मायावती के साथ मंच साझा करने के लिए RLD प्रमुख अजित सिंह को उतारने पड़े जूते

2014 के लोकसभा चुनावों में कड़ी शिक्शत मिलने के बाद इस बार बसपा अध्यक्ष मायावती पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतर रही हैं। अखिलेश यादव और अजित सिंह को पीछे छोड़ते हुए इस बार मायावती महागठबंधन का एक मुख्य चेहरा बनकर उभरी हैं। जिसमें कार्यक्रमों से लेकर, रैलियों तक के सारे फैसले वे खुद ले रही हैं।

हालांकि इस दौरान मायावती की तानाशाही भी साफ तौर पर देखी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं से बदसलूकी के लिए बदनाम मायावती जाने- अनजाने में गठबंधन पार्टनर से भी इसी तरह की हरकतें कर रही है। ऐसा ही कुछ देवबंद रैली में हुआ, जहां उनके साथ बैठने के लिए अजित सिंह को जूते उतारने पर मजबूर किया गया जबकि खुद मायावती जूते पहन कर बैठी थी।

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में एसपी- बीएसपी- आरएलडी गठबंधन कर एक साथ चुनावी मैदान में उतरे हैं। बता दें कि पिछली बार के लोकसभा चुनावों में मायाबती के हाथों एक भी सीट नहीं लगी थी। लेकिन इस बार बसपा प्रमुख मायावती की नजर ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर है। जिसके लिए वे अपनी पूरी ताकत के साथ जनता में अपनी पैठ बनाने की कोशिशें कर रहीं हैं।

ऐसे में मायावती जगह- जगह चुनावी रैलियां कर रही हैं। एक तरह से वह पूरे गठबंधन की धुरी बन चुकी हैं। महागठबंधन की रैलियों, कार्यक्रमों से लेकर स्टेज पर कौन-कहां बैठेगा, कौन-कब बोलेगा ये सब मायावती खुद तय कर रही हैं।

ऐसा ही कुछ सहारनपुर के देवबंद में हुई महागठबंधन की रैली में हुआ। दरअसल, देवबंद में महागठबंधन की रैली को संबोधित करने मायाबती समेत अखिलेश यादव और अजित सिंह भी पुहंचे थे। जैसे ही अजित सिंह ने मायावती और अखिलेश यादव के पीछे-पीछे मंच पर चढ़ना शुरु किया, वैसे ही बसपा के एक को-ऑर्डिनेटर ने अजित सिंह से जूते उतारने को कह दिया। उसने आरएलडी अध्यक्ष को बताया कि मायावती को पसंद नहीं है कि मंच पर उनके सामने कोई जूते पहनकर बैठे, सिवाय खुद उनके। मायावती का अपने साथी के साथ ऐसा रवैया देखकर सब हैरान रह गए।

2019 के चुनावों में इस बार आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह मुजफ्फरनगर से चुनावी मैदान में हैं और दलित वोटों के लिए पूरी तरह मायावती पर आश्रित हैं। ऐसे में उनके सामने मायावती के नियमों को मानने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।

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