इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज नही तो सकता

लखनऊ। विश्व में कैंसर से ग्रस्त पीडितों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं इसमें भारत भी काफी आगे आ रहा है। आए दिन कोई न कोई कैंसर से जुड़ी परेशानी देखने को मिलती है। कैंसर शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। उसी में से एक है कोलन कैंसर जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ी आंत का कैंसर भी कहा जाता है। यह बात दिल्ली के हेल्दी ह्युमन क्लीनिक के सेंटर फॉर लीवर ट्राप्लांट एंड गैस्ट्रो साइंसेज के डायरेक्टर डा.रविंदर पाल सिंह मल्होत्रा ने बताई इनके मुताबिक असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि जब कोलन, रेक्टल या दोनों में ही फैलती हैं, तो इस फैलाव को कोलन कैंसर कहते हैं। इसे कोलो-रेक्‍टल, बोवेल, रेक्टल कैंसर भी कहा जाता है। हालांकि कोलन कैंसर अब लाइलाज नहीं रहा है। ज्यादातर बड़ी आंत का कैंसर कोशिकाओं के छोटे-छोटे गुच्छों को जन्म देता है जिसे एडीनोमैटस पॉलिप्स के नाम से जाना जाता है। यह आंत की दीवार पर बढ़ता चला जाता है। समय के साथ ये पॉलिप्स बढ़कर कोलन कैंसर का रूप ले लेते हैं।

कोलन कैंसर के कारण

ज्यादातर मामलों में मरीज कोलन कैंसर के लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देता है। जबकि फेफड़ों के कैंसर के बाद सबसे ज्यादा लोग इसी कैंसर से मरते हैं। कहते हैं कि जो लोग सही मात्रा से ज्यादा कैलोरी का सेवन करते हैं उन्हें कोलन कैंसर होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं। अनियमित, अनियंत्रित खान-पान और लाइफस्‍टाइल कोलन कैंसर होने का मुख्य कारण है।
इस कैंसर के संभावित कारणों में जेनेटिकल कारण भी शामिल हैं। धूम्रपान, ज्यादा चर्बी वाला मीट और जंक फूड खाने से भी इस कैंसर के पनपने के चांसेज बढ़ जाते हैं। लगातार लंबे वक्त तक कब्ज का बने रहना भी इस कैंसर का कारण बन सकता है।

कोलन कैंसर के लक्षण

कोलन कैंसर के लक्षण हमारी आम परेशानियों से जुड़ी हुई होती हैं इसलिए इसके बारे मे जान पाना काफी मुश्किल हो जाता है। जबतक परेशानी बढ़ नहीं जाती तबतक इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता है। पेट में दर्द होना, लंबे समय से कब्ज, डायरिया, कमजोरी होना, जल्द ही थकान महसूस करना, बार-बार पेट फूलना, खून की कमी होना, मल के साथ खून आना, बेवजह वजन का कम होना आदि कोलन कैंसर यानी कि बड़ी आंत के कैंसर के लक्षण हैं।

कोलन कैंसर से बचाव और इसके इलाज

जब मल में खून आने लगे तो इसकी पहचान करना आसान हो जाता है। स्क्रीनिंग, कोलनस्कोपी और सिटी स्कैन के जरिए डॉक्टर इसकी पहचान कर सकते हैं। अपने खान पान को सही रखकर और जीवनशैली में बदलाव लाने से इस घातक रोग से बचा जा सकता है। कोलन कैंसर का इलाज पीड़ित में कैंसर के स्टेज, प्रकार, उसके स्वास्थय और उम्र पर निर्भर करता है। इसका इलाज तब तक ही संभव है जबतक कि वो आतों तक ही रहे। जैसे ही यह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है उसके बाद इसका इलाज केवल सर्जरी के जरिए किया जा सकता है। यह सर्जरी कीमोथेरपी के जरिए की जाती है।

सर्जरी में कोलन के ज्यादातर हिस्सों को निकाल दिया जाता है। कीमोथेरपी में कोशिकाओं के बढ़ने की प्रक्रिया को रोक दिया जाता है। साथ ही प्रोटीन एवं डीएने को टूटने से बचाने के लिए और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रसायन का उपयोग किया जाता है। रेडिएशन के जरिए कोलन कैंसर के इलाज में उच्च उर्जा वाली किरणों का प्रयाग किया जाता है।

पहले सर्जरी पारंपरिक तरीके से होती थी, लेकिन अब लैप्रोस्कोपी ने इसे बहुत आसान बना दिया है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के अंतर्गत पेट में सूक्ष्म छेद किए जाते हैं और इनमें से यंत्रों को अंदर डालकर सर्जरी की जाती है। इस प्रक्रिया में शरीर पर चीरे के निशान नहीं पड़ते हैं और न ही खून बहता है इसलिए दर्द भी कम होता है।

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