हरदोई- हरदोई में राष्ट्रवाद बनाम विपक्ष के प्रत्यारोपों के बीच घमासान

राष्ट्रवाद व विकास को बौना करने में जुट विपक्ष

पाली।हरदोई -सांसद की कुर्सी के लिए मचे चुनावी घमासान में एक दूसरे को पटखन्नी देने के लिए अपने लाव लश्कर के साथ क्षेत्र की खाक छान रहे उम्मीदवारों के लिए इस बार हरदोई लोकसभा सीट किसी किले को फतह करने से कम नहीं है।एक ओर जहाँ तीन बार साइकिल की सवारी कर संसद भवन का रास्ता तय कर चुकी ऊषा वर्मा सपा बसपा रालोद के गठबंधन से चुनाव में अपनी किस्मत अजमा रही है तो दूसरी तरफ राजनीति के मंझे खिलाड़ी जयप्रकाश रावत भी तीन बार बतौर सांसद जीत का मजा चख चुके कमल के फूल और राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। इनके अलावा समाजवादी पार्टी की सीट पर विधायकी का चुनाव लड़ चुके वीरेंद्र वर्मा को कांग्रेस पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारा है। यहां पर बात अगर 2014 के लोकसभा चुनाव की करें तो हरदोई सुरक्षित सीट पर 56.75 फीसदी मतदान हुआ था,जिसमें मोदी लहर के चलते भाजपा के प्रत्याशी अंशुल वर्मा ने 360501वोट हासिल कर तीसरे पायदान पर पहुंची। सपा की ऊषा वर्मा से छीन कर बसपा के उम्मीदवार शिव प्रसाद वर्मा को 83343 मतो के लम्बे अंतर से पराजित करते हुए जीत दर्ज की थी। सपा की ऊषा वर्मा को 276543 वोट मिले थे ,वही कांग्रेस प्रत्याशी शिव कुमार को मात्र 23298 वोटो से ही संतोष करना पड़ा था।अगर 2014 के चुनाव का पिछले आंकड़ों पर नजर डालते हुए सपा बसपा के वोटों को जोड़कर देखे तो सपा प्रत्याशी उषा वर्मा की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है।वहीं राजनीतिक दांव पेंच के मजे खिलाड़ी जय प्रकाश रावत को भाजपा के राष्ट्रवाद के मुद्दे और मोदी फैक्टर के चलते पार्टी के दिग्गजों के सहयोग से हरदोई के मजबूत किले के बुर्ज पर अपनी विजय पताका फहराना इतना आसान नहीं लग रहा है वही जानकारो की माने तो बिखर चुके अपने बूढ़े संगठन की दम पर वह किसानों को ₹72000 सालाना देने की बात कहने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल की घोषणा के साथ चुनावी दल दल में फसे कांग्रेसी प्रत्याशी वीरेंद्र वर्मा संघर्ष करते नजर आ रहे हैं वहीं राष्ट्रवाद व विकास के मुद्दे पर विपक्ष को पटखनी देने के प्रयास में है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि आने वाली 29 अप्रैल को हरदोई सुरक्षित सीट का मतदाता अपना किस पर विश्वास अजमाता है।

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