सीटों के बटवारे के साथ गठबंधन का एलान

अशोक सिंह विद्रोही /कर्मवीर त्रिपाठी
लखनऊ। तमाम सियासी अटकलों पर 38 -38 सीटों के बंटवारे की घोषणा के पूर्ण विराम के साथ सपा बसपा गठबंधन का विधिवत एलान राजधानी के ताज होटल में बसपा सुप्रीमो मायावती तथा सपा मुखिया अखिलेश यादव ने संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान किया। बसंत के आगमन से ठीक पहले दोनों दलों के मुखिया ने दोस्ती का प्रतीक पीले रंग वाले गुलदस्ते एक दूसरे को देखकर भविष्य में भाजपा की नींद हराम करने की कस्मे भी खायी।

अपने से बेगाने बने चाचा शिवपाल और दो साल पहले के दोस्त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तय स्क्रिप्ट के तहत मायावती ने अपने 23 मिनट की पत्रकार वार्ता के दौरान कयी बार हमला बोला। वहीं सात मिनट के संक्षिप्त बयान के दौरान अखिलेश के हिस्से की पटकथा में भाजपा द्वारा जाति के नाम पर नफरत फैलाने समेत बुलेट ट्रेन के जरिए गुजरात के हीरा व्यापारियों को लाभ पहुंचाने का जिक्र अहम रहा । संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा तथा सपा से राष्ट्रीय सचिव अभिषेक मिश्रा ने प्रबंधन की कमान संभाल रखी थी।

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन का साक्षी रहा ताज होटल एक बार फिर शनिवार को सियासी गलियारों की सुर्खियों में रहा। जगह और महीना वही था बस सियासी किरदार बदल गए । साल 2017 में 29 जनवरी के गठबंधन में सपा ने कांग्रेस के हाथों को थामते हुए यूपी को साथ पसंद है का नारा दिया था। हलाकि यह गठबंधन प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा और राहुल अखिलेश के फ्रेंड लिस्ट से लेफ्ट हो गए। हालिया आम चुनाव 2019 में मोदी अगेन के रथ को रोकने के लिए एक बार फिर देश की सियासी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर महागठबंधन और गठबंधन का प्रयोग आजमा रही हैं । जिसमें सपा – बसपा ने चुनावी गठबंधन तथा सीटों के ऐलान के साथ बाजी मार ली है।

सपा बसपा गठबंधन को 38 -38 सीटें तथा रायबरेली व अमेठी की दो सीटें कांग्रेस के लिए और सहयोगी दलों के लिए भी दो सीटें देने का ऐलान गठबंधन की प्रेस वार्ता के दौरान कर दिया गया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने 23 मिनट के भाषण की शुरुआत दलितों के मसीहा बाबा साहब अंबेडकर तथा समाजवादी विचारक डॉ राम मनोहर लोहिया के जिक्र के साथ किया । उन्होंने कहा कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गुरु- चेला की नींद उड़ाने वाली है।

संयुक्त प्रेसवार्ता को ऐतिहासिक बताते हुए मायावती ने साल 1993 में कांशीराम और मुलायम के नेतृत्व में लड़े गए चुनावों की यादों का जिक्र करते हुए सरकार बनाने और फिर कुछ गंभीर कारणों से सरकार न चल पाने की बात कही। पीएम मोदी द्वारा पिछले दिनों आगरा में साल 1995 में स्टेट गेस्ट हाउस कांड के मुद्दे को हवा देने वाले बयान पर जवाबी हमला करते हुए मायावती ने गठबंधन को 2 जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड से ऊपर रखते हुए देश व जनहित के लिए जरूरी बताया। गरीब, किसान, नौजवानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश की सवा सौ करोड़ जनता से भाजपा ने चुनावी वादा खिलाफी की है। जनता सरकार के तानाशाही और अहंकार से दुखी है। सर्व समाज की जन भावनाओं की कद्र के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान सीटों के बंटवारे समेत चाचा शिवपाल यादव को भाजपा की बी पार्टी होने जैसे मुद्दों पर मायावती ही बोली । शिवपाल पर निशाना साधते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपा ने शिवपाल यादव पर पानी की तरह पैसा बहाया है जो बेकार जाएगा । उन्होंने नोटबंदी तथा जीएसटी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर प्रहार किया ।

