जैन समाज का लोकसभा एवं राज्यसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं- गिरीश भाई शाह

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गिरीश भाई शाह ने जैन समाज को आगे आने का अनुरोध किया
डॉक्टर आर. बी. चौधरी
इंदौर (मध्य प्रदेश)। सामुदायिक विकास के अंतर्संबंध कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में राष्ट्रीय विकास से जुड़े होते हैं. साथ ही उस राष्ट्र की अस्मिता- वहां के रीति-रिवाज, धर्म, प्रचलन, संस्कृति और रहन- सहन वहां की सिर्फ एक विरासत ही नहीं होती बल्कि वह एक पहचान और गौरव का प्रतीक भी होता है। किंतु संवैधानिक अधिकारों के वर्चस्व होते हुए भी यदि तहत किसी समुदाय विशेष को अपनी पहचान बनाए रखने का अवसर न मिले तो इस अंतरवेदना को कहने से ज्यादा समझा जा सकता है, यह विचार है गिरीश जे.शाह का जो यहां पर आयोजित जैन समाज के एक राष्ट्रीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। शाह ने बताया कि हमारे देश में जैन समुदाय एक कर्मठ,ईमानदार और कमाउ होते हुए भी न वह किसी लाभ का हिस्सेदार बन पाता है और न ही गवर्नेंस में कोइ साझेदारी मिलती । कुल मिलाकर जैन समाज आज सब कुछ होते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व में एक पिछलग्गू बनकर रह गया है।

पर्यावरण संरक्षण,जल संसाधन प्रबंधन एवं ग्राम्य विकास पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शाह आज यहां जैन समुदाय के एक राष्ट्रीय बैठक को संबोधित कर रहे थे और समुदायिक विकास के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए जैन समुदाय के राष्ट्रीय योगदान को सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि भारत के संपूर्ण आबादी के 4% लोग जैन समाज से हैं. सभी कर्मठ , कर्तव्य परायण और राष्ट्रीय प्रेमी है। समाज के दुख दर्द बांटने में सबसे आगे रहते हैं। दान -अनुदान देने से लेकर सामाजिक कल्याण हर एक गतिविधि के लिए सदैव आगे खड़े मिलते हैं. कभी भी कोई जैन समाजी कलुषित और विद्रोही प्रवृत्ति मैं लिप्त नहीं पाया जा सकता।

उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि देश भर के सभी 700 से अधिक जैन समुदाय के लोगों का “सरनेम” अलग -अलग होने के नाते सरकारी आंकड़ों में जैन समाज अपने स्तित्व को उजागर करने में सरकार के आगे फेल है।सरकार जैन लिखने वाले को ही जैन मानती है। यह एक सरकारी उपेक्षा है। सबसे दुखद बात है कि लोकसभा और राज्यसभा में जैन समुदाय का प्रतिनिधित्व नगण्य हैं। नतीजा यह है कि सम्मान ,गौरव और राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए दूसरे लोगों के पीछे चलना पड़ता है। शाह ने यह भी कहा कि 4% के हिसाब से यदि लोकसभा और राज्यसभा में सुयोग्य जैनियों को स्थान दिया जाए तो पार्लिमेंट में कुल 32 सीटें मिलेंगी ।लेकिन आज जैन समाज एक- दो सीट के लिए भी मोहताज है।

तकरीबन 7000 से अधिक प्रतिनिधियों के इस सम्मेलन में कई विकास के मुद्दों की बात कही और बताया कि जैन समुदाय को “वैदिक शिक्षा प्रणाली” या “गुरुकुल पद्धति” को अपनाना चाहिए। उनके प्रयास से 7.5 करोड़ की लागत से बनने वाले एक विद्यालय की शुरुआत शीघ्र की जाएगी। जिसके लिए 10 एकड़ जमीन जमीन उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा के बारे में उन्होंने बताया कि फ्री में दवाएं बांटने की जगह पर 3.50 करोड़ की लागत लगा कर जेनेरिक दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है ताकि लोगों को सस्ते दामों पर दवाएं उपलब्ध हो सके। इस परियोजना से 10 टके तक का फायदा हो रहा है और लोगों को सस्ती दवाएं मिल रही है। साथ साथ प्रायोजित अस्पताल के मरीजों को मात्र 10 रुपए में खाना देते हैं। मरीजों को सिर्फ 100 रुपए प्रति बेड मरीज से चार्ज किया जाता है। इसी प्रकार वहां पर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों को पी.जी. करने और अस्पताल में सेवा देने का लाभ लिया जाता है।

