उत्तर प्रदेश

हरदोई- गांव गांव गन्ने का रस बेच कर परिवार का भरण पोषण कर रही लक्ष्मी

बिलग्राम हरदोई – पढ़ने लिखने की उम्र में गरीबी की बेडिंयो ने इस कदर जकड़ा कि स्कूल छोड़ कर कमाने निकल पडी लक्ष्मी बिलग्राम के अन्तर्गत ग्राम गनीपुर की रहने वाली। लक्ष्मी मौजीलाल की तीसरे नंबर बेटी है पांच बहन एक भाई और माता पिता को मिलाकर परिवार में कुल आठ सदस्य हैं लक्ष्मी के इकलौते भाई की उम्र अभी पांच वर्ष है लक्ष्मी से दो बहन बडी़ है मौजी लाल गांव में ही लोगों के यहां मेढ मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता रहा लेकिन महंगाई के इस दौर में आठ सदस्यों का खर्च उठाना वो भी मजदूरी से सब के बस की बात न थी ऐसे में बहनों को यही चिंता सताती कि काश हमारा भी बड़ा भाई होता तो हमारे पिता जी को शायद इतनी मेहनत न करनी पडती लक्ष्मी की दोनों बड़ी बहनें थोड़ी बहुत शिक्षा हासिल कर कई साल पहले ही घर के कामकाज में मां का हांथ बटाने लगी लेकिन जब लक्ष्मी स्कूल के कक्षा आठ में पहुंची तो उसे अपने पिता की दिन रात की मेंहनत लक्ष्मी को दिल ही दिल में तडपाने लगी। यही सब बाते सोचकर लक्ष्मी ने स्कूल न जाने का फैसला कर पिता जी का बोझ कम करने की ठानी लक्ष्मी ने गांव के कुछ लोगों को गन्ने का रस निकालकर बेचते हुए देखा तो उसने भी यही काम करने का मन बना लिया अपने पिता को समझाते हुए कहा कि पिता जी गन्ने का रस निकाल कर यदि बेचा जाये तो लोगों की तरह हमारी भी कमाई ये जरिया बन जायेगा। लक्ष्मी की बाते उसके पिता जी के समझ में आ गई और दूसरे ही दिन पिता मौजी लाल ने गन्ना खरीद कर रस निकलवाया और दोनों पिता पुत्री रस बेचने के लिए आसपास के गांवों में निकल पड़े। दोपहर होते ही सारा रस बेचकर दोनों आ गये और साथ में पैसे भी लाये इस तरह से लक्ष्मी अपने पिता के साथ मिलकर रस बेचती रही और आजकल भी वो रोज अपने गांव से रस लाकर रहुला फत्तेहपुर गनीपुर अलियापुर आदि गांव में अकेले बोली लगाकर लगाकर रस बेचती नजर आ रही है। इसी गन्ने का जूस बेचकर वो अपने परिवार के भरण पोषण में पिता की साझेदार बन रही है पिता मौजी लाल भी अपनी लक्ष्मी से बहुत खुश है। लक्ष्मी को जो भी घूम घूम कर रस बेचते हुए देखता है वो उसकी हिम्मत को दाद देता नजर आता है लड़कियों के लिए प्रेरणा बन रही है लक्ष्मी

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