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चन्द्रकला तो बहाना है, कई औरों पर निशाना है

अशोक सिंह विद्रोही /कर्मवीर त्रिपाठी
सोशल मीडिया में बेहद चर्चित और इमानदार कही जाने वाली आईएस अधिकारी बी चंद्रकला समेत कई अन्य लोगों के ठिकानों पर पड़े सीबीआई के छापे ने यूपी की सियासत को गरमा दिया है। सीबीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो सपा बसपा के प्रमुखों पर एजेंसी का दबाव पिछले एक हफ्ते से बना हुआ था। इसी प्रेशर टेक्टिस के चलते अखिलेश माया की मुलाकात तथा 37 – 37 सीटों के बंटवारे का शिगूफा मीडिया में उछाला गया। बीते शुक्रवार को अचानक बुआ- भतीजे का मिलना और फिर 24 घंटे के भीतर सीबीआई द्वारा दिल्ली से लेकर यूपी तक में मारे गए ताबड़तोड़ छापे अपने आप में बहुत कुछ कहते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद और अखिलेश सरकार में चर्चित मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति के बहाने सीबीआई आने वाले दिनों में कई बड़ी कार्यवाही करने की तैयारी में है।

सपा बसपा के सियासी गठबंधन की बुनियाद में सीबीआई के बहाने केंद्र और राज्य सरकार भ्रष्टाचार के जांचों के सहारे दबाव का मट्ठा डाल सकती है। पिछले डेढ़ दशक से सूबे की सत्ता पर काबिज रहे बसपा- सपा की सरकारों में हुए घोटालों की अच्छी खासी फेहरिस्त हैं । इन पर बैठी जांचों की आंच दोनों दलों के कई प्रमुख शख्सियतों को अपने लपेटे में ले सकती हैं।

सियासी पंडितों की मानें तो आम चुनाव से ठीक पहले दिल्ली और लखनऊ से जांचों के बहाने गठबंधन को घेरने की तैयारी शुरू हो गई है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में एनआरएचएम ,यूपीपीएससी भर्ती, रिवर फ्रंट ,यादव सिंह प्रकरण, स्मारक घोटाले जैसे तमाम मामलों की जांच में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि यह तमाम घोटाले सपा व बसपा कार्यकाल में हुए हैं। जिनकी जांच का जिन्न सीबीआई के पास है। जांचों की सुरू हुयी सियासत के बीच सत्ता के गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी में हलचल बढ़ गई है । सियासी कयास लगाए जा रहे हैं कि जांच के जिन्न से महागठबंधन में भगदड़ मचेगी या यह रिश्ता और मजबूत होगा। सियासी जानकारों का कहना है कि लगभग तीन दशकों से प्रदेश की सत्ता से कोसों दूर रही कांग्रेस को लेकर गठबंधन में नए समीकरण बन सकते हैं।

लोकसभा की 80 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश पीएम मोदी का चुनावी क्षेत्र भी है। केंद्र की सत्ता को दोबारा हासिल करने में लगी भाजपा किसी भी कीमत पर उत्तर प्रदेश में अपना प्रभाव बरकरार रखना चाहती है। सपा बसपा समेत अन्य दलों के महागठबंधन से बीजेपी को प्रदेश में खासा नुकसान होने की आशंका लंबे समय से सता रही है। यही वजह रही कि पिछले दिनों भाजपा प्रमुख अमित शाह ने गठबंधन पर चिंता जताते हुए इससे पार्टी को नुकसान होने की बात भी कही थी । हालांकि उन्होंने संभावित सपा -बसपा गठबंधन से निपटने के लिए पार्टी स्तर पर रणनीतियों में जरूरी बदलाव भी किए । गठबंधन समीकरणों के चलते बीजेपी यूपी में 50 फ़ीसदी मतों तक अपनी पहुंच बनाने की रणनीति पर चल रही है। सियासी गुणा गणित के मुताबिक साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 42 . 6 फ़ीसदी, सपा को 22 फ़ीसदी और बसपा को 20 फ़ीसदी मत मिले थे। वहीं कांग्रेस को महज 7.5 फ़ीसदी मतों के साथ संतोष करना पड़ा था।

हलाकि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा व बसपा दोनों को ही 22-22 फ़ीसदी मत मिले थे। दोनों को अगर मिला लिया जाए तो यह आंकड़ा 44 फ़ीसदी का हो जाता है। वहीं सूबे में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयी बीजेपी को 39 . 6 फ़ीसदी लोगों ने पसंद किया था । इन्हीं सियासी आंकड़ों के चलते भाजपा के चाणक्य 50 फ़ीसदी मतों के जुगाड़ में लगे हैं। पार्टी बखूबी जानती है कि अगर सपा -बसपा का महागठबंधन हो गया तो 44 फ़ीसदी के आसपास का सियासी आंकड़ा भाजपा के मिशन 2019 में पलीता लगा सकता है। इन्हीं वजहों के चलते ऐसा माना जा रहा है कि मोदी और योगी सरकार ने सीबीआई के तोते के बहाने छापामार अभियान चलाकर गठबंधन के रथ को रोकने की कोशिश की है।

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