किया गया है। दीक्षांत समारोह में कुल 12,78,985 विद्यार्थिंयों को विभिन्न पाठयक्रमों की उपाधियाँ वितरित की गई जिनमें से 7,14,764 अर्थात 56 प्रतिशत उपाधियाँ प्राप्त करने वालों में छात्राएं थी वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु प्रदान किये जाने वाले कुल 1,741 पदकों से 1,143 अर्थात 66 प्रतिशत पदक छात्राओं के हक में गये हंै। राज्यपाल ने गत वर्षों के दीक्षांत समारोह के आकड़े प्रस्तुत करते हुये बताया कि शैक्षिक सत्र 2015-16 के दौरान दीक्षांत समारोह में कुल 6,35,930 विद्यार्थियों को उपाधियाॅं वितरित की गई थी जिनमें 40 प्रतिशत छात्राएं थी किन्तु अपने प्रतिनिधित्व के कम होने के बावजूद कुल वितरित 1,196 पदकों में से 806 पदक अर्थात 67 प्रतिशत पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किये गये थे जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। शैक्षिक सत्र 2016-17 में कुल 15,60,375 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठयक्रमों की उपाधियाँ दीक्षांत समारोहों के अवसर पर वितरित की गई जिनमें 7,97,646 अर्थात 51 प्रतिशत उपाधियाँ छात्राओं को प्राप्त हुई हैं। जहां तक पदकों का सम्बन्ध है तो कुल 1,653 वितरित पदकों में से 1,085 अर्थात 66 प्रतिशत पदक छात्राओं द्वारा अर्जित किये गये हैं।
राज्यपाल ने कहा कि जुलाई 2014 में प्रदेश के राज्यपाल के पद की शपथ ग्रहण करते समय वे 25 विश्वविद्यालय के कुलाधिपति/कुलाध्यक्ष थे और आज 29 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु विशेष प्रयास किये है जिनमें विश्वविद्यालयों में शैक्षिक सत्रों का नियमितीकरण, नकलीविहीन परीक्षाओं का सम्पादन, दीक्षांत समारोह में अंग्रेजों के समय से चली आ रही हैट एवं गाऊन पहनने की परम्परा के स्थान पर भारतीय वेशभूषा में उपाधियाँ प्रदान करना तथा दीक्षांत समारोह का नियमित आयोजन किया जाना प्रमुख रूप से है। राज्यपाल ने कहा कि परीक्षाओं को नकलविहीन वातावरण में सम्पन्न कराना एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया गया। परीक्षा केन्द्रों एवं मूल्यांकन केन्द्रों पर आवश्यक निगरानी एवं अनुश्रवण की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगवाये गये। राज्यपाल ने बताया कि शैक्षिक वर्ष 2018-19 में उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों की संख्या 12,78,985 है जो सत्र 2017-18 में 15,60,375 थी अर्थात विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के स्थान पर 2,81,390 कम हुई। नकलविहीन परीक्षा के अभियान के परिणाम स्वरूप परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले छात्रों की संख्या में कमी आयी तथा उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी आयी है। नकलविहीन परीक्षा का अभियान काफी सफल हुआ है, इससे परीक्षाओं में शुद्धता का माहौल बना है। उन्होंने कहा कि नकलविहीन परीक्षा से निश्चित रूप से मेधावी छात्रों को लाभ मिलेगा।
श्री नाईक ने कहा कि शैक्षिक सत्र 2015-16 में विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियाँ प्राप्त करने वालों में 40 प्रतिशत छात्राएं थी जिसमें 16 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि के साथ शैक्षिक सत्र 2018-19 के दौरान 56 प्रतिशत छात्राओं ने उपाधियाँ हासिल की है। वहीं उत्कृष्टता को भी कम नहीं होने दिया है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में सम्पन्न हुये दीक्षांत समारोह में डाॅ0 भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में 85 प्रतिशत, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर 82 प्रतिशत तथा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी एवं छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में 81 प्रतिशत पदक छात्राओं द्वारा अर्जित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू किये गये ‘सर्व शिक्षा अभियान‘ तथा वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ‘ की ओर उठाये जा रहे कदमों का ही प्रतिफल है।
श्री नाईक ने कहा कि बेटियों के प्रति समाज का भी नजरिया बदला है और ‘बेटा-बेटी एक समान‘ की परिकल्पना साकार हो रही है और हर क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता निरन्तर बढ़ रही है जिसका मूल श्रेय विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थाओं को जाता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में यह आया बदलाव देश की तस्वीर बदलने में निर्णायक सिद्ध होगा। शैक्षिक सत्र के नियमित होने से समय से प्रवेश एवं परीक्षायें हो रही है तथा नियमित दीक्षांत समारोह का भी आयोजन हो रहा है। उनका मानना है कि समय से परिणाम घोषित हो और विद्यार्थियों को उपाध्यिाँ उपलब्ध करायी जा सके जिससे युवा वर्ग को आगे शिक्षा प्राप्त करने अथवा रोजगार प्राप्त करने में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि वे उत्तर प्रदेश में उभरते नये चित्र का स्वागत करते हैं।

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