विधि पूर्वक संस्कार कराने से व्यक्ति होता है उन्मुख -डॉ राजेश मिश्रा

हरदोई। 7 मई। जिले के हरियावा ब्लॉक के खेरिया ग्राम में हुए उपनयन संस्कार के आयोजक डॉ राजेश मिश्र ने जनेऊ संस्कार के बारे में बताया कि जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। इसे ‘उपनयन संस्कार’ के समय धारण कराया जाता है। जनेऊ को संस्कृत भाषा में ‘यज्ञोपवीत’ कहा जाता है। यह सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति बायें कंधे के ऊपर तथा दायीं भुजा के नीचे पहनता है। अक्षय तृतीया पर हरियावाँ ब्लाक के गाँव खेरिया में हुए उपनयन संस्कार में आचार्य प्रताप नरायण अवस्थी ने ब्रह्मचारियों को जीवनोपयोगी कई बातें बतायीं।वेदमंत्रों से यज्ञकुंड में डाली गयीं आहुतियों के साथ ब्रह्मचारियों का उपनयन सम्पन्न हुआ। संस्कार समारोह के आयोजक डॉ राजेश मिश्र ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया पर खेरिया में उपनयन संस्कार होते रहेंगे। कहा ,वर्तमान समय में जो विवाह के समय जनेऊ और तिलकोत्सव साथ-साथ करते हैं, ऐसा ठीक नहीं है। इससे संस्कार दब जाते हैं।और व्यक्ति का पतन होता है। कहा, संस्कार को महत्व दें।और विधि पूर्वक संस्कार सम्पन्न करायें। कहा, हर गाँव में यज्ञशालायें हों ,उसी में यज्ञोपवीत संस्कार करायें। जिस गाँव में यज्ञशाला न हो तो आसपास के गाँव की यज्ञशाला में विद्वान आचार्य से उपनयन संस्कार करायें। रविकांत त्रिपाठी ने ब्रह्मचारियों को गायत्री मंत्र के बारे में विस्तृत जानकारी दी। विजय भाई ने कहा,खेरिया में संस्कार निर्माण का आन्दोलन शुरू हो गया है।आदेश कुमार (बरौनिया) अंकुर पाण्डेय व विपिन पाण्डेय (हूँसेपुर) अवनीश अवस्थी( लोकमानपुर) हर्षित तिवारी (जलालाबाद) ने यज्ञोपवीत धारण कर वेदमार्ग पर चलने का व्रत लिया।समारोह में वीरेन्द्र मिश्र, सत्यप्रकाश मिश्र (प्रधान),अजयपाल,सुशील मिश्र,आचार्य रामेश्वरानंद, प्रदीप पाण्डेय,दिलीप गुप्त, शिव कुमार,राजेश पाण्डेय, अरुण पाठक,रत्ना मिश्र, शान्ती देवी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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