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अन्नाद्रमुक बीजेपी से गठबंधन के लिए तैयार नहीं – किंतु मजबूर

चेन्नई ब्यूरो से डॉक्टर आर.बी. चौधरी
चेन्नई (तमिलनाडु)। भारतीय जनता पार्टी जहां लोकसभा चुनाव के लिए नए दलों के साथ- साथ नए चेहरों खोज रहा है,वहीं नए -पुराने सहयोगी पार्टियों को शामिल करने की पुरजोर कोशिश में दिन-रात लगा हुआ है। इस हालात में कई सहयोगी पार्टियों के विरोधाभासी बयान आने लगा है। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक बीजेपी की सहयोगी पार्टी होते हुए भी गठबंधन से अपनी असंतुष्टि एवं असहमति जताई है।जिससे अभी तक कोई भी पार्टी गठबंधन संबंधी स्पष्ट निर्णय खुलकर सामने नहीं आ सका है। इस असहमति के लिए अन्नाद्रमुक के कुछ वरिष्ठ नेताओं का बीजेपी के रवैये से उत्पन्न असंतोष को मुख्य कारण बताया जा रहा है।अब तक तमिलनाडु मेंगठबंधन के लिए कोई भी जोड़ीदार नहीं मिल पाया है।

एक वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ता के अनुसार बीजेपी के नेताओं द्वारा अन्नाद्रमुक के रिश्ते में जो मिठास आनी चाहिए,वह नहीं आ पाया क्योंकि अन्नाद्रमुक अनदेखा किया जाता रहा है। इससे पार्टी अस्मिता और सम्मान का मामला कार्यकर्ताओं को दुखित कर रहा है जिससे अभी तक गठबंधन का सटीक रूप रेखा नहीं बन पाया है। लोकसभा उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और पूर्व मंत्री तथा अन्नाद्रमुक प्रवक्ता सी. पोन्नयन ने कई बार विरोधात्मक टिप्पणी करने में संकोच नहीं करते जो गठबंधन के भविष्य के लिए एक व्यवधान है। हालांकि,भाजपा महासचिव (तमिलनाडु प्रभारी) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस मामले में खुद कहा है कि तमिलनाडु में भाजपा गठबंधन के साथ सभी समान विचारधारा के पार्टियों लिए सभी रास्ते रास्ते खुले हुए है और बीजेपी स्वागत के लिए तैयार है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरलीधर राव ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व के अनुसार उनकी पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 जनवरी को अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं से हुई बातचीत के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अन्नाद्रमुक नेता शुरू में हाथ मिलाने के इच्छुक थे किंतु अब वे दूसरी बात कर रहे हैं जो यह ठीक नहीं है। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता पोन्नैयन ने बताया कि जीएसटी से तमिलनाडु के आवाम काफी में असंतोष है और हमारे युवाओं को लगता है कि गरीबी उन्मूलन के लिए भाजपा संस्कृत और हिंदी को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को नजर अंदाज किया है। कावेरी जल और मुल्लापेरियार बांध से लेकर कृषि विकास के मामलों पर केंद्र के रवैया से उनकी पार्टी में खुश नहीं है। बीजेपी शासित केंद्र सरकार का व्यवहार तानाशाह जैसा रहा है।

संतुष्टि के मामले को लेकर उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार संपन्न लोगों के लिए सब कुछ करता है।इसलिए तमिलनाडु में अल्पसंख्यक और कमजोर तबके के लोग नाराज हैं। हमारी पार्टी का अस्तित्व प्रभावित हुआ है। इसलिए बीजेपी के साथ गठबंधन हमें अच्छाई और फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। खाकी , गठबंधन की संभावना पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि अन्नाद्रमुक कम से कम 30 सीटों पर चुनाव लड़ने और बाकी सीटों को संभावित पर छोड़ने के लिए विचार कर सकती है।

एस. रामदॉस, अभिनेता विजयकांत की डीएमडीके और दलित पार्टी पुथिया तमिझगम के नेतृत्व में पीएमके जैसे साझेदार पार्टियों को साथआने की संभावनासे इनकार नहीं किया जा सकता। सूत्रों के अनुसार पीएमके का प्रभाव पूरे राज्य में बहुत तेजी से फैल रहा है। अन्नाद्रमुक द्वारा भाजपा से दूरी बनाकर दबाव बनाने की बात पूछने पर उन्होंने बताया कि डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए पीएमके के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। फिर भी,मतभेदों से भरी अनेक विसंगतियों एवं मौजूदा मतभेदों के बाद डीएमके के साथ सीटों के बंटवारे समझौते हो सकते हैं। इसलिए अन्नाद्रमुक इस चुनौती से सामना करने के लिए बीजेपी से हाथ मिलाना एक मजबूरी है।

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