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क़ानून का पालन नहीं कर , सरकार की छवि को ख़राब कर रही बिहार पुलिस !

 नाम के चक्कर में पुलिस ,आम लोगों को कर रही परेशान ,सरकार का करोड़ों  क्षति

>> सुलभ न्याय और सुधार के लिए किया गया हैं परिवर्तन ,अनुपालन वैधता- अपर मुख्य सचिव

>> आम सर्वे के बाद सरकार ने बीते 30 जुलाई 2018 को सख्त कानून में किया था परिवर्तन

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । न्याय संहिता सबके लिए समान हैं ,और इसका सम्मान ,हमारी व्यवस्था में मजबूती प्रदान करती हैं । लेकिन जब कानून के पालनकर्ता ही कानून का अनदेखी करने लगे तो सरकार की छवि तो खराब होती ही हैं समाज को भी शोषण का शिकार होना पड़ता हैं ।कुछ इसी अंदाज में बिहार पुलिस ,कानून का पालन नहीं कर सरकार की छवि खराब करने में कमर कसे हुई हैं । आम सर्वे के बाद बिहार सरकार ने 30 जुलाई 2018 को बिहार मद्धनिषेद और उत्पाद अधिनियम -2016 में परिवर्तन कर सुलभ और सरल तो बना दिया लेकिन सुलभ न्याय से आज भी आम लोग जहां वंचित है वहीं सरकार का करोड़ों क्षति हो रहा हैं ।

शराब सेवन हैं अपराध लेकिन जमानतीय

सरकार ने बिहार मद्धनिषेद और उत्पाद अधिनियम – 2016 पारित कर राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दिया ।शराब का उत्पादन, तस्करी और सेवन पर पूर्णत:  रोक हैं । इसे प्रभावकारी बनाने के लिए सख्त कानून बनाया गया हैं और सख्त सजा का प्रावधान रखा गया । शराब मामले में जमानत का प्रावधान तक नहीं था। शराबबंदी  बाद -अवैध शराब निर्माण ,शराब की तस्करी और शराब सेवन में लाखों एफआईआर हुई ,लाखों लोग जेल गये । एस समय ऐसा आया की बिहार के जेलों में कैदियों के कुल संख्या में 80% लोग शराब के अपराध में कैद रहे ।जेल की निर्धारित क्षमता से 8 गुणा अधिक। सरकारी आकड़े की माने तो 51 % लोग शराब सेवन ,शराब तस्करी में 33.26 % जेल जाते हैं । 
      बुद्धिजीवी समाज ,राजनीतिक दलों ने शराबबंदी पर बनाएं गये सख्त कानून और सजा की आलोचना करना शुरू कर दिया तो बिहार सरकार ने आम सर्वे कर 30 जुलाई 2018 को बिहार मद्धनिषेद और उत्पाद अधिनियम 2016 में परिवर्तन किया । इसमें धारा-64 ( सामूहिक जुर्माना ) को विलोपित ( खत्म )कर दिया गया एवं धारा -66 ( कुख्यात या आदतन अपराधियों के निष्कासन)  जैसे सख्त सजा को समाप्त कर दिया । वहीं धारा 76 की उपधारा (1 ) अवैध शराब सेवन में परिवर्तन किया गया ।इसमें उल्लेखित किया गया की कोई भी पहली बार शराब सेवन करते हुये पकड़ा जाता हैं तो उक्त अपराध ,धारा 54 के अधिन जमानतीय होगा । सरकार ने उक्त तिथि 30 जुलाई 2018 से लागू कर दिया ।

जमानत नहीं ,सीधे भेजा जा रहा जेल

पहली बार अवैध शराब सेवन करने पर जमानत देने का प्रावधान तो सरकार ने बना दिया लेकिन पुलिस इसका अनुपालन नहीं कर रही हैं ,और सीधे जेल भेज देती हैं । जबकि सरकारी आकड़े के अनुसार 51 % लोग शराब सेवन के आरोप में गिरफ्तार हो जेल जा रहे हैं । इसमें आधे से अधिक लोग पहली बार शराब सेवन के आरोपी रहते हैं । जेल से जमानत पाकर छूटने की प्रक्रिया में एक सप्ताह लगना लाजमी हैं ।वहीं आरोपी को जमानत पाने के लिए कम से कम 2 हजार रूपये खर्च होता हैं । 5-6 दिन आरोपी जब जेल में रखता हैं तो उसके खाने पर सरकार को 500 रूपये खर्च होता हैं । इसके अलावा आरोपी को कोर्ट में पेशी करना और फिर जेल भेजने में भी सरकार को खर्च करना पड़ता हैं ।इस तरह देखा जाएं तो पहली बार शराब सेवन पर पुलिस द्वारा जमानत नहीं देने के कारण आम आरोपियों का खर्च तो हो ही रहा है, सरकार के खजाने से भी करोड़ों रूपये की क्षति हो रही हैं ।

कानून का पालन ,हर संभव में करें पदाधिकारी -अपर मुख्य सचिव

मद्धनिषेद और उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव  सह गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहां की शराबबंदी से समाज में सकारात्मक असर हुआ हैं । बिहार मद्धनिषेद और उत्पाद अधिनियम -2016 के धाराओं में परिवर्तन समाज हित के लिए सरकार ने किया हैं । पहली बार शराब सेवन के आरोप में पकड़े जाने पर जमानत का प्रावधान ,कानून में बनाया गया हैं । इसका अनुपालन ,वैधता है।अगर पदाधिकारी ,धारा 37 की उपधारा (1) ( पहली बार शराब सेवन)  में जमानत नहीं दे रहे है तो यह बड़ी लापरवाही हैं ।  इसे दूर करने के दिशा में कार्रवाई की जाएगी और जमानतीय धारा का अनुपालन होगी ।
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