लखनऊ

बलरामपुर अस्पताल में व्हीलचेयर-स्ट्रेचर का अभाव

मरीज को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं तीमारदार

लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल की अनदेखी और ढुल मुल रवैये से दवाएं तो दूर व्हीलचेयर-स्ट्रेचर तक मरीजों को नहीं मिल पा रही। ऐसे में तीमारदार मरीज को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। वहीं तीमारदार मरीज को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं।आज दोपहर हादसे में घायल महिला मरीज का सीटी स्कैन जांच होना था। न्यू बिल्डिंग से कोई स्ट्रेचर-व्हीलचेयर न मिलने पर तीमारदार मरीज को गोद में उठाकर जांच कराने पहुंचा। जहां से वापस मरीज को गोद में उठाकर वापस गया।

अफसरों का कहना है कि स्ट्रेचर-व्हीलचेयर मरीज खुद नहीं लेते हैं। इनकी कोई भी कमी नहीं है। सीतापुर का रहने वाला रमेश (40) मरीज करीब आठ दिन से अस्पताल की न्यू बिल्डिंग वार्ड में भर्ती हैं। उसके सिर पर चोट लगी है। आज दोपहर करीब दो बजे वार्ड से मरीज को जांच के लिए भेजा गया। तीमारदार रामलाल का आरोप है कि कई जगह पर व्हीलचेयर-स्ट्रेचर की तलाश की गई मगर वह नहीं मिली। देरी होता देख मरीज को गोद में उठाकर जांच केंद्र पर जाना पड़ा। जहां भी स्ट्रेचर-व्हीलचेयर न मिलने पर वापस गोद में ही लाना पड़ा। तीमारदार का आरोप है कि वार्ड में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

निदेशक डॉ. राजीव लोचन के मुताबिक, अस्पताल में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की कोई कमी नहीं है। तीमारदार खुद ही व्हीलचेयर नहीं लेते हैं। मरीज को गोद में उठाकर चल देते हैं।

 

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