लखनऊ

सिविल अस्पताल के बर्न यूनिट की एसी खराब

झुलसे मरीजों में बढ़ा संक्रमण का खतरा

लखनऊ। हजरतगंज पार्क रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल (सिविल) में इलाज के लिए वीवीआईपी अक्सर यहां रहते हैं लेकिन यहां की बर्न यूनिट में हप्तों से खराब पड़ी एसी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पंखें और कूलर चलने के बाद भी मरीज गर्मी से परेशान हैं। भीषण गर्मी में पसीना निकलने से इन जले और झुलसे मरीजों में तेजी से संक्रमण भी फैल रहा है। पूरे वार्ड में भीषण बदबू आ रही है। स्थिति यह है कि लोग नाक, मुंह ढककर वहां समय गुजार रहे हैं।

शरीर में फैल रहा तेजी से संक्रमण

सिविल अस्पताल की बर्न यूनिट में एक हफ्ते से एसी खराब है। पूरे वार्ड में पंखे और कूलर चल रहे हैं। कहीं-कहीं बेड पर तो पंखे भी बंद पड़े हैं। भीषण गर्मी में गंभीर रूप से झुलसे और जले मरीजों को पसीना आ रहा है। इससे उनकी स्किन में खुजली और दाने निकलने की समस्या पैदा हो रही है। उनके शरीर में तेजी से संक्रमण फैल रहा है। वार्ड से भीषण बदबू उठ रही है। पहले तल पर गेट से घुसने की लोग हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं।

मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही

स्किन विशेषज्ञों ने बताया कि जले और झुलसे मरीजों को गर्मी लगने, पसीना निकलने से तेजी से संक्रमण और समस्या बढ़ती है। रोजाना मरीजों को हो रही परेशानी राजधानी में सरकारी अस्पतालों में सिर्फ सिविल में ही बर्न मरीजों को इलाज मिलता रहा है। यहां पर भी आला अफसर, डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। इमरजेंसी में आने पर उन्हें पास में ही बने कमरों में पहले रखा जाता है। वहां शुरुआती इलाज के बाद बर्न यूनिट में शिफ्ट कर दिया जाता है। उसके बाद बर्न यूनिट में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बर्न वार्ड में दो डॉक्टर और 10 पैरामेडिकल स्टाफ ही तैनाती

यहां पांच दिन से भर्ती एक किशोरी को बार-बार एक से दूसरे बेड पर शिफ्ट करके परेशान किया जा रहा है। जबकि वहां तमाम दिक्कतों को देखते हुए घर वाले लगातार छुट्टी के लिए कह रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 40 बेड पर इलाज सिविल के बर्न वार्ड में 40 बेड की यूनिट है। इसमें दो डॉक्टर और 10 पैरामेडिकल स्टाफ ही तैनात हैं। जबकि अन्य संविदा कर्मचारियों के भरोसे ही यूनिट का संचालन किया जा रहा है। बलरामपुर में 11 बेड का वार्ड बनाकर मरीजों को इलाज दिया जाता है। लेकिन मरीज 55 से 60 फीसदी जले होने पर सिविल ही रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल प्रशासन भी मूकदर्शक बना हुआ है उसका कहना है कि एसी के रिपेयर के लिए मिस्त्री से कहा गया लेकिन वह नहीं आया।

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