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समस्त महाजन का जीव दया एवं गौशाला संवर्धन कार्य एक मिसाल है: सुरेश (भैया जी) जोशी

देश के 603 गौशालाओं को 153 लाख रुपए का अनुदान बांटा गया

रिपोर्ट :डॉ. आर. बी. चौधरी
मुंबई (महाराष्ट्र)। “जैनोलॉजी” यानी ‘जैनधर्म शास्त्र” जिसे “जैन विज्ञान” भी कहा जा सकता है। जैन धर्म के उपदेशों में जिस साइंस चर्चा की जाती है उसमें अहिंसक जीवन पद्धति का सबसे बड़ा महत्व है क्योंकि इसी मूल मंत्र पर जीव दया , करुणा , जीव रक्षा के सभी स्तंभ है टिके हुए हैं। आज जिंदगी के आपाधापी में मानवीय संवेदनाओ प्रश्न चिन्ह लगने लगा है। इंसान से लेकर मूक प्राणियों की वेदनाओ , उनके पीड़ा का एहसास और भावनाओं को समझने का आभास जहां एक ओर धूमिल होता नजर आ रहा है तो वहीं आशा और विश्वास के नए-नए अंकुर भी निकलते हैं। “श्री गुरु प्रेम शताब्दी महोत्सव” के अवसर पर एक मजबूत इच्छा शक्ति लिए हुए समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश भाई शाह देश भर में निराश्रित, बीमार, घायल, बूढ़े, व्याकुल एवं कत्लखाने से छुड़ाये गये पशुओं एवं समस्त प्राणियों को सहारा देने का बीड़ा उठाया है जो आज एक मिसाल बन चुका है, यह बात कहा है राष्ट्रीय संघ सेवक संघ के सर कार्यवाहक सुरेश (भैया जी) जोशी ने। इस अवसर पर उन्होंने समस्त महाजन की ओर से देश के समर्पित गौशालाओं को चेक प्रदान किया।

गौ संरक्षण एवं संवर्धन के इस अतुलनीय कोशिश को एक अभियान को मार्गदर्शन देने वाले सुरेश (भैया जी) जोशी ने इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में समस्त महाजन के ट्रस्टी गिरीश भाई शाह के प्रयास की सराहना की। कहा कि भारत जीव दया का देश है। अहिंसा यहां की परंपरा है , रीति- रिवाज है। देवी देवताओं के सवारी के रूप में हमारे पशु- पक्षियों की भी पूजा होती है। जिसमें गाय जैसे पशु तो सारे ब्रह्मांड किस संपूरक है जिससे माता का दर्जा दिया गया है। परंपरा और धर्म हमें जोड़ती है और हमारी अस्मिता को बनाए रखती हैं अन्यथा हमें भारतीयता का गौरव नहीं प्राप्त होता। सारी दुनिया में हम इसी नाते जाने जाते और पहचाने होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कभी किसी के प्रति हिंसा की भावना पहले कभी सोचते नहीं और न किसी को छेड़ता किन्तु अगर कोई छेड़े तो हम उसे छोड़ते नहीं। उन्होंने कहा कि भारत देवताओं और ऋषियों मुनियों का देश है। यहां मनुष्यता के अलावा किसी नकारात्मक प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया जाता और पाप माना जाता है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने समस्त महाजन के इस गौशाला अभियान के अगुआ गिरीश भाई की कर्मठता और विनम्रता की प्रशंसा की । समस्त महाजन के कार्यशैली को आज देश भर में प्रचारित करने की आवश्यकता है ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुओं की रक्षा की जा सके। गिरीश भाई शाह ने इस अभियान का परिचय देते हुए कहा कि पशु रक्षा के इस मिशन का नाम “समस्त महाजन और श्री गुरु प्रेम”रखा गया है जिसकी प्रेरणा जैन मुनि के.सी. महाराज जी साहब से मिली है और इसका व्यावहारिक रूप देने का मार्गदर्शन भैया जी जोशी से प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि आज देश में तकरीबन छोटी-बड़ी 15 हजार गौशालाये मौजूद है। लेकिन बहुत कम गौशालाये/पंजरापोल ठीक प्रकार से चल पा रही हैं जिसका प्रमुख कारण है फंड की कमी। इसके लिए संस्थाओं को सरकार से फंड मिलाना चाहिए। पशु सेवा के लिए निरंतर संसाधन जुटाना चाहिए।

महोत्सव के पूजन- पाठ एवं अनुष्ठान के बीच भैया जी जोशी ने देश भर से आये गौशाला प्रतिनिधियों द्वारा पशु सेवा अभियान को तेज करने की अपील की और राजस्थान की एक गौशाला को इस साल का सबसे अधिक अनुदान ₹15 लाख का चेक भेंट किया। समस्त महाजन की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरेश (भैया जी ) जोशी ने देश भर के कुल 603 गौशालाओं/पंजरापोलों को 1 करोड़ 53 लाख रुपए का अनुदान प्रदान किया। साथ ही गौशाला निर्माण में सहायता प्रदान करने के लिए दो “जेसीबी” मशीनें भी सौंपी गयी । समस्त महाजन के अनुसार गौ सेवा का यह अभियान “समस्त महाजन एवं श्री गुरु प्रेम मिशन”के तहत चलाया जा रहा है। मुंबई के गोरेगांव स्थित जैन नगरी में चल रहे पांच दिवसीय महोत्सव में जीव दया का सबसे व्यावहारिक विषय गौशाला/पंजरापोल विकास का मुद्दा ही प्रमुख था जहां गौशालाओं/पंजरपोलों को सीधे अनुदान सहायता प्रदान कर पशुओं के प्राण रक्षा का कार्य संपन्न किया गया।

समस्त महाजन की ओर से सभी आगंतुकों ,गौशाला या पंजरपोलों के प्रतिनिधियों एवं पशु प्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया गया और यह आग्रह किया गया कि लोग इसमें अपना हाथ बटाएं। इस अवसर पर सुनील मानसिंघका,अभय महाजन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित उपस्थित थे।

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