शाह ने विकास का एक दूसरा उदाहरण देते हुए लोगों को बताया किउत्तर प्रदेश के चित्रकूट स्थित 250 एकड़ में स्थापित सद्गुरु सेवा आश्रम के ट्रस्टी ए. के. जैन का कार्य अत्यंत सराहनीय है। जैन द्वारा संचालित सद्गुरु सेवा आश्रम के चिकित्सालय में प्रतिदिन तकरीबन 2,300 मरीजों की देखभाल होती है।यह अस्पताल 24 घंटे सेवा दे रहा है। शाह ने धर्मार्थ सेवा का उल्लेख करते हुए भगवान महावीर के आदर्शों को दोहराया और कहा कि भगवान महावीर के आदर्शों का का हम सभी को प्रतिपालन करना चाहिए। सकारात्मक सोच पर उन्होंने चिड़िया के विनम्रता और हाथी के अभिमान की कहानी सुनाई और कहा कि हमें आग बुझाने के लिए चिड़िया की तरह बूद -बूद पानी एकत्र कर आग बुझाने अथवा पुण्य काम में हिस्सा बटाने का मजा ही कुछ और है। यह कार्य चलते रहना चाहिए।

जैन समुदाय के युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 20 साल पहले मुंबई में जब हम स्थानीय जैन मंदिरों में जाते थे तो बमुश्किल 100 से 200 दर्शनार्थी दिखाई देते थे किंतु आज उसी मंदिर में कम से कम 2000 दर्शनार्थी आते हैं जिसमें शत प्रतिशत युवा होते हैं। आज हम भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के कार्यक्रम की प्रतीक्षा करते हैं। किन्तु , आवश्यकता है हमें कुछ करने की, एक पल के लिए हमें सोचना चाहिए कि राष्ट्र हित या सम्माज के लिए हम क्या कर पा रहे हैं। क्या समाज की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में कोई योगदान जोड़ पा रहे हैं ? मेरा मानना है , संगठन में बहुत बड़ी शक्ति है जिससे हम कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं। शाह ने बताया कि मुंबई में पिछली बार 227 निकायों की चुनाव में हम लोगों ने 22 लोगों को चुनाव के लिए खड़ा किया तो उस समय ज्ञात हुआ कि मुंबई में 22 लाख जैन समाज के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि हर शहर में हमारी संख्या कम नहीं है अकेले कर्नाटक में एक करोड़ दिगंबर जैन है जो कई तरह के अतुलनीय कार्य कर सकते हैं।

उन्होंने गौशाला विकास एवं जीव दया की चर्चा करते हुए सभी प्रतिनिधियों गुजरात आने का न्योता दिया और कहा कि सहर्ष गुजरात आइए। हम आपको आज की सभा में होने वाले चर्चा – परिचर्चा का व्यवहारिक स्वरूप दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि 32 एकड़ में फैले एक तालाब की जमीन विकसित कर माडवी के पास एक विशाल गौशाला बनाई गई है जिसमें 6,000 से अधिक गायों को बड़े ही जतन के साथ पाला जा रहा हैं जो देखने योग्य है। आप लोग भी आगे आइए और जीव जंतुओं की रक्षा कार्य में अपना योगदान दीजिये । उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार के एक प्रतिनिधि के रूप में देश के चुने हुए 5,000 से अधिक गौशालाओं से जुड़ा हुआ हूं। मेरी कोशिश है कि सभी गौशाला है स्वावलंबी हो जाए। इस दिशा में माडवी की वर्तमान गौशाला प्रबंधन व्यवस्था अनुकरणीय है। शाह ने बताया कि गौशाला विकास एवं जीव दया के कार्यो के प्रदर्शन हेतु दो दिवसीय भ्रमण व्यवस्था की जाएगी। ऐसी कई संस्थाएं आपको देखने को मिल जाएंगी जो बिना सरकार के सहायता के अपने बदौलत चलती है।

विकास के लिए उन्होंने शिक्षा को मूल मंत्र बताया और कहा कि आज देश में शिक्षा का व्यवसायीकरण इस कदर तक हावी हो गया है कि कैथोलिक स्कूलों से निकले बच्चे अपने परिवार और घर को ही समझने की क्षमता खो रहें हैं। इस बात के लिए अब हम दोषी किसको बनाएं- स्वयं को या बच्चों को। शाह ने सभी से गुजारिश किया कि हमें विद्यादान के लिए महावीर विद्या मंदिर संस्थानों की स्थापना कर अपने बच्चों को संस्कारित शिक्षा देनी चाहिए जो अपने परिवार ही नहीं देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान देंगे। उन्होंने एक शिक्षा संस्थान स्थापित करने के खर्चे का उदाहरण दिया और बताया कि 5 करोड़ रुपए की लागत लगा कर बेहतर शिक्षा संस्थान द्वारा हर साल तकरीबन 40 से 50 लाख रुपए बचा सकते है।

इस सम्मेलन में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे जिसमें गुवाहाटी उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस, रमेश चंद गर्ग ; देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, डॉक्टर नरेंद्र ठाकर ; प्रख्यात उद्योगपति ,अक्षय कांति बम तथा अखिल भारतीय जैन सेवा फेडरेशन के अध्यक्ष प्रकाश भटेवरा आदि ने भी अपने-अपने विचार रखें। इस सम्मेलन में यह घोषणा की गई थी कि 12वीं अखिल भारतीय राष्ट्रीय जैन समाज कान्फ्रेंस का आयोजन , 15 से 16 सितंबर , 2019 को मांडवी, गुजरात में किया जाएगा।

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