छापे के बाद आईएएस अफसर बी.चंद्रकला की कविता सोशल मिडिया पर मचा रही धूम

नई दिल्ली: अपने तेवर को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाली यूपी कैडर की आईएएस अफसर बी.चंद्रकला इस बार खनन घोटाले को लेकर भारी भरकम चर्चा में हैं। अवैध खनन मामले में सीबीआइ जांच में फंसी चंद्रकला ने पहली बार सीबीआई की छापेमारी पर चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया पर हमेशा सक्रिय रहने वाली यूपी कैडर की आईएएस चंद्रकला ने अपने लिंकडेन अकाउंट पर एक कविता पोस्ट की है, जिसमें अंत में उन्होंने सीबीआइ की छापेमारी को चुनावी छापा बताया। उन्होंने लिखा, ‘जीवन के रंग को क्यों फीका किया जाए।’ आपको बता दें कि ऐसे ही कतिपय मामलों में प्रवर्तन निदेशालय ने समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को भी नामजद कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
उधर खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय ने हमीरपुर के जिलाधिकारी से मांगा खनन का ब्यौरा मांग लिया है। सूत्रों की मानें तो ईडी ने हमीरपुर के वर्तमान जिलाधिकारी से 2012 से 2016 के बीच हुए खनन पट्टों का पूरा ब्यौरा मांगा है। इस मामले में पूछताछ के बाद अगर किसी अन्य का नाम सामने आता है तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।
दरअसल, यूपी में अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआइ ने पांच जनवरी को चंद्रकला के ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआइ ने चंद्रकला के लखनऊ स्थित घर पर करीब दो घंटे तक छापेमारी की। समाजवादी पार्टी सरकार के पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान चंद्रकला बुलंदशहर, हमीरपुर, मथुरा, मेरठ और बिजनौर की डीएम रहीं हैं। चंद्रकला पर गतल तरीके से खनन पट्टे जारी करने का आरोप है।


इस पूरी कार्रवाई के बाद अब चंद्रकला द्वारा लिंक्डइन अकाउंट पर पोस्ट की गई कविता का चारों ओर जिक्र हो रहा है।
उन्होंने शायराना अंदाज में सीबीआइ की कार्रवाई को चुनावी छापा करार दिया। उन्होंने अपनी कविता में लिखा,
रे रंगरेज़ ! तू रंग दे मुझको ।।
रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
फलक से रंग, या मुझे रंग दे जमीं से,
रे रंगरेज़! तू रंग दे कहीं से ।।
छन-छन करती पायल से,
जो फूटी हैं यौवन के स्वर;
लाल से रंग मेरी होंठ की कलियाँ,
नयनों को रंग, जैसे चमके बिजुरिया,
गाल पे हो, ज्यों चाँदनी बिखरी,
माथे पर फैली ऊषा-किरण,
रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
यहाँ से रंग, या मुझे रंग दे, वहीं से,
रे रंगरेज़ तू रंग दे, कहीं से ।।
कमर को रंग, जैसे, छलकी गगरिया,
उर,,,उठी हो, जैसे चढ़ती उमिरिया,
अंग-अंग रंग, जैसे, आसमान पर,
घन उमर उठी हो बन, स्वर्ण नगरिया।।
रे रंगरेज़ ! तू रंग दे मुझको,
सांस-सांस रंग, सांस-सांस रख,
तुला बनी हो ज्यों , बाँके बिहरिया,
रे रंगरेज़ ! तू रंग दे मुझको।।
पग- रज ज्यों, गोधुली बिखरी हो,
छन-छन करती नुपूर बजी हो,
फाग के आग से उठती सरगम,
ज्यों मकरंद सी महक उड़ी हो।।
रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
खुदा सा रंग , या मुझे रंग दे हमीं से,
रे रंगरेज़ तू रंग दे , कहीं से।।
पलक हो, जैसे बावड़ी वीणा,
कपोल को चूमे, लट का नगीना,
तपती जमीं सा मन को रंग दे,
रोम-रोम तेरी चाहूँ पीना।।
रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
बरस-बरस मैं चाहूँ जीना ।। :: बी चंद्रकला ,,आई ए एस।।
,,चुनावी छापा तो पडता रहेगा,,लेकिन जीवन के रंग को क्यों फीका किया जाय ,,दोस्तों।
आप सब से गुजारिश है कि मुसीबते कैसी भी हो , जीवन की डोर को बेरंग ना छोडे ।।

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