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मोदी सुनामी में दागी-दबंग भी चारों खाने चित

‘मोदी हैं तो मुमकिन है’ का नारा बीजेपी की अजेय जीत के बाद सच साबित हो गया

सुधीर कुमार

लखनऊ। वैसे…’मोदी हैं तो मुमकिन है’ का नारा बीजेपी की अजेय जीत के बाद सच साबित हो गया। वहीं, हर चरण के चुनाव से पहले वोटों की बारिश गठबंधन के पक्ष में होने का दावा भी अखिलेश, माया और जयंत चौधरी का खोखला साबित हो गया। इसके आलावा लोकसभा चुनावों के कैंपेन के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा था कि जहां कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशी कमजोर हैं, वहां कांग्रेस बीजेपी का नुकसान कर रही है और गठबंधन को फायदा पहुंचा रही है। लेकिन जो नतीजे आए उससे साफ है कि कांग्रेस कई सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए वोट कटवा साबित हुई, जिसका फायदा बीजेपी को मिला। इसके अलावा दबंग और दागी उम्मीदवार भी मोदी की सुनामी के आगे चारों खाने चित हो गए।

हालांकि कुछ अपराधी भी चुनाव जीते हैं। इनमें गाजीपुर से बसपा के अफजाल अंसारी और रामपुर से आजम खान भी शामिल हैं। पहले चरण में सूबे के 96 उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। जिससे पता चला है कि इनमें से 24 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किया है। वहीं इनमें से गंभीर आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों की संख्या 17 रहे। दूसरे चरण में 85 उम्मीदवारों में 83 प्रत्याशियों की ओर से दाखिल शपथ पत्र का एडीआर ने विश्लेषण किया। रिपोर्ट के अनुसार दूसरे चरण में 23 फीसदी दागी इतिहास के हैं। जबकि, 17 फीसदी उम्मीदवारों पर गंभीर अपराध के आरोप हैं। इनमें से भाजपा के 38 फीसदी प्रत्याशी आपराधिक इतिहास वाले हैं। बसपा के 33 फीसदी प्रत्याशी दागी हैं। कांग्रेस के 25 फीसदी, प्रसपा के 50 फीसदी प्रत्याशी, लोकदल के 50 फीसदी प्रत्याशियों पर मामले दर्ज हैं।

यूपी इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने तीसरे चरण में यूपी की दस सीटों पर कुल 120 उम्मीदवारों से 24 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 19 के खिलाफ गंभीर धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज है। दागी प्रत्याशियों में पहले नंबर रामपुर से गठबंधन के प्रत्याशी मोहम्मद आजम खां का नाम है जिनके खिलाफ दस आपराधिक मामले दर्ज हैं और 15 गंभीर धाराएं लगी है। सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवार भी सपा के ही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 145 उम्मीदवारों में से 31 (21) फीसद उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किये है जिनमें से 26 उम्मीदवारों (18) फीसद पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है। इनमें 58 फीसद बीजेपी, 17 फीसद कांग्रेस, 38 प्रतिशत प्रगतिशील समाजवादी पार्टी, 33 प्रतिशत बसपा, 43 फीसद सपा के प्रत्याशी है। पांचवे चरण में यूपी के 14 लोकसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे 182 में से 178 उम्मीदवारों के एफिडेविट का एनालिसिस किया जिसमें सामने आया कि पांचवें चरण में सबसे ज्यादा दागी नेताओं को सभी प्रमुख राजनैतिक दलों ने जमकर टिकट बांटे है। वहीं छठे चरण में 126 उम्मीदवार यानी 20 प्रतिशत दागी थे। इनमें से 109 उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज है।

इनमें बसपा के भूपेंद्र पर सर्वाधिक 21 मुकदमे दर्ज हैं। बसपा के टिकट पर आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे भूपेंद्र पर 21 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास जैसे मामले भी शामिल हैं। दूसरे नंबर पर बसपा के ही मऊ से प्रत्याशी मुख्तार अंसारी पर 16 मामले दर्ज हैं। मुख्तार पर भी हत्या और हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं। आजमगढ़ में ही सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से निर्दल चुनाव लड़ रहे गोपाल निषाद के खिलाफ 11 मामले दर्ज हैं। कुशीनगर के खड्डा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे निर्दल प्रत्याशी राजकुमार तुलसियान पर 10 मामले दर्ज हैं। इस चरण में बसपा के 24, भाजपा के 18, सपा के 15, कांग्रेस के 3 उम्मीदवार दागी रहे। सातवें और आखिरी चरण के चुनाव में 43 दागी प्रत्याशियों पर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं जबकि 36 प्रत्याशियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत हैं। सातवें चरण में दागी प्रत्याशियों में अतीक अहमद पहले स्थान पर थे। इस चरण में 26 फीसदी आपराधिक ेप्रवृत्ति के प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें 22 फीसदी प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं।

‘लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं ऐसे प्रत्याशी
इलेक्शन वॉच के स्टेट हेड संजय सिंह के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2014 के मुकाबले 2019 में दागी प्रत्याशियों की संख्या में बढोत्तरी चिंता का विषय है। इसी तरह यदि अपराधियों की संख्या बढती रही तो आने वाले समय में लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा। इस चरण में प्रमुख पार्टियों में भाजपा के 11 में से 5, कांग्रेस के 9 में से 6, सपा के 8 में से 6 और बसपा के 4 में से 2 प्रत्याशी दागी हैं।’

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