घर खरीदने से पहले जरूर रखें इन बातों का ख्‍याल

आम तौर पर एक व्‍यक्ति जीवन में एक ही बार घर खरीदता है। यह घर सिर्फ चार दीवारों का एक ढांचा मात्र नहीं होता, यह आपके परिवार की खुशियों से भरा एक आशियाना होता है। ऐसे में जब हम अपने लिए घर खरीदने जाते हैं, तो हमें आने वाले 30 से 40 साल का नजरिया रख कर प्‍लानिंग करनी जरूरी होती हैं। लेकिन आजकल लेट होते प्रोजेक्‍ट की भरमार और कस्‍टमर को कन्‍फ्यूज करने वाले विज्ञापनों के चलते आम आदमी फैसला नहीं कर पाता कि घर खरीदने का उसका निर्णय बिल्‍कुल ठीक-ठाक है। इंडिया टीवी पैसा की टीम आपको बताने जा रही है कुछ ऐसे स्‍टेप्‍स के बारे में जिनका पालन कर आप घर की बेहतर डील हासिल कर सकते हैं।

बिल्‍डर की बातों पर नहीं कागजों पर करें विश्‍वास

अक्‍सर लोग घर खरीदते समय बिल्‍डर या एजेंट की बातों पर यकीन कर लेते हैं, बहुत से बिल्डर अपने प्रोजेक्‍ट की बुकलेट और ब्रॉशर के सहारे भी प्रोजेक्‍ट को लुभावने ढ़ग से पेश करते हैं। लेकिन आप बातों या ब्रॉशर की बजाए अथॉरिटी से अप्रूव्ड लेआउट मैप जरूर देख लें। आमतौर पर लोगों की जागरुकता को देखते हुए कई बिल्‍डर मैप दिखाते तो हैं, लेकिन आप भी इसकी सत्‍यता की पड़ताल जरूर कर लें। प्रोजेक्‍ट लेआउट में प्रोजेक्‍ट में मकानों की संख्‍या, ओपन स्‍पेस, ग्रीन स्‍पेस आदि की पूरी जानकारी होती है। ब्राशर पर यकीन करने से आप गलतफहमी के शिकार हो सकते हैं।

जरूर जान लें जमीन वैध है कि नहीं

रियल एस्‍टेट सेक्‍टर के लिए जमीन की बढ़ती किल्‍लत को देखते हुए खेती की जमीन पर जमकर प्‍लाटिंग की जा रही है। ऐसा सिर्फ दिल्‍ली या मुंबई जैसे शहरों में नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी देखा जा रहा है। ऐसे में मकान खरीदने से पहले जमीन का मालिकाना हक जरूर जान लें, इससे आप कोर्ट केस के चलते प्रोजेक्‍ट डिले से बच सकते हैं। किसी अचल संपत्ति की वैधता के मामले में दो चीजें महत्वपूर्ण हैं। पहली, जिस जमीन पर इमारत बनी है या बनने वाली है, वह किसके नाम है। दूसरा, उस पर किया गया निर्माण नियमानुसार है अथवा नहीं।

मांग लें जरूरी दस्‍तावेज

नोएडा या दूसरे शहरों में अटके बहुत से प्रोजेक्‍ट के पीछे मुख्‍य कारण यही है कि उन्‍हें मकान बनाने का अप्रूवल ही नहीं मिला, जिसके चलते कोर्ट में केस लंबित रहते हैं, जिसका खामियाजा आम उपभोक्‍ता को भुगतना पड़ता है। कई बार बिल्डर अप्रूव मकानों से अधिक मकान या फ्लोर बना देते हैं। इसलिए आप मकान खरीदने से पहले बिल्डर से कम्प्लीशन या ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जरूर मांगें। ये दोनों प्रमाण-पत्र बिल्डर को नगर निगम जैसे निकाय से मिलते हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि इमारत का निर्माण सभी नियमों को पालन करते हुए अप्रुव नक्शे के आधार पर हुआ है या नहीं।

जरूर लें बैंक से होम लोन

आमतौर पर बैंक लोन घर खरीदने के लिए पैसों के इंतजाम के लिए लिया जाता है। लेकिन बैंक लोन प्रोजेक्‍ट की विश्वसनीयता जानने का भी आसान तरीका है। बैंक प्रोजेक्‍ट के लिए लोन अप्रूव करने से पहले सभी प्रकार के दस्‍तावेजों की गहन छानबीन करते हैं। बैंकों के लिए लोन का पूरा प्रोसेस होता है। आम आदमी के लिए दस्‍तावेजों की प्रामाणिकता के लिए दौड़धूम करना संभव ही नहीं है। ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि बैंक से लोन के अलावा यह भी जांच लें कि कितने बैंक प्रोजेक्‍ट को अप्रूवल दे रहे हैं। अगर किसी प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ कुछ गिने-चुने बैंक ही लोन दे रहे हों तो उस प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

सिर्फ विज्ञापनों के आधार पर न लें फैसला

अक्‍सर लोग अखबारों या होर्डिंग पर दिए गए विज्ञापनों के आधार पर घर खरीदने का निर्णय ले लेते हैं और बाद में उन्‍हें पछताना पड़ता है। यदि आपको किसी बिल्डर की तरफ से कोई लुभावना ऑफर मिलता है तो फिर उसके बारे में पूरी जांच पड़ताल करें। पता करें कि वह ऑफर मान्य भी है या नहीं। अगर मान्य है भी तो छुपे हुए चार्जेज के बारे में भी पता करें। कई बार बिल्डर हिडेन चार्जेज के बारे में नहीं बताते और बाद में उसका भी पैसा आपको ही चुकाना होता है।

जरूरी सुविधाएं जरूर देख लें

कई बार लो सस्‍ते मकान के चक्‍कर में सुविधाओं और शहर से दूर मकान खरीद लेते हैं। लेकिन जब वे रहने पहुंचते हैं तब उनका सामना असली समस्‍या से पड़ता है। ऐसे में जहां भी आप घर खरीदने जा रहे हैं वहां पर पानी की सप्लाई, बिजली की सप्लाई और गैस जैसी जरूरतों के बारे में जरूर विचार करें। देख लें बच्चों के लिए स्‍कूल हैं कि नहीं, परिवहन, बाजार और स्‍वास्‍थ्‍य की सुविधाएं हैं कि नहीं।

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