भाजपा से आखिर क्यों न मोहभंग हो सामान्य वर्ग का

शिवतेज त्रिपाठी
एससी एसटी एक्ट के घाव पर 10% आरक्षण के मरहम से मिशन 2019 फतेह कैसे
आखिर जातिगत आरक्षण कब तक-आर्थिक आधार पर आरक्षण कब
गाजियाबाद।देश की आजादी से अब तक उपेक्षा का दंश झेल रहा सामान्य वर्ग कांग्रेसी  सरकारें जितनी बार भी देश में आई उन सब ने सामान्य वर्ग के वोट को अपनी बपौती  समझ कर प्रयोग किया सरकार बनने पर दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया फिर जातिगत राजनीति के तहत दलितों अल्पसंख्यक को आरक्षण का लॉलीपॉप नित नई योजनाओं की सौगात देकर सामान्य वर्ग पर अत्याचार अनाचार करने का अधिकार दिया इसके बावजूद सामान्य वर्ग जुर्म सहता रहा लेकिन फिर भी उफ़ तक न कर सका लेकिन इसी बीच जनसंघ की स्थापना के दौरान सामान्य वर्ग को एक उम्मीद की किरण तो दिखी लेकिन वह भी ज्यादा दिन न टिक सकी उम्मीद टूटी लेकिन एक बार फिर देश का सर्वमान्य नेता भारत रत्न पंडित अटल बिहारी बाजपेई की अगुवाई में हुए राम मंदिर आंदोलन के दौरान एक विश्वास जगा की सामान्य वर्ग के लिये आने वाला समय जातिगत राजनीति से हटकर कोई एक नेता ऐसा आया है।जो जातिगत आरक्षण को खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था करेगा जिसे आम जनमानस को भी सम्मान से जीने का अधिकार मिलेगा परंतु लूली लंगड़ी सरकारों जातिगत दलगत राजनीति के दलदल में फंसे कुछ चंद नेताओं ने अटल जी की सरकार को गिराकर सामान्य वर्ग में एक भय जैसा माहौल बनाया लेकिन उन हालातों में भी सामान्य वर्ग ने अटल जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा को ताकत दी भाजपा कि केंद्र में सरकार बनवाई लेकिन किस्मत ने सामान्य वर्ग को वहां भी धोखा ही दिया अन्य अन्य दलों से गठबंधन होने की मजबूरी के चलते अटल जी ने सामान्य वर्ग के सपने को पूरा नहीं कर पाए जब पुनः कांग्रेस की सरकार आई तो भी अटल जी ने सामान्य वर्ग को समय-समय पर आगाह करते रहे की एकमात्र हिंदुस्तान की ऐसी पार्टी भाजपा है जो सामान्य वर्ग को जीने का अधिकार देगी जातिगत आरक्षण खत्म करेगी आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करेगी इस विश्वास के साथ जबकि भाजपा की मोदी सरकार ने भी सामान्यवर्ग व  बहुसंख्यक समाज की अपेक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी चुनावी वर्ष में आरक्षण का मरहम लगाकर एससी एसटी एक्ट पर दिए गए घाव को कैसे भरेगी मोदी सरकार जबकि सामान्य वर्ग ने बढ़-चढ़कर तन मन धन से भाजपा को एक बार  कर दिल्ली की कुर्सी तो शौप दी परंतु दिल्ली की कुर्सी पर बैठे फुल पावर प्रधानमंत्री मोदी जी ने सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला पलट कर वोट के खातिर सामान्य वर्ग की पीठ में एससी एसटी नाम के खंजर को घोपने का काम कर बैठे जिसकी नाराजगी का के परिणाम अभी हाल में हुए कई प्रदेशों में विधानसभा चुनाव में उनको एहसास करा गए कि तुम लाख चिल्लाओ कि तुम दलित के हो तुम अल्पसंख्यकों के हो लेकिन वह कभी तुम्हारा सपना पूरा नहीं कर सकते तुम्हारी पहचान  तिलक तराजू और तलवार से है।जिसको लेकर एक नहीं सैकड़ों मंचों से सामान्य वर्ग ने गालियां सुनी है।इनके साथ यह अन्याय उन हालातों में जब सामान्य वर्ग के लोग गरीबी का दंश झेल रहे है।बेरोजगारी अशिक्षा लाचारी मजबूरी जहाँ एक ओर तो गरीब गरीब होता जा रहा है।और अमीर अमीर होता जा रहा है।आईएएस का बेटा आईएएस बन रहा है लेकिन किसान का बेटा ढंग की शिक्षा भी नहीं पाता दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो उन हालातों में जानवरों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर कर दिया विधानसभा चुनाव में मिली जबरदस्त हार की हड़बड़ा हट में अपने 10 प्रतिशत आरक्षण का मरहम तो लगा दिया लेकिन यह नाकाफी साबित होगा इतने बड़े बहुसंख्यक समाज में कुछ करना ही चाहते थे कुछ सोच ही लिया था कुछ मन ही बनाया था तो क्यों न जातिगत आरक्षण खत्म कर हिंदुस्तान के सभी वर्गों सभी जातियों सभी धर्मों का सम्मान करते हुए आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू कर विश्व के मानचित्र पर भारत के स्वर्णिम इतिहास लिख देते यह मेरे व्यक्तिगत विचार नहीं यह सामान्य वर्ग व बहुसंख्यक वर्ग में जीने वाले आम नागरिक की इच्छा भी प्रतीत होती है।
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