सोशल मीडिया को हथियार बना , डीजीपी ने हासिल की बड़ी जीत

 बिहार में दूसरे स्थान पर हैं अपराध रूपी दंगा,  प्रतिवर्ष 10 हजार से अधिक होती हैं घटनाएं

>> बड़े धार्मिक त्योहारों से पूर्व फेसबुक लाइव पर होते हैं डीजीपी ,संदेश के साथ करते हैं अपील

>> गुप्तेश्वर पांडे एक भरोसा के साथ युवाओं के लिए बन गये है आइकॉन

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । ताकत से जीत हासिल होना एक प्रकार से दमनकारी समान होता हैं ,वहीं किसी के दिलों में बस जाना ,मन को भा जाना ही वास्तविक जीत होती हैं । ऐसी ही बड़ी जीत बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने हासिल किया हैं ।सोशल मीडिया के माध्यम से डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ,बड़े त्योहारों से पूर्व फेसबुक लाइव होकर बिहार वासियों को संदेश देने और युवाओं से अपील करते हैं । इसका सकारात्मक असर समाज में हुआ हैं और सफलता मिली हैं  ।देखा जाएं तो वर्तमान वर्ष 2019 में ऐसी कोई बड़ी दंगा की घटना राज्य में नहीं हुई हैं ।
    देश का सबसे दूसरी बड़ी आबादी वाला राज्य बिहार हैं । यहां के कानून -व्यवस्था को सुधारना, नियंत्रण में रखना और सही संचालन करना किसी भी डीजीपी के लिए बड़ी चुनौती होती हैं । आकड़े पर गौर करें तो बिहार में सबसे अधिक मामले चोरी के दर्ज होते हैं । औसतन प्रतिवर्ष 22 हजार से ऊपर , बीते वर्ष 2018 में 30 हजार के आकड़े को पार कर गया हैं । इसमें  40 % घटनाएं विद्वेष के कारण दर्ज होते हैं ,जो अनुसंधान में झूठे साबित होते हैं ।
     दूसरी सबसे बड़ी घटना दंगा की होती हैं । इसे झूठा नहीं कहां जा सकता ,इससे आम लोग पीडि़त और प्रभावित होते हैं ।आकड़े के अनुसार बिहार में बीते वर्ष 2014 में  13566 , वर्ष –2015 -13311 ,वर्ष 2016-11617 ,वर्ष –2017 – 11698 एवं वर्ष 2018 -10276घटनाएं दंगा के हुये हैं । इस तरह देखा जाएं तो प्रतिवर्ष दस हजार से अधिक घटनाएं दंगा की होती हैं । हालाँकि इसमें लगातार सुधार हुये हैं फिर बिहार में दंगा एक बड़ी चुनौती हैं ।
      बिहार के वर्तमान डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ,दंगा पर काबू पाने के लिए गंभीर के साथ-साथ सक्रिय हैं । इनका मानना है की असमाजिक तत्वों का कोई धर्म ,जाति ,वर्ग नहीं होता .बल्कि इन्हें बस एक मौका चाहिए ,अफवाह के जरिए अशांति फैलाने की। आज के दौर में असमाजिक तत्व सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने की कोशिश में जुटे रहते हैं । युवाओं का बड़ा वर्ग भटकाव का शिकार हो जाता हैं । डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे इससे पूर्ण वाकिफ थे। यहीं वह कारण है की डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने युवा वर्ग के लाइफ स्टाइल , सोशल मीडिया ( स्मार्टफोन ) को हथियार बना लिया ।
        धार्मिक त्योहारों में असमाजिक तत्वों अफवाह फैलाने की कोशिश में जुटे रहते हैं की इससे पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे सोशल मीडिया ,फेसबुक लाइफ होकर बिहार वासियों को संदेश में बधाई ,शुभकामनाएं देते हैं साथ ही, खासकर युवाओं से आपसी सौहार्दपूर्ण एवं भाईचारा के साथ मनाने का अपील करते हैं । इसका असर सकारात्मक के साथ-साथ प्रभावशाली रहा । वर्तमान वर्ष में होली ,शिवरात्री,  चैती छठ, रामनवमी ,अन्य वर्गों के बड़े धार्मिक त्योहारों पर किसी तरह का कोई दंगा की घटनाएं नहीं हुई हैं ।  जबकि बीते वर्ष पटना में ही 712 दंगा की घटनाएं हुई थीं ,सबसे अधिक गया जिले 808 दंगा की घटनाएं हुई थी।डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे के फेसबुक लाइफ को देखें तो पाएंगे की  सबसे अधिक युवा वर्ग जुड़े रहते है और पसंद करते हैं । कॉमेंट बॉक्स में अपनी राय के साथ-साथ, पुलिस की लापरवाही ,कामयाबी ,कार्रवाई का भी अनुरोध करते हैं  ।ऐसा कहना गलत नहीं होगा की डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ,बिहार वासियों के भरोसा के साथ युवाओं के आइकॉन बन गये हैं ।
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