कांग्रेस को गठबंधन से दूर रखने की वजह को भी गिनाते हुए उन्होंने कहा कि काग्रेस आजादी से लेकर लंबे समय तक सत्ता में रही लेकिन देश में गरीबी, बेरोजगारी तथा भ्रष्टाचार घटने के बजाऐ बढे।सपा-बसपा जैसे पार्टीयों का गठन तभी हुआ।रक्षा सौदो पर कांग्रेस भाजपा दोनो ने ही घोटाले किये हैं।
उन्होंने कहा कि सपा-बसपा को कांग्रेस के साथ जाने से कोई खास फायदा होने वाला नहीं है। हमनें अपने अनुभव को ही तरजीह दी है। कांग्रेस के साथ जाने से हमारे वोट शेयर पर बुरा असर पड़ता है।बसपा सुप्रीमो ने कहा कि अगर हम इनके साथ नहीं जाते हैं तो हमारे पास वोट का शेयर ज्यादा रहता है। लिहाजा हमनें इस वजह से कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखा है।

मायावती ने कहा कि बोफोर्स की वजह से कांग्रेस की सरकार गयी थी, अब राफेल की वजह से बीजेपी की सरकार जाएगी।

उन्होंने कहा कि यूपी में बीजेपी ने बेइमानी से सरकार बनाई है। बीजेपी की अहंकारी सरकार से लोग परेशान है। जैसे हमने मिलकर उपचुनावों में बीजेपी को हराया है, उसी तरह हम लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराएंगे।

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने सात मिनट के बयान के दौरान कहा कि भाजपा के अहंकार का विनाश करने के लिए सपा-बसपा का मिलना जरूरी था। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन के लिए अगर दो कदम पीछे भी हटना पड़ा तो हम करेंगे। आज से सपा का कार्यकर्ता यह गांठ बांध ले कि मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा। अखिलेश ने कहा कि समाजवादियों की विशेषता होती है कि हम दुख और सुख के साथ होते हैं। बीजेपी द्वारा दंगा-फसाद भी कराया जा सकता है। लेकिन हमें संयम और धैर्य से काम लेना है। उन्होंने कहा कि मैं मायावती जी के इस निर्णय का स्वागत करता हूं। मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के सवाल पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने हमेशा प्रधानमंत्री दिया है।मैं चाहूंगा कि इस बार भी यूपी से प्रधानमंत्री मिले।
[अखिलेश यादव ने कहा कि मायावती पर बीजेपी नेताओं ने अशोभनीय टिप्पणियां की। इन नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी बल्कि उन्हे सरकार में सामिल भी किया गया । अखिलेश का इसारा योगी सरकार में मन्त्री स्वाती सिंह के पति दयाशंकर सिंह की ओर था।इस पर सपा मुखिया ने कहा कि मैं बता देना चाहता हूं कि मायावतीजी का सम्मान मेरा सम्मान है उनका अपमान मेरा अपमान है।

क्या कहा लोगों ने—
कांग्रेस ने समान विचारधारा के सभी दलों को साथ लेने की मंशा हमेशा से रखी है ।हमारी पार्टी यूपी समेत नौ राज्यों में गठबंधन पर काम कर रही है। गठबंधन न होने की दशा में हमने सभी 80 सीटों पर तैयारी भी की है। मायावती जी को देखना चाहिए कि बोफोर्स सौदे पर अदालत का निर्णय क्या रहा है वहीं राफेल के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार फस चुकी है।
प्रदीप सिंह
प्रवक्ता, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

बिकने और बेचने का काम देश में मायावती ही करती हैं । यह जग जाहिर है कि वह जिला पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक के टीकटों का सौदा करती हैं। उन्हीं के पार्टी को अलविदा कहने वालों ने इसे कई बार साबित भी किया है। हमारे मुखिया शिवपाल सिंह यादव मर्द है। रिश्ते निभाने के लिए जाने जाते हैं ।उनके राजनीतिक जीवन में भ्रष्टाचार के एक भी दांग नहीं लगे हैं। उनमें मजबूत प्रशासनिक क्षमता है। जमीनी स्तर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव के समाजवादी विचार को शिवपाल जी ही सही मायनों में साकार कर सकते हैं ।
अजय त्रिपाठी (मुन्ना)
महानगर अध्यक्ष , प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया)

क्या था गेस्ट हाउस कांड
1993 में सपा बसपा गठबंधन के बाद मुलायम सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने। मगर जून 1995 में तालमेल सही न बैठ पाने पर बसपा ने गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर दी। अब मुलायम सिंह अल्पमत हो गए। सरकार बचाने के लिए सपाई आपा खो बैठे। समर्थन वापसी से भड़के सपा कार्यकर्ता लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां कमरा नंबर 1 में मायावती रुकी हुई थीं। सपा कार्यकर्ताओं ने कमरे को घेर लिया और हथियारों से लैस लोगों ने मायावती को गंदी गालियों समेत जाति सूचक शब्द कहे। इतना ही नहीं बसपा के कार्यकर्ताओं सहित विधायकों पर भी हमला कर दिया था।

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