कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने की लिए चलाया राष्ट्रव्यापी अभियान

“फ्रीलांस मुस्लिम लीगल एंड इंटेलेक्चुअल ग्रुप”- अपने एक सहयोगी सामाजिक संस्था -“मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” के सहयोग से कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35 – ए हटाने के मामले पर एक जन चेतना अभियान चलाया जा रहा है । इस ग्रुप के संयोजक, सुप्रीम कोर्ट के चर्चित अधिवक्ता ,शीराज़ कुरैशी ने कहा कि यह अभियान आगामी एक हफ्ते में पूरा कर लिया जाएगा। यह अभियान एक ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे को लक्ष्य बनाया है जो अक्सर नजरअंदाज किया जाता रहा है।कुरैशी ने बिना नाम लिए बताया कि इस मामले में सिर्फ जम्मू- कश्मीर ही नहीं पूरे देश के मुसलमानों को तमाम पार्टियों के नेताओं द्वारा हमेशा कंफ्यूज किया जाता रहा हैं। जिसका सीधा असर कश्मीर के साथ साथ जम्मू सहित नार्थ ईस्ट के कई राज्यों की सामाजिक और आर्थिक विकास को कोई गति नहीं मिल पाई। लोगों के जीवन स्तर सुधारने में कोई कामयाबी नहीं मिल पाई और हमारे ही अपने भाई या परिवार के लोग आज भी आर्थिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान को पूरा कर इसकी रिपोर्ट सरकार के सामने रखी जाएगी जिसमें देश की जन भावनाओं की साफ-सुथरी तस्वीर होगी।

कुरैशी ने बताया कि इस मामले पर हम भारत के प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के समक्ष “व्हाइट पेपर”प्रस्तुत करेंगे ताकि इस विषय में अब तकचला आ रहा कन्फ्यूजन और दोहरे मापदंड से निजात पाया जा सके। कुरैशी ने बड़े ही प्रबलता के साथ कहा कि कश्मीर से धारा 370 व 35-ए हटाया जाना चाहिए और इसके अलावा अब कोई रास्ता नहीं है। कार्य को पूरा न होने के कारण जम्मू और कश्मीर का विकास पूरी तरह अवरुद्ध है। वहां की आवाम विवादों और पिछड़ापन का शिकार है। गरीबी और अज्ञानता से पीड़ित देश का यह भूभाग राष्ट्रीय मुख्य धारा से अलग है।हालत ऐसी है कि देश की योजनाएंन न तो ठीक से चलाई जा सकती है और न ही कोई इन्वेस्टर खुशी- खुशी उद्योग धंधे लगाना चाहता है। किसी भी समाज में शिक्षा और गरीबी वहां के विकास की बहुत बड़ी अड़चन होती है। यही हाल है कश्मीर का। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों की जन भावना का असर देश के अन्य भाग में रहने वाले मुसलमानों पर पड़ता है और देश भर में इसका नकारात्मक संदेश जाता है। यही कारण है कि देश भर के मुस्लिम बुद्धिजीवियों, कलाकारों एवं अन्य जागरूक लोगों से मिलकर सहमति प्राप्त करनेका कार्य किया जा रहा है। चुनाव बाद इस मिशन को पूरा करने निश्चय किया गया है।

ग्रुप के संयोजक ने इस जन चेतना अभियान की रूप-रेखा का विवरण बताते हुए कहा कि अब तक 17 राज्यों के 25 शहरों के प्रबुद्ध मुस्लिम समुदाय के लोकप्रिय प्रतिनिधियों से वार्तालाप हो चुकी है। चारों ओर से इस ग्रुप को भारी समर्थन मिल रहा है। ग्रुप घूम-घूम कर भारतीय मुस्लिम समाज द्वारा देश की आजादी में दी गई कुर्बानी, सामाजिक सद्भाव के यशस्वी इतिहास और भारत के लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को याद दिलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का हर मुस्लिम नागरिक आज से नहीं बल्कि ऐतिहासिक काल से अपने राष्ट्र के प्रति वफादार है। संयोजन समिति के एक सदस्य फैजल मुमताज ने कहा कि जब स्वतंत्र भारत का संविधान पारित किया जा रहा था तब उत्तर प्रदेश के उन्नाव के हसरत मोहानी के नेतृत्व में संविधान सभा के 6 मुस्लिम सदस्यों ने अस्थाई धारा 370 को देश की एक एकता और अखंडता के लिए खतरा बताते हुए हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और विरोध किया। किंतु, उनकी बात नहीं मानी गई जिसका खामियाजा आज कश्मीर के भाई – बहन सहित समूचे देश को भरना पड़ रहा है।

ग्रुप के एक सदस्य डॉक्टर इमरान चौधरी ने बताया कि इस अभियान के सभी सदस्य कमर कस कर मैदान में कूद पड़े हैं और सफलता के मंजिल तक पहुंच कर ही मानेंगे। मध्य प्रदेश से आरंभ यह अभियान चल कर उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, तेलंगाना, उत्तराखंड, हरियाणा,आदि राज्यों से गुजरते हुए वर्तमान में पूर्वोत्तर राज्य -आसम, मेघालय मणिपुर आदि राज्यों का जन जागरण कर रहा है। इरफान मिर्ज़ा ने बताया कि आगामी 10 दिनों के अंदर देश के सभी राज्यों का जागरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। अभियान के आर्किटेक्ट कुरैशी ने बताया कि मूहिद्दीन, जहीर कुरैशी,ख़ुर्शीद राजका, तहिर खान, आबूवकार नकवी तथा डॉ.शाहिद अख्तर ने राज्यों में जागरण कार्य की सुनियोजित व्यवस्था करने और बुद्धिजीवियों को एकत्र करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

संयोजन समिति का यह लक्ष्य है कि जैसे सभी राज्यों का भ्रमण कर मुस्लिम समुदाय के बौद्धिक एवं प्रबुद्ध लोगों से मिलने का कार्यक्रम पूरा हो जाएगा तो इसके तत्काल बाद इस जागरण अभियान पर एक रिपोर्ट (व्हाइट पेपर) तैयार की जाएगी जिसे भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को समर्पित किया जाएगा। साथ ही साथ यह अवगत कराया जाएगा कि इस अभियान में भारत के मुस्लिम समुदाय का बहुत बड़ा समर्थन है और भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर तथा वहां की आवाम को किल्लत की जिंदगी से निकाला जाना चाहिए ताकि देश की अस्मिता, अखंडता और सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी का साथ, सभी का विकास एक साथ हो। हर भारतवासी को गौरवशाली जिंदगी जीने का हक मिल सकें।

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