उत्तर प्रदेश

अंजुबाला को नाराज़ कर आसान नहीं बीजेपी के लिए मिश्रिख सीट को जीतना

कुर्मी वोट पर मजबूत पकड़ रखती हैं सांसद अंजुबाला व उनके पति पूर्व विधायक सतीश वर्मा

कुर्मीबाहुल्य सीट पर कहीं बिगड़ न जाये भाजपा का खेल

कमरुल खान

बिलग्राम हरदोई।भारत के राज्य उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार से राजनीतिक महाभारत की शुरुआत हुई है। उसे लेकर सभी राजनीतिक दल पशोपेश में नजर आ रहे हैं। 2014 में बीजेपी को उम्मीद से ज्यादा सीटों के मिलने से अपोजिट पार्टियों की नींदे गायब हो गई थी जिसको लेकर विभिन्न दलों ने बीजेपी के किले को ढहाने के लिए अपनी अपनी रणनीति के तहत काम करना तभी से आरंभ कर दिया था इस बार हो रहे लोकसभा चुनाव में पिछले विधानसभा चुनाव के समय क्षेत्रीय पार्टियों में नंबर दो और नंबर तीन पर रहीं सपा बसपा ने इस बार आपस में तालमेल कर आधी आधी सींटो पर दोनों पार्टियों ने चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है जिससे अब बीजेपी के लिए पिछली लोकसभा की तरह जीत को दोहरा पाना मुश्किल लग रहा है इसीलिए पार्टी द्वारा टिकट बंटवारे में काफी सोच समझ कर प्रत्याशियों का चयन किया गया है इस बार बीजेपी ने कई ऐसे लोगों को उम्मीदवार नहीं बनाया जो मौजूदा सांसद थे जिनमे हरदोई सुरक्षित सीट से अंशुल वर्मा और तीन जिला कानपुर हरदोई सीतापुर की विधान सभा सीटों को मिलाकर बनी मिश्रिख लोकसभा सीट से अंजू बाला को इस बार उम्मीदवारी से दूर रखा गया जिसमें उम्मीदवारी से हांथ धोने वाले अंशुल वर्मा ना ना करते पार्टी से किनारा कर अपना इस्तीफा चौकीदार को सौंपा और अखिलेश यादव की साईकिल पर सवार हो गए वहीं डॉ अंजू बाला की बात की जाये तो अभी फिलहाल वो भारतीय जनता पार्टी में ही है लेकिन टिकट न मिलने से उनका दर्द भी छलका और अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह और जेपी नड्डा से सवाल पूछते हुए कहा कि मेरा टिकट कटने पर मुझे कष्ट नहीं है मैं और मेरे समर्थक यह जरुर जानना चाहते हैं जो व्यक्ति 2014 के चुनाव में बीएसपी का प्रत्याशी था जिसे मैंने हराया क्या कारण रहे कि हारा हुआ व्यक्ति अच्छा हो गया और आपका सांसद अच्छा नहीं रहा, मैं कारण जानना चाहती हूँ। जिसको लेकर उनके समर्थकों ने पार्टी के खिलाफ काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पार्टी पर पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगाया आपको बता दें कि सांसद अंजुबाला का कार्यकाल बहुत अच्छा नहीं तो खराब भी नहीं रहा उनका जुड़ाव जनता से सीधे तौर देखा गया है। बात अगर कामकाज की करे तो उन्होंने अपने सांसद निधि को 75%खर्च किया है। वहीं उनके पति शतीष वर्मा पूर्व विधायक रहे जिनका भी क्षेत्र में अच्छा खासा वोट है ऐसे में अगर सांसद अंजुबाला को भरोसे में न लिया गया तो उनके समर्थक पार्टी के खिलाफ वोट कर सकते हैं जो बीजेपी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र मिश्रिख में राजनीति का रुख पूरी तरह ग्रामीणों के हाथों में है। क्षेत्र में किसी भी जिला मुख्यालय की विधानसभा सीट शामिल नहीं है। इस सीट की कुल आबादी 25,66,927 है। इसमें 90.33 फीसदी आबादी ग्रामीण है। शहरी क्षेत्र की आबादी का हिस्सा सिर्फ 9.67 फीसदी है। अनुसूचित जाति की आबादी 33 फीसदी के करीब है

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