परिवार सहित महिला ने कहीं – नहीं हुआ हैं जेल में यौन शोषण ,नहीं की कोई शिकायत

 पंद्रह दिन पहले जेल से छूट चुकी हैं मंजू देवी और उसके परिवार के लोग

>>बड़ा सवाल – गंभीर आरोप का पत्र कैसे और किसने किया उजागर

>> अहियापुर थाना कांड संख्या  1046/18 में पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा था जेल

पटना ( अ सं ) । मुजफ्फरपुर केन्द्रीय कारा में महिला कैदियों के साथ यौन शोषण करने का मामला पुरी तरह से झूठ निकला हैं ।पीडि़त महिला मंजू देवी ने स्पष्ट रूप से कहां हैं की मेरे साथ किसी प्रकार का यौन शोषण नहीं हुआ हैं और न ही मैं किसी से लिखित भेजकर या मौखिक शिकायत की हूं  । जेल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ,एक कुशल प्रशासक अधिकारी एवं अच्छे इंसान हैं ।इस तरह पीएमओ को भेजा गया शिकायती पत्र झूठा ही नहीं निकला है बल्कि यह किसकी गंदी करतुत है ,यह पता करना जरूरी हैं और ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत हैं ।
         मुजफ्फरपुर केन्द्रीय कारा में महिलाओं कैदियों के साथ यौन शोषण की खबरें ने देश-दुनिया में खलबली मचा कर रख दिया । कई समाजसेवी संगठन एवं मानवाधिकार संगठन और महिला आयोग ने सही जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की हैं । डीएम ने महिला अधिकारी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम गठित किया हैं ।गंभीर आरोप पर जांच भी शुरू हो गयी हैं ।
     इस संबंध में पीडि़त महिला मंजू देवी से जब बातचीत हुई तो वह गुस्से से आग बबुला हो गयी । कहीं की यह सब झूठ हैं ,मेरे साथ जेल में किसी ने यौन शोषण नहीं किया हैं । पीएमओ को भेजे गये पत्र को जब आगे किया और दिखाया तो वह बताई की मेरा यह दस्तखत (हस्ताक्षर )नहीं हैं । और सादे कागज पर लिखकर हस्ताक्षर भी आगे किया । सचमुच दोनों हस्ताक्षर में कोई मिलान नहीं हो रहा हैं ।  पीडि़त महिला मंजू देवी ने कहीं की इससे हमारे इज्जत खराब हुई हैं ,आप ही बताएं इसके बाद मेरी बेटी से कौन शादी करेगा । जेल अधीक्षक के बारे में बताई की वह अच्छे इंसान हैं ।मददगार और सकुशल अधिकारी हैं । पीडि़त महिला के पति जो उस क्रम में जेल में थे उन्होंने कहां की हमारी मनहानी हुई हैं । कोई ऐसी घटना हमारे परिवार के साथ नहीं हुआ हैं । हम कोर्ट जाएंगे और कहेंगे की जिसने भी हमारी छवि खराब करने के लिए गंदी हरकत किया है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएं । इसने बताया की हम सभी 15 दिन पहले ही जेल से जमानत पर छूटकर बाहर आ गये थे। पीडि़त  दंपती के बयान से स्पष्ट है की किसी व्यक्ति ने गहरी साजिश रचकर बिहार की छवि को बदनाम करने का काम किया है । यह तो साबित हो चुका है की आरोप पुरी तरह से बेबुनियाद और झूठा है लेकिन इससे भी बड़ा सवाल सब है की गंभीर आरोप का शिकायती पत्र कैसे उजागर हुआ और किसने किया ।
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