लखनऊ मेट्रो ने शुरू किए सिग्नलिंग और इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रायल्स

लखनऊ। लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) ने शनिवार से ट्रांसपोर्ट नगर और चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशनों के बीच सफलतापूर्वक सिग्नलिंग और इंट्रीग्रेटड टेस्टिंग ट्रायल्स की शुरुआत कर दी है। इस उपलब्धि के साथ ही, लखनऊ मेट्रो ने सीसीएस एयरपोर्ट और मुंशीपुलिया के बीच 22.878 लंबे संपूर्ण उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर (फ़ेज़ 1-ए) के परिचलान की दिशा में एक और मील का पत्थर पार कर लिया है।
इंटीग्रेटेड टेस्टिंग और ट्रायल्स, मेट्रो ट्रेनों के सुगम परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं और इनके अंतर्गत सिग्नलिंग, टेलिकम्यूनिकेशन, ट्रैक और ट्रैक्शन सिस्टम से संबंधित परीक्षण किए जाते हैं।
लखनऊ मेट्रो के रोलिंग स्टॉक्स, अत्याधुनिक कम्युनिकेशन आधारित ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (सीबीटीसी) और ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम्स से लैस हैं। एटीपी के अंतर्गत ऑटोमैटिक ब्रेकिंग प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जाता है कि ट्रेनों की भिड़ंत या इस तरह की अन्य कोई दुर्घटना न हो। इसके अतिरिक्त, ऑटोमैटिक ट्रेन सुपरविज़न सिस्टम की मदद से ट्रेनों की आवाजाही की पल-पल निगरानी होती है और ऑटोमैटिक प्रणाली के माध्यम से ही ट्रेनों के रूट तय किए जाते हैं। परिचालन के दौरान किसी भी तरह की समस्या आने पर ट्रेनों के मूवमेंट या आवाजाही को नियंत्रित भी किया जाता है।
इंटीग्रेटेड सिग्नलिंग ट्रायल्स के दौरान एटीपी और सीबीटीसी से संबंधित सभी पहलुओं की जांच होगी। सिग्लनिंग टेस्टिंग को इंटरनैशनल इंडीपेंडेंट सेफ़्टी ऐसेसर (आईएसए) द्वारा सत्यापित भी किया जा रहा है।
लखनऊ मेट्रो की ट्रैक और ट्रैक्शन टीम पहले ही रेकॉर्ड समय में अपना कार्य पूरा कर चुकी है। एलएमआरसी के भूमिगत और टनल सेक्शन्स में ट्रेनों के परिचालन के लिए आवश्यक करंट की सप्लाई के लिए रिजिट ओवरहेड उपकरण लगाए गए हैं। डायमंड क्रासिंग पर इस अत्याधुनिक रिजिट ओएचई का प्रयोग लखनऊ मेट्रो में पहली बार सीसीएस एयरपोर्ट स्टेशन के नज़दीक हुआ है, जिसके माध्यम से ट्रेन एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाएगी। यह सिस्टम दुनिया में चुनिंदा मेट्रो परियोजनाओं में ही मौजूद है।
आज सुबह बजे एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमाक केशव ने ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो स्टेशन पर पूजा की, जिसके बाद ट्रायल्स का शुभारंभ हुआ। एलएमआरसी के सभी निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौक़े पर मौजूद रहे।
इस अवसर पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कुमार केशव ने कहा, “मैं इस उपलब्धि और जीत के लिए सभी कर्मचारियों को बधाई देता हूं।” एलएमआरसी के सहयोगी कॉन्ट्रैक्टर की पूरी ट्रैक्शन टीम, एलएमआरसी इंजीनियरों और जनरल कन्सलटेन्ट एजेंसी ने इस सेक्शन में ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम को सफलतापूर्वक शुरू करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की ।
हाल ही में, 9 जनवरी को एलएमआरसी ने मुंशीपुलिया तक बैलेंस सेक्शन में सिग्नलिंग और इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रायल्स की शुरुआत की थी। सिग्नलिंग और इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रायल्स के पूरे होने में लगभग 4-5 हफ़्तों का समय लगेगा।

=>