अपनी वित्तीय गलतियों से सीखें ये 5 सबक

पर्सनल फाइनेंस में हम कमाई, बचत और निवेश से जुड़े कई फैसले लेते हैं। 30 साल की नौकरी और 20 साल की रिटायरमेंट लाइफ को जोड़ दें तो 50 साल या इससे ज्यादा हम पैसे से जुड़े निर्णय लेते हैं। क्या हम इन फैसलों को लेने में हमेशा सही साबित होते हैं? शायद ही कोई व्यक्ति यह दावा कर सके। सच तो यह है कि हम सभी से गलतियां होती हैं। कोई इससे अछूता नहीं है।

हम गलतियों से सीखते हैं या फिर उन्हें भुला बैठते हैं। दोबारा वही गलती करते हैं. बिना यह जाने कि ऐसा क्यों हुआ। उदाहरण के लिए हम में से कुछ लोग IPO या बेहद सस्ते शेयरों (पेनी स्‍टॉक) में निवेश करने से खुद को नहीं रोक पाते हैं। कई बार हम इसमें पैसा बना लेते हैं और उसका बखान करते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि नुकसान उठाकर उसे भूलने की कोशिश करते हैं। लेकिन, कोई ‘मौका’ देख खुद को रोक नहीं पाते हैं।

हम जो गलतियां करते हैं, उस पर वैज्ञानिकों ने काफी अध्ययन किया है। इस अध्ययन के निष्कर्ष भी काफी दिलचस्प हैं। इससे यह पता चलता है कि सूचनाओं की प्रोसेसिंग करने में दिमाग गलती नहीं करता है। पुराने अनुभव के आधार पर हम भविष्य के फैसले लेते हैं।

ट्रैफिक सिग्नल के लाल होते ही हम अपने आप ब्रेक लगा देते हैं। इसके हरा होते ही गाड़ी बढ़ा देते हैं। इसके बारे में हम ज्यादा सोचते नहीं हैं। दरअसल, असली समस्या वह शोर है, जिसके साथ सूचनाएं हम तक पहुंचती हैं। कई बार हम गलत सूचनाओं से अपने दिमाग को लबालब कर देते हैं। इनकी मात्रा इतनी हो जाती है कि सही चीजें बैठती ही नहीं हैं।

पर्सनल फाइनेंस के फैसलों के साथ बहुत-सी सूचनाएं जुड़ी होती हैं। इनमें से कोई भी अपना असर डाल सकती है। इसलिए गलतियों की गुंजाइश भी ज्यादा रहती है। पर, गलती के डर से कुछ किया न जाए, यह उपाय नहीं है। कुछ बातों को ध्यान में रखकर गलतियों की गुंजाइश को कम किया जा सकता है। सबसे पहली बात यह है कि पर्सनल फाइनेंस के विकल्प ऐसे नहीं होने चाहिए, जिनमें कुछ न करने की जरूरत पड़ती हो।

कोई गलती न हो जाए इस डर से लोग इस तरह के विकल्पों में पैसा लगाते हैं। सेविंग अकाउंट में भारी भरकम बैलेंस इसका उदाहरण है। कुछ न करने से बेहतर गलती करना है। दूसरा, कोई गलती करते हैं तो उसके बारे में थोड़ा विचार करें। गलती के लिए स्थितियों और दूसरों को दोष देने से बचें। फोकस करें कि कैसे आप चूक करने से बच सकते थे और क्यों आपने वह कदम नहीं उठाया।

अगर गिरते शेयर को आप बेच पाने में सफल नहीं हुए तो इस बात को स्वीकार करें। अगली बार स्टॉपलॉस लिमिट लगाएं। तीसरा, गलती हो जाने पर अपनी सीमाओं को जानें। मुमकिन है कि आप अपने खर्च को कंट्रोल न करना चाहते हों। आपका किसी प्रॉपर्टी से बहुत लगाव हो। डे ट्रेडिंग में आपको गैंबल‍िंग सरीखा मजा आने लगा हो। हर गलती सबक सीखने का मौका देती है। जानने की कोशिश करें कि क्यों आप बार-बार चूक करते हैं। कहीं सूचनाओं को लेकर आपका रवैया पक्षपातपूर्ण तो नहीं हो जाता है।

चौथा, उन संभावनाओं के बारे में सोचें जिनसे आप कभी भी गलती दुरुस्त कर सकते हों। यानी संभव होना चाहिए कि हम अपने किसी गलत फैसले को सुधार सकें। कभी भी अपनी पूरी कमाई या बचत किसी एक बड़ी चीज में नहीं लगा देना चाहिए। इस तरह की बड़ी गलती को सुधार पाना मुश्किल होता है।

पांचवां, चीजों को जितना सरल हो सकता है उतना सरल रखें। इसके अपने फायदे हैं। अगर यह बात आपको ठीक लगती है तो इसे अपनी आदतों में शुमार करें। किसी भी गलती को यूं ही न निकल जानें दें। हर गलती से सीखें। फिर इसी के अनुसार अपने वित्तीय फैसले लें।